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भारत-जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी साझेदारी और गहरी होगी: राजदूत फिलिप एकरमैन

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भारत-जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी साझेदारी और गहरी होगी: राजदूत फिलिप एकरमैन

सारांश

जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत-जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग आने वाले वर्षों में और गहरा होगा। मध्य पूर्व के तनाव के बीच उन्होंने ऊर्जा स्रोतों में विविधता और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने को दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकता बताया।

मुख्य बातें

जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने 9 जुलाई को नई दिल्ली में भारत-जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी साझेदारी के और गहरे होने की बात कही।
एकरमैन ने कहा कि ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया महिलाओं की भागीदारी के बिना सफल नहीं हो सकती।
मध्य पूर्व संघर्ष के मद्देनज़र राजदूत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने को दोनों देशों की ज़रूरत बताया।
होर्मुज स्ट्रेट के खुले रहने को ऊर्जा आपूर्ति के लिए अनिवार्य बताते हुए कूटनीतिक समाधान पर बल दिया।
भारत और जर्मनी दोनों जीवाश्म ईंधन पर विदेशी निर्भरता घटाने के लिए मिलकर रणनीति बनाएँगे।

भारत और जर्मनी के बीच स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग आने वाले वर्षों में और प्रगाढ़ होगा — यह बात भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने 9 जुलाई को नई दिल्ली में कही। एकरमैन के अनुसार, दोनों देश अपनी विशेषज्ञता और अनुभव को मिलाकर एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग की दिशा

राजदूत एकरमैन ने कहा, "भारत और जर्मनी के बीच यह एक बहुत अच्छा सहयोग है, जहाँ दोनों देश अपनी सोच, विशेषज्ञता और अनुभव को साथ लाकर एक बेहतर और टिकाऊ पर्यावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें स्वच्छ ऊर्जा भी शामिल है और हम भारत के साथ इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारत और जर्मनी के बीच यह रिश्ता और गहरा होगा।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

ऊर्जा बदलाव में महिलाओं की भूमिका

एकरमैन ने ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, "हमें अपनी योजनाओं और चर्चाओं में महिलाओं को आगे लाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया महिलाओं के बिना सफल नहीं हो सकती।" गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आँकड़ों के अनुसार वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी 25% से कम है।

मध्य पूर्व संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा

राजदूत ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के संदर्भ में दोनों देशों के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, "मध्य पूर्व में पिछले कुछ घंटों में जो चिंताजनक घटनाएँ हुई हैं, उन्हें हमने देखा है। हमें उम्मीद है कि बातचीत और कूटनीति के ज़रिए समाधान निकलेगा। यह भारत और जर्मनी दोनों के लिए बहुत ज़रूरी है, लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान देना होगा, क्योंकि किसी एक क्षेत्र पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है।"

होर्मुज स्ट्रेट और जीवाश्म ईंधन निर्भरता

एकरमैन ने यह भी रेखांकित किया कि कूटनीतिक प्रयासों से होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना सुनिश्चित होना चाहिए, क्योंकि इस जलमार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। उन्होंने कहा, "भारत और जर्मनी जैसे देश, जिनके पास प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं, उन्हें यह सोचना होगा कि वे अपनी ऊर्जा ज़रूरतें कैसे पूरी करें ताकि वे विदेशी जीवाश्म ईंधन और अन्य ईंधनों पर कम निर्भर रहें।"

आगे की राह

राजदूत एकरमैन के बयान से स्पष्ट है कि भारत-जर्मनी ऊर्जा साझेदारी केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा स्वावलंबन की एक रणनीतिक ज़रूरत बन चुकी है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच इस दिशा में ठोस नीतिगत चर्चाएँ अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ठोस निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के आँकड़े अब भी अपेक्षाओं से पीछे हैं। महिला भागीदारी का मुद्दा उठाना सराहनीय है, लेकिन इस पर कोई बाध्यकारी लक्ष्य या समयसीमा अभी सामने नहीं आई है — बिना इसके यह प्रतिबद्धता केवल इरादे तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और जर्मनी के बीच रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग क्या है?
भारत और जर्मनी स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें दोनों देश अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा कर पर्यावरण को टिकाऊ बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन के अनुसार यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और प्रगाढ़ होगी।
जर्मन राजदूत ने मध्य पूर्व संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या कहा?
राजदूत एकरमैन ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रही अस्थिरता यह स्पष्ट करती है कि भारत और जर्मनी जैसे देशों को किसी एक ऊर्जा स्रोत या क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के खुले रहने को ऊर्जा आपूर्ति के लिए अनिवार्य बताया और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई।
ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पर जर्मन राजदूत का क्या कहना है?
एकरमैन ने कहा कि ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना सफल नहीं हो सकती और दोनों देशों को अपनी योजनाओं व चर्चाओं में महिलाओं को आगे लाना होगा। उन्होंने इसे प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया।
भारत जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए जर्मनी के साथ कैसे काम करेगा?
राजदूत एकरमैन के अनुसार, दोनों देश मिलकर बैठकर चर्चा करेंगे कि सीमित प्राकृतिक संसाधनों वाले देश अपनी ऊर्जा ज़रूरतें किस तरह पूरी करें ताकि विदेशी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटे। रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी इस रणनीति का केंद्र होगी।
भारत-जर्मनी ऊर्जा साझेदारी का भविष्य क्या है?
जर्मन राजदूत ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और रिन्यूएबल एनर्जी पर ठोस नीतिगत चर्चाएँ होंगी। यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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