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हामिद अंसारी ने सनातन का अपमान नहीं किया — योगी के बयान पर कांग्रेस नेताओं का पलटवार

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हामिद अंसारी ने सनातन का अपमान नहीं किया — योगी के बयान पर कांग्रेस नेताओं का पलटवार

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की टिप्पणियों को सनातन पर हमला बताया, तो कांग्रेस के तीन नेताओं — इमरान मसूद, उदित राज और आसिम वकार — ने एकजुट होकर पलटवार किया। दोनों पक्षों के बीच यह बयानबाज़ी धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सांस्कृतिक पहचान की बड़ी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की टिप्पणियों को सनातन परंपरा पर हमला और भारतीयता के लिए खतरा बताया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अंसारी के बयान में सनातन के खिलाफ कुछ भी नहीं था और आरोप को 'नफरत फैलाने' की कोशिश करार दिया।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि अंसारी की बात नेहरू और डॉ.
अंबेडकर जैसे नेताओं ने भी कही है; सवाल उठाया कि मुस्लिम होने के कारण बयान को विशेष तवज्जो क्यों मिल रही है।
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा कि अंसारी ने पूरी जिंदगी सनातनी हिंदुओं के साथ काम किया और वे हिंदुओं के खिलाफ नहीं हैं।
यह विवाद 21 सितंबर 2026 को तब सामने आया जब तीनों कांग्रेस नेताओं ने नई दिल्ली में अपनी प्रतिक्रियाएँ दर्ज कराईं।

कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का बचाव करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान को खारिज किया, जिसमें उन्होंने अंसारी की सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर दी गई टिप्पणियों को सनातन परंपरा पर हमला और भारतीयता के लिए खतरा बताया था। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस नेता उदित राज और कांग्रेस नेता आसिम वकार ने एकसुर में कहा कि अंसारी के बयान में सनातन परंपरा के विरुद्ध कुछ भी नहीं था।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर की गई टिप्पणियों को भारतीय संस्कृति के लिए खतरनाक और सनातन परंपरा को निशाना बनाने की कोशिश बताया था। इस बयान के बाद कांग्रेस खेमे में तत्काल प्रतिक्रिया देखने को मिली।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'यह सनातन का अपमान कैसे है? उन्होंने ऐसा क्या कहा जिससे अपमान हुआ हो? मैंने उनके बयान में ऐसी कोई बात नहीं सुनी जो सनातन के खिलाफ हो। यह उनकी आदत बन गई है। आप मस्जिदें गिराते हैं, दरगाहें नष्ट करते हैं और हमारे खिलाफ हिंसा करते हैं और जब भी हम इस बारे में बात करते हैं, तो आप इसे सनातन का अपमान कहते हैं। आप नफरत फैला रहे हैं।'

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि हामिद अंसारी ने सनातन परंपरा की आलोचना करने जैसा कुछ किया है। नेहरू ने भी यही कहा था और डॉ. अंबेडकर ने भी यही कहा था। इस बात को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है कि वे मुस्लिम समुदाय से हैं? ऐसा लगता है कि वे लगातार किसी मौके की तलाश में रहते हैं।'

कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा, 'हामिद अंसारी ने पूरी जिंदगी सनातनी हिंदुओं के साथ काम किया है। जब वह उपराष्ट्रपति थे, तब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री हिंदू थे। मुझे लगता है कि हामिद अंसारी को समझने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गलती कर रहे हैं। हामिद अंसारी सनातनियों और हिंदुओं के खिलाफ नहीं हैं।'

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने हाल ही में सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता के विषय पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ की थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन्हें भारतीयता और संस्कृति के लिए खतरा बताते हुए आलोचना की, जिसके बाद यह राजनीतिक विवाद तूल पकड़ गया।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। विपक्षी दल आलोचकों के अनुसार इस तरह के बयानों से ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रकार का वाद-विवाद चुनावी दृष्टि से संवेदनशील समय में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयानबाज़ी के दौर में मूल मुद्दे — जैसे धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्य — पीछे चले जाते हैं। आगे देखें तो यह विवाद संसद और सार्वजनिक मंचों पर और तीव्र रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि मूल बयान की वास्तविक सामग्री — जो अंसारी ने कही — इस पूरे शोर में कहीं खो जाती है। उदित राज का यह सवाल कि नेहरू या अंबेडकर के समान विचारों पर इतना हंगामा क्यों नहीं हुआ, एक वैध संवैधानिक बिंदु है जिस पर बहस होनी चाहिए। इस तरह की बयानबाज़ी जवाबदेही की राजनीति को पहचान की राजनीति में बदल देती है, और दोनों पक्ष इस खेल के जानकार खिलाड़ी हैं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हामिद अंसारी और सनातन परंपरा विवाद क्या है?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर कुछ टिप्पणियाँ कीं, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन परंपरा पर हमला और भारतीयता के लिए खतरा बताया। इस पर कांग्रेस के तीन नेताओं ने पलटवार करते हुए अंसारी का बचाव किया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने योगी के बयान पर क्या कहा?
इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने अंसारी के बयान में सनातन के खिलाफ कुछ भी नहीं सुना और यह आरोप 'नफरत फैलाने' की कोशिश है। उन्होंने सवाल किया कि मस्जिदों और दरगाहों पर की जाने वाली कार्रवाइयों पर आपत्ति को सनातन का अपमान क्यों कहा जा रहा है।
कांग्रेस नेता उदित राज का क्या तर्क है?
उदित राज ने कहा कि अंसारी जैसी बात नेहरू और डॉ. अंबेडकर भी कह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल इसलिए विवाद खड़ा किया जा रहा है क्योंकि अंसारी मुस्लिम समुदाय से हैं, और यह मुस्लिम नेताओं के बयानों पर विवाद खड़ा करने की एक सुनियोजित रणनीति है।
आसिम वकार ने हामिद अंसारी के बारे में क्या कहा?
आसिम वकार ने कहा कि हामिद अंसारी ने पूरी जिंदगी सनातनी हिंदुओं के साथ काम किया है और उनके उपराष्ट्रपति काल में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सभी हिंदू थे। उन्होंने कहा कि अंसारी हिंदुओं के खिलाफ नहीं बल्कि देश में अपराध और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ हैं।
इस राजनीतिक विवाद का महत्व क्या है?
यह विवाद धार्मिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सौहार्द और राजनीतिक बयानबाज़ी की उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो भारत में लगातार तेज होती जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के विवाद ध्रुवीकरण को बढ़ाते हैं और संवैधानिक मूल्यों पर होने वाली असली बहस को पीछे धकेल देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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