नेहा बोरा के पुजारी-विवाद पर NDA का पलटवार: 'सनातन पर हमला बर्दाश्त नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा मंदिरों के पुजारियों पर यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के बाद 3 नवंबर 2026 को देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज़ हो गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक एकसुर में इस बयान को सनातन परंपरा और हिंदू आस्था पर सीधा हमला करार दिया है।
बिहार मंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने नेहा बोरा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'यह उनकी विचारधारा है और उन्हें इसी तरह की सोच के साथ पाला-पोसा गया है, इसलिए वह ऐसे बयान देती हैं।' सुमन ने जोड़ा कि देश की 140 करोड़ की आबादी में से 100 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मंदिर आस्था का विषय है, और ऐसे किसी भी स्थान पर हमला करने वाले की मानसिकता पर सवाल उठता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं कोई अप्रिय घटना होती भी है तो उसके लिए कानून में प्रावधान है, लेकिन सामान्यीकरण करके पूरी व्यवस्था पर आरोप लगाना सर्वथा गलत है। उनके अनुसार इस तरह की टिप्पणी 'पूरे हिंदू समाज और सनातन पर टिप्पणी' के रूप में देखी जाएगी।
भाजपा नेता का कांग्रेस से स्पष्टीकरण की माँग
मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य श्रीकांत भारतीय ने नेहा बोरा को कांग्रेस की कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी से सार्वजनिक स्पष्टीकरण माँगा। उन्होंने कहा, 'एक बार कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि क्या मंदिर के पुजारी रेप करते हैं? यह बयान देश के हिंदुओं और सनातन परंपराओं का अपमान है।'
भारतीय ने सवाल किया कि नेहा बोरा को 'सिर्फ पुजारी ही दिखे, मौलवी नहीं दिखे, पादरी नहीं दिखे?' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी उपासना पद्धति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन केवल एक धर्म को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बयान के परिणाम नेहा बोरा के साथ-साथ कांग्रेस को भी भुगतने पड़ेंगे।
शिवसेना का पलटवार
शिवसेना के नेता और प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि मंदिर के पुजारियों पर यह सीधा हमला है। उन्होंने तर्क दिया कि नेहा बोरा ने मस्जिद या गिरजाघर में होने वाली घटनाओं का उल्लेख नहीं किया, क्योंकि 'हिंदू शांतिप्रिय और करुणा के सागर होते हैं।' दुबे ने वामपंथी विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि 'लेफ्ट विंग वालों की मानसिकता विदेशों से संचालित होती है।'
उन्होंने यह भी कहा कि पुजारी दिन-रात प्रभु की सेवा, आरती और पूजन में लगे रहते हैं और 'चंद वोटों के लालच' में उनके खिलाफ ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। दुबे ने देश के इतिहास और संस्कृति को 'कलंकित' करने का आरोप भी लगाया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से तेज़ है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में सनातन परंपरा से जुड़े विभिन्न बयानों ने राष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छेड़ी है। नेहा बोरा के AISA से जुड़े होने और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ रैली में मंच साझा करने को BJP नेताओं ने विशेष रूप से रेखांकित किया, हालाँकि कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की स्थिति
NDA के एकजुट विरोध के बाद यह विवाद और गहरा होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राज्य विधानसभाओं में भी उठाया जा सकता है। नेहा बोरा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र बनी हुई है।