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एसबीआई रिसर्च: एलटीसीजी टैक्स खत्म करने से GDP का 0.1-0.2% नुकसान, राजकोषीय लक्ष्य प्रभावित नहीं

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एसबीआई रिसर्च: एलटीसीजी टैक्स खत्म करने से GDP का 0.1-0.2% नुकसान, राजकोषीय लक्ष्य प्रभावित नहीं

सारांश

एसबीआई रिसर्च ने सुझाव दिया है कि एलटीसीजी टैक्स हटाने से सरकार को FY28 में ₹40,000-50,000 करोड़ का नुकसान होगा — GDP का महज 0.1-0.2%। रिपोर्ट में होल्डिंग अवधि आधारित ग्रेडेड टैक्स स्ट्रक्चर और छूट सीमा ₹2 लाख करने की भी सिफारिश है।

मुख्य बातें

एसबीआई रिसर्च के अनुसार एलटीसीजी टैक्स खत्म करने से राजस्व में GDP का केवल 0.1-0.2% की कमी आएगी।
वित्त वर्ष 2027-28 में संभावित राजस्व नुकसान ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक सीमित रहने का अनुमान।
सालाना एलटीसीजी छूट सीमा ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने और महंगाई से जोड़ने की सिफारिश।
तीन वर्ष से अधिक की होल्डिंग पर शून्य टैक्स, 2-3 वर्ष पर 5%, 1-2 वर्ष पर 12.5% का प्रस्ताव।
पिछले तीन वर्षों में निफ्टी का औसत रिटर्न महज 0.5% ; FII ने ₹4.8 लाख करोड़ की निकासी की।
टर्म डिपॉज़िट पर समान 15% कर लागू करने पर कुल नुकसान ₹12,000 करोड़ अनुमानित।

एसबीआई रिसर्च की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार सभी निवेशक श्रेणियों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर को पूरी तरह समाप्त कर सकती है और फिर भी राजकोषीय समेकन के रोडमैप पर इसका सीमित असर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे सरकारी राजस्व में GDP का केवल 0.1 से 0.2 प्रतिशत की कमी आएगी।

राजस्व नुकसान का अनुमान

रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 में एलटीसीजी कर हटाने से सरकार को होने वाला राजस्व नुकसान ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ के दायरे में सीमित रहने की संभावना है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है, 'यदि सैद्धांतिक रूप से सभी पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिए जाएं, तो भी सरकार इस वित्तीय झटके को सहन करने में सक्षम होगी।' राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्यों को मोटे तौर पर बनाए रखते हुए इस नुकसान को वहन किया जा सकता है।

बदलते बाज़ार परिदृश्य का संदर्भ

वित्त वर्ष 2025-26 में एलटीसीजी संग्रह करीब ₹1 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में यह घटकर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ रह सकता है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में ₹1.3 लाख करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह असाधारण बाज़ार परिस्थितियों की उपज था — उस वर्ष भारतीय शेयर बाज़ारों ने करीब 30 प्रतिशत का रिटर्न दिया था, जिसके चलते विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की थी। यह ऐसे समय में आया है जब हालिया बाज़ार स्थितियाँ उससे काफी भिन्न हैं — पिछले तीन वर्षों में निफ्टी का औसत रिटर्न महज 0.5 प्रतिशत रहा है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कुल मिलाकर ₹4.8 लाख करोड़ की निकासी की है।

खुदरा निवेशकों को राहत के सुझाव

रिपोर्ट में पूंजीगत लाभ कर के व्यापक ढाँचे में बदलाव की भी सिफारिश की गई है। खुदरा निवेशकों को अधिक राहत देने के उद्देश्य से सालाना एलटीसीजी छूट सीमा को मौजूदा ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने और इसे महंगाई दर से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। यह सुझाव ऐसे समय पर आया है जब निवेशक वर्ग लगातार कर-सुधार की माँग कर रहा है।

निवेश अवधि के आधार पर टैक्स स्लैब का प्रस्ताव

रिपोर्ट में 'होल्डिंग पीरियड' यानी निवेश अवधि के आधार पर कर दरों को घटाने का एक ग्रेडेड ढाँचा सुझाया गया है। इसके अंतर्गत दो से तीन वर्ष तक रखे गए निवेश पर 5 प्रतिशत की रियायती दर लागू करने का सुझाव है, जबकि तीन वर्ष से अधिक अवधि की परिसंपत्तियों पर एलटीसीजी टैक्स शून्य किए जाने की बात कही गई है। एक से दो वर्ष के बीच रखे गए निवेश पर मौजूदा 12.5 प्रतिशत की दर बनाए रखने का सुझाव दिया गया है।

टर्म डिपॉज़िट पर समान कर दर की सिफारिश

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऊँची ब्याज दरों के कारण टर्म डिपॉज़िट में निवेश का अनुपात बढ़ा है। अलग-अलग परिपक्वता अवधियों पर लागू मौजूदा कर व्यवस्था के स्थान पर सभी अवधियों के लिए एकसमान 15 प्रतिशत की दर लागू करने पर सरकार को करीब ₹10,500 करोड़ का राजस्व नुकसान हो सकता है। बचत जमा और सावधि जमा दोनों को मिलाकर यह कुल नुकसान ₹12,000 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है। आने वाले केंद्रीय बजट से पहले ये सिफारिशें नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब सरकार एक साथ राजकोषीय मज़बूती और विकास दर के लक्ष्य साधने की कोशिश कर रही है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बाज़ार में तेज़ी लौटने पर एलटीसीजी संग्रह फिर उछल सकता है — जैसा FY25 में हुआ था — जिससे 'सीमित नुकसान' का यह आकलन बदल सकता है। बिना बाज़ार-चक्र आधारित विश्लेषण के, यह सिफारिश एकतरफा तस्वीर पेश करने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलटीसीजी टैक्स क्या है और यह निवेशकों को कैसे प्रभावित करता है?
दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर वह कर है जो शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य परिसंपत्तियों को एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले लाभ पर लगाया जाता है। भारत में इक्विटी पर एलटीसीजी की मौजूदा दर 12.5% है और सालाना ₹1.25 लाख तक का लाभ कर-मुक्त है।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार एलटीसीजी टैक्स हटाने से सरकार को कितना नुकसान होगा?
एसबीआई रिसर्च के अनुसार एलटीसीजी कर समाप्त करने से वित्त वर्ष 2027-28 में सरकार का राजस्व नुकसान ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक सीमित रहने की संभावना है, जो GDP का केवल 0.1-0.2% है। रिपोर्ट का कहना है कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को मोटे तौर पर बनाए रखते हुए यह नुकसान सहा जा सकता है।
एसबीआई रिसर्च ने होल्डिंग अवधि आधारित टैक्स स्ट्रक्चर में क्या बदलाव सुझाए हैं?
रिपोर्ट में तीन साल से अधिक रखी गई संपत्तियों पर शून्य एलटीसीजी, दो से तीन साल पर 5% और एक से दो साल पर मौजूदा 12.5% दर बनाए रखने का प्रस्ताव है। इससे दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
वित्त वर्ष 2024-25 में एलटीसीजी संग्रह इतना अधिक क्यों था?
वित्त वर्ष 2024-25 में एलटीसीजी संग्रह करीब ₹1.3 लाख करोड़ था क्योंकि उस वर्ष भारतीय शेयर बाज़ारों ने करीब 30% रिटर्न दिया, जिससे विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। हालाँकि एसबीआई रिसर्च के अनुसार यह असाधारण परिस्थितियों का नतीजा था और मौजूदा बाज़ार स्थितियाँ इससे काफी भिन्न हैं।
क्या टर्म डिपॉज़िट पर भी कर बदलाव की सिफारिश की गई है?
हाँ, रिपोर्ट में सभी परिपक्वता अवधियों के टर्म डिपॉज़िट पर एकसमान 15% कर लागू करने का सुझाव दिया गया है। इससे सरकार को करीब ₹10,500 करोड़ का नुकसान होगा और बचत जमा को मिलाकर कुल नुकसान ₹12,000 करोड़ अनुमानित है।
राष्ट्र प्रेस
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