एसबीआई रिसर्च: एलटीसीजी टैक्स खत्म करने से GDP का 0.1-0.2% नुकसान, राजकोषीय लक्ष्य प्रभावित नहीं
सारांश
मुख्य बातें
एसबीआई रिसर्च की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार सभी निवेशक श्रेणियों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर को पूरी तरह समाप्त कर सकती है और फिर भी राजकोषीय समेकन के रोडमैप पर इसका सीमित असर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे सरकारी राजस्व में GDP का केवल 0.1 से 0.2 प्रतिशत की कमी आएगी।
राजस्व नुकसान का अनुमान
रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 में एलटीसीजी कर हटाने से सरकार को होने वाला राजस्व नुकसान ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ के दायरे में सीमित रहने की संभावना है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है, 'यदि सैद्धांतिक रूप से सभी पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिए जाएं, तो भी सरकार इस वित्तीय झटके को सहन करने में सक्षम होगी।' राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्यों को मोटे तौर पर बनाए रखते हुए इस नुकसान को वहन किया जा सकता है।
बदलते बाज़ार परिदृश्य का संदर्भ
वित्त वर्ष 2025-26 में एलटीसीजी संग्रह करीब ₹1 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में यह घटकर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ रह सकता है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में ₹1.3 लाख करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह असाधारण बाज़ार परिस्थितियों की उपज था — उस वर्ष भारतीय शेयर बाज़ारों ने करीब 30 प्रतिशत का रिटर्न दिया था, जिसके चलते विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की थी। यह ऐसे समय में आया है जब हालिया बाज़ार स्थितियाँ उससे काफी भिन्न हैं — पिछले तीन वर्षों में निफ्टी का औसत रिटर्न महज 0.5 प्रतिशत रहा है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कुल मिलाकर ₹4.8 लाख करोड़ की निकासी की है।
खुदरा निवेशकों को राहत के सुझाव
रिपोर्ट में पूंजीगत लाभ कर के व्यापक ढाँचे में बदलाव की भी सिफारिश की गई है। खुदरा निवेशकों को अधिक राहत देने के उद्देश्य से सालाना एलटीसीजी छूट सीमा को मौजूदा ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने और इसे महंगाई दर से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। यह सुझाव ऐसे समय पर आया है जब निवेशक वर्ग लगातार कर-सुधार की माँग कर रहा है।
निवेश अवधि के आधार पर टैक्स स्लैब का प्रस्ताव
रिपोर्ट में 'होल्डिंग पीरियड' यानी निवेश अवधि के आधार पर कर दरों को घटाने का एक ग्रेडेड ढाँचा सुझाया गया है। इसके अंतर्गत दो से तीन वर्ष तक रखे गए निवेश पर 5 प्रतिशत की रियायती दर लागू करने का सुझाव है, जबकि तीन वर्ष से अधिक अवधि की परिसंपत्तियों पर एलटीसीजी टैक्स शून्य किए जाने की बात कही गई है। एक से दो वर्ष के बीच रखे गए निवेश पर मौजूदा 12.5 प्रतिशत की दर बनाए रखने का सुझाव दिया गया है।
टर्म डिपॉज़िट पर समान कर दर की सिफारिश
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऊँची ब्याज दरों के कारण टर्म डिपॉज़िट में निवेश का अनुपात बढ़ा है। अलग-अलग परिपक्वता अवधियों पर लागू मौजूदा कर व्यवस्था के स्थान पर सभी अवधियों के लिए एकसमान 15 प्रतिशत की दर लागू करने पर सरकार को करीब ₹10,500 करोड़ का राजस्व नुकसान हो सकता है। बचत जमा और सावधि जमा दोनों को मिलाकर यह कुल नुकसान ₹12,000 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है। आने वाले केंद्रीय बजट से पहले ये सिफारिशें नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन सकती हैं।