20 सितंबर 2026
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हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' टिप्पणी पर इमाम इलियासी का पलटवार, BJP ने भी घेरा

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हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' टिप्पणी पर इमाम इलियासी का पलटवार, BJP ने भी घेरा

सारांश

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' वाली टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इमाम इलियासी ने इसे मुसलमानों के नाम पर सियासत और देश का माहौल बिगाड़ने की साजिश करार दिया, तो BJP नेताओं ने भी तीखा पलटवार किया।

मुख्य बातें

इमाम उमर अहमद इलियासी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' टिप्पणी की 20 सितंबर 2026 को कड़ी निंदा की।
इलियासी ने आरोप लगाया कि अंसारी मुसलमानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और देश का माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है।
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भारत की पंथनिरपेक्षता हिंदू बहुसंख्यक आबादी की सहनशीलता के कारण है।
उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को उनके बयानों से खतरा है।
हामिद अंसारी 2007 से 2017 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे और अल्पसंख्यक मुद्दों पर उनके बयान अक्सर विवाद का विषय बनते रहे हैं।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' संबंधी टिप्पणी पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने कड़ी आपत्ति जताई है। 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इलियासी ने आरोप लगाया कि अंसारी मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं और उनका यह बयान देश का माहौल बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।

इमाम इलियासी की सीधी चुनौती

इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं मुसलमानों के बारे में हामिद अंसारी के बयान की कड़ी निंदा करता हूं। हामिद अंसारी अब मुसलमानों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन जब वे बड़े-बड़े पदों पर बैठे थे, तब उन्हें मुसलमान याद नहीं आए। आज उन्हें मुसलमान याद आ रहे हैं।' इलियासी ने तर्क दिया कि मुस्लिम समुदाय अंसारी की मंशा को भलीभांति समझता है।

उन्होंने आगे कहा, 'आज जब मुसलमान उनके बारे में नहीं पूछ रहे हैं, तो उन्हें लगता है कि उन्हें मुसलमानों के नाम पर राजनीति करनी चाहिए। लेकिन मुसलमान समझदार हैं। वे इस तरह के बयानों और उनकी मंशा को समझते हैं।'

साजिश का आरोप

इलियासी ने अंसारी के बयान को लेकर और भी तीखी भाषा अपनाई। उन्होंने कहा, 'मुझे यह देश का माहौल खराब करने की कोई साजिश नजर आती है। कोई भी मुसलमान उनके बयान से सहमत नहीं है। आज वो जिस तरह की भाषा बोल रहे हैं, उन्हें अपना नजरिया बदलना चाहिए। उनका नजरिया बदलेगा तो नजारा बदल जाएगा।' इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों हलकों में हलचल मचा दी है।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने अंसारी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, 'अगर भारत में हिंदू बहुसंख्यक न होते, तो भारत न सेकुलर होता और न ही पंथनिरपेक्ष होता। भारत सेकुलर और पंथनिरपेक्ष देश इसलिए है, क्योंकि यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, जिनकी मान्यताएं और संस्कृति सहनशीलता और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः' की है।'

नकवी ने विभाजन का संदर्भ देते हुए कहा, 'जब बंटवारा हुआ, तो दो देश बने। एक भारत, जहां हिंदू बहुसंख्यक थे और दूसरा पाकिस्तान, जहां मुसलमान बहुसंख्यक थे। हिंदू बहुसंख्यक देश ने सेकुलरिज्म और पंथनिरपेक्षता का रास्ता चुना, जबकि मुस्लिम बहुसंख्यक देश ने इस्लामिक राष्ट्र का झंडा बुलंद किया। दोनों में बुनियादी फर्क है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत हिंदू बहुसंख्यक न होता, तो मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति नहीं बन पाता।

उत्तर प्रदेश मंत्री का तीखा हमला

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा, 'हामिद अंसारी पहले देश के मुसलमानों को डरा हुआ बता रहे थे और कह रहे थे कि देश में रहने से डर लगता है, लेकिन वे आज भी इसी देश में रह रहे हैं। आज उन्होंने फिर से बयान दिया है और नेहरू की टिप्पणी का हवाला दिया है।' सिंह ने सीधे अंसारी को निशाने पर लेते हुए कहा, 'आज देश को हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से खतरा नहीं है, बल्कि आप जैसे लोगों से खतरा है। आपके बयानों से देश को खतरा है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हामिद अंसारी 2007 से 2017 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। उनकी ओर से समय-समय पर भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर टिप्पणियाँ की जाती रही हैं, जो विवादों को जन्म देती रहती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी यह है कि समुदाय के अपने नेता किस तरह 'बाहरी' सियासी बयानों को खारिज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या अंसारी इन आरोपों का जवाब देते हैं और क्या यह विवाद चुनावी राजनीति में नई दरारें पैदा करता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हामिद अंसारी की विवादित टिप्पणी क्या थी?
हामिद अंसारी ने 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' को लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने नेहरू की टिप्पणी का भी हवाला दिया। यह बयान धार्मिक और राजनीतिक दोनों हलकों में तीखी प्रतिक्रियाओं का कारण बना।
इमाम इलियासी ने अंसारी के बयान पर क्या कहा?
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने अंसारी के बयान की कड़ी निंदा की और कहा कि वे मुसलमानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बयान से देश का माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है।
BJP ने हामिद अंसारी की टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भारत की पंथनिरपेक्षता हिंदू बहुसंख्यक आबादी की सहनशीलता की देन है, और यदि भारत हिंदू बहुसंख्यक न होता तो मुस्लिम समुदाय से कोई राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति नहीं बन पाता। उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सीधे अंसारी को निशाना बनाते हुए कहा कि देश को उनके बयानों से खतरा है।
हामिद अंसारी कौन हैं और उनका विवादों से क्या संबंध है?
हामिद अंसारी 2007 से 2017 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। पद छोड़ने के बाद से वे अल्पसंख्यक अधिकारों और सांप्रदायिक मुद्दों पर समय-समय पर बयान देते रहे हैं, जो अक्सर राजनीतिक विवादों को जन्म देते हैं।
क्या मुस्लिम समुदाय हामिद अंसारी के बयान से सहमत है?
इमाम इलियासी के अनुसार, कोई भी मुसलमान अंसारी के बयान से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अंसारी की मंशा को समझता है और उनके इस तरह के बयानों को राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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