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जीएसटी से राज्यों को FY27 में ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ: SBI रिपोर्ट

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जीएसटी से राज्यों को FY27 में ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ: SBI रिपोर्ट

सारांश

SBI की रिपोर्ट बताती है कि नई कर व्यवस्था में कंपेनसेशन सेस हटने के बावजूद राज्यों को FY27 में ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ मिलेगा। डीमेरिट गुड्स पर बढ़ी जीएसटी दरें और BED में राज्यों की हिस्सेदारी इस बढ़त की मुख्य वजह है।

मुख्य बातें

SBI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार FY27 में राज्यों को जीएसटी और BED से ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है।
राज्यों की कुल राजस्व हिस्सेदारी FY26 के ₹17.7 लाख करोड़ से बढ़कर FY27 में ₹19.1 लाख करोड़ होने का अनुमान।
जीएसटी कलेक्शन की सालाना वृद्धि दर 8-9 प्रतिशत रहने का अनुमान; नरमी रेट रैशनलाइजेशन के कारण।
नई व्यवस्था में राज्यों को AED का केवल 41 प्रतिशत ( ₹14,708 करोड़ ) मिलेगा; काल्पनिक नुकसान ₹21,000 करोड़ लेकिन 28 राज्यों में बँटने पर नगण्य।
डीमेरिट गुड्स पर 40% जीएसटी से राज्यों को प्रति ₹100 लेनदेन पर ₹8.46 का अतिरिक्त लाभ।
SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ.
सौम्य कांति घोष ने कहा कि राजस्व हिस्सेदारी के आकार में वृद्धि का सीधा फायदा राज्यों को मिलेगा।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में जीएसटी कलेक्शन और बेसिक एक्साइज ड्यूटी (BED) में राज्यों की हिस्सेदारी को मिलाकर राज्यों को वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में करीब ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है। 24 जुलाई को जारी इस रिपोर्ट ने कर ढाँचे में हुए बदलावों के बीच राज्यों की वित्तीय स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला है।

जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार और अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में जीएसटी कलेक्शन में फिर से तेज़ी देखने को मिल सकती है। इसकी सालाना वृद्धि दर 8-9 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह की गति में जो नरमी आई है, वह मुख्य रूप से रेट रैशनलाइजेशन की वजह से है — और यह पहले से अनुमानित था, इसलिए इसे चिंताजनक नहीं माना जाना चाहिए।

नई कर व्यवस्था में राज्यों की हिस्सेदारी

संशोधित टैक्स व्यवस्था के तहत कंपेनसेशन सेस को समाप्त कर उसकी जगह एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (AED) लागू की गई है। इस बदलाव के बाद जीएसटी और बेसिक एक्साइज ड्यूटी से राज्यों की कुल हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 के लगभग ₹17.7 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में करीब ₹19.1 लाख करोड़ होने का अनुमान है।

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि कुल राजस्व हिस्सेदारी का आकार बढ़ा है और इसका सीधा फायदा राज्यों को मिलेगा।

काल्पनिक नुकसान का आकलन

रिपोर्ट में एक विस्तृत गणना भी प्रस्तुत की गई है। यदि वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में बेसिक एक्साइज ड्यूटी में 20 प्रतिशत वृद्धि मानी जाए और पूरी अतिरिक्त राशि को AED माना जाए, तो इसका अनुमानित मूल्य ₹35,874 करोड़ होगा। पुरानी व्यवस्था में यह पूरी राशि कंपेनसेशन सेस के रूप में राज्यों को मिलती थी, लेकिन नई व्यवस्था में राज्यों को AED का केवल 41 प्रतिशत — यानी ₹14,708 करोड़ — ही प्राप्त होगा।

इस आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को लगभग ₹21,000 करोड़ का काल्पनिक नुकसान दिखाई देता है। हालाँकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 28 राज्यों में विभाजित होने पर यह राशि प्रत्येक राज्य के लिए बेहद कम रह जाती है।

डीमेरिट गुड्स पर बढ़ा राजस्व

रिपोर्ट के अनुसार, पान और तंबाकू जैसे डीमेरिट गुड्स पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किए जाने से राज्यों को पहले की तुलना में अधिक राजस्व मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, ₹100 के कर योग्य इंट्रा-स्टेट लेनदेन पर पहले राज्यों को ₹19.74 मिलते थे, जबकि नई व्यवस्था में यह बढ़कर ₹28.20 हो जाएगा — यानी प्रति ₹100 पर ₹8.46 का अतिरिक्त लाभ।

इसकी तुलना में केंद्र का हिस्सा केवल ₹3.54 बढ़ेगा। रिपोर्ट में इसे इस बात के प्रमाण के रूप में रेखांकित किया गया है कि उच्च कर दरों का लाभ राज्यों को भी पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है।

कंपेनसेशन सेस को लेकर भ्रांति का खंडन

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह धारणा सही नहीं है कि कंपेनसेशन सेस कभी केंद्र सरकार का राजस्व नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेस केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता था और पहले केंद्र के कर राजस्व के रूप में दर्ज होता था। इसके बाद इसे जीएसटी कंपेनसेशन फंड में स्थानांतरित किया जाता था, जहाँ से राज्यों को ग्रांट के रूप में भुगतान किया जाता था। गौरतलब है कि यह तकनीकी स्पष्टीकरण केंद्र-राज्य राजकोषीय संबंधों की बहस में अहम भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का काल्पनिक नुकसान 28 राज्यों में बँटने पर 'बेहद कम' है, सांख्यिकीय रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह छोटे और राजकोषीय रूप से कमज़ोर राज्यों की वास्तविक चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता। असली प्रश्न यह है कि क्या 8-9 प्रतिशत की अनुमानित जीएसटी वृद्धि दर वास्तव में हासिल होगी, या रेट रैशनलाइजेशन के बाद संग्रह में नरमी लंबे समय तक बनी रहेगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SBI रिपोर्ट के अनुसार FY27 में राज्यों को जीएसटी से कितना लाभ मिलेगा?
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार FY27 में जीएसटी और बेसिक एक्साइज ड्यूटी से राज्यों की कुल हिस्सेदारी मिलाकर FY26 की तुलना में करीब ₹1.43 लाख करोड़ का शुद्ध अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है। कुल राजस्व हिस्सेदारी ₹17.7 लाख करोड़ से बढ़कर ₹19.1 लाख करोड़ होने का अनुमान है।
कंपेनसेशन सेस हटने से राज्यों पर क्या असर पड़ेगा?
कंपेनसेशन सेस की जगह एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (AED) लागू होने से राज्यों को AED का केवल 41 प्रतिशत मिलेगा, जिससे FY27 में लगभग ₹21,000 करोड़ का काल्पनिक नुकसान दिखाई देता है। हालाँकि SBI रिपोर्ट का कहना है कि 28 राज्यों में बँटने पर यह राशि बेहद कम रह जाती है।
जीएसटी कलेक्शन में आई नरमी की वजह क्या है?
SBI रिपोर्ट के अनुसार, हाल के समय में जीएसटी संग्रह की रफ्तार में आई नरमी मुख्य रूप से रेट रैशनलाइजेशन की वजह से है, जो पहले से अनुमानित थी। रिपोर्ट का अनुमान है कि आगे जीएसटी कलेक्शन में फिर से तेज़ी आएगी और सालाना वृद्धि 8-9 प्रतिशत रहेगी।
डीमेरिट गुड्स पर बढ़ी जीएसटी दर से राज्यों को कैसे फायदा होगा?
पान और तंबाकू जैसे डीमेरिट गुड्स पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किए जाने से राज्यों को प्रति ₹100 के कर योग्य लेनदेन पर ₹19.74 की जगह ₹28.20 मिलेंगे — यानी ₹8.46 का अतिरिक्त लाभ। इसकी तुलना में केंद्र का हिस्सा केवल ₹3.54 बढ़ेगा।
क्या कंपेनसेशन सेस केंद्र सरकार का राजस्व था?
SBI रिपोर्ट के अनुसार, यह धारणा गलत है कि कंपेनसेशन सेस कभी केंद्र का राजस्व नहीं था। यह सेस केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता था और केंद्र के कर राजस्व के रूप में दर्ज होता था, जिसे बाद में जीएसटी कंपेनसेशन फंड के ज़रिए राज्यों को ग्रांट के रूप में दिया जाता था।
राष्ट्र प्रेस
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