9 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र विधानसभा का डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च: CM फडणवीस ने की पारदर्शिता की नई पहल

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महाराष्ट्र विधानसभा का डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च: CM फडणवीस ने की पारदर्शिता की नई पहल

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा ने डिजिटल शासन की दिशा में बड़ा कदम उठाया — CM फडणवीस ने रियल-टाइम विधायी निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च किया। 1937 से अब तक की कार्यवाही डिजिटल हो चुकी है और ई-ऑफिस पूरे सचिवालय में लागू है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 9 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा का डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च किया।
डैशबोर्ड तारांकित-अतारांकित प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और लंबित विधायी मामलों की रियल-टाइम जानकारी देगा।
जुलाई 2022 में दोनों सदनों को डिजिटल बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था; दिसंबर 2024 में इसे गति मिली।
वर्ष 1937 से अब तक की विधायी बहस और 2013 से ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड डिजिटल किए जा चुके हैं।
भविष्य में ई-एचआरएमएस , महा-पीएआर और ई-आरटीआई प्रणालियों को भी इस ढाँचे में जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 9 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य विधायी कामकाज में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह प्रणाली लंबित प्रस्तावों और विधायी मामलों की रियल-टाइम निगरानी के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।

डैशबोर्ड में क्या है खास

नया डिजिटल डैशबोर्ड लंबित विधायी मामलों की स्थिति की तत्काल जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसमें तारांकित और अतारांकित प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, आधे घंटे की चर्चा, विशेष उल्लेख और औचित्य के मुद्दे जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली राज्य सरकार और सदन के बीच समन्वय की कमी को काफी हद तक दूर करेगी। मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव अब ऑनलाइन माध्यम से लंबित विधायी प्रश्नों की निगरानी कर सकेंगे, जिससे आधिकारिक उत्तर देने की प्रक्रिया अधिक तेज़ और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।

डिजिटल बदलाव की पृष्ठभूमि

विधानसभा सचिव जितेंद्र भोले ने कार्यक्रम के दौरान डैशबोर्ड की विशेषताओं की विस्तृत जानकारी दी और संस्था की चल रही डिजिटल परिवर्तन योजना की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जुलाई 2022 में दोनों सदनों को पूर्णतः डिजिटल बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में इस डिजिटल रूपांतरण को और गति मिली थी। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक सदस्य की सीट पर हाईटेक मल्टीमीडिया कॉन्फ्रेंस सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे विधायकों को सदन की दैनिक कार्यवाही, आधिकारिक वेबसाइट और आवश्यक ऑनलाइन संसाधनों तक सुगम पहुँच मिल रही है।

ऐतिहासिक अभिलेखों का डिजिटलीकरण

विधानमंडल की महत्वाकांक्षी डिजिटल परियोजना के तहत वर्ष 1937 से अब तक की समस्त बहस और कार्यवाही को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा चुका है। इसके साथ ही 2013 से सदन की कार्यवाही का ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड भी तैयार किया गया है। यह संग्रह शोधकर्ताओं, सदस्यों और प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बनेगा।

वर्तमान में सरकारी गजट, विधेयक, बजट प्रकाशन, राज्यपाल के अभिभाषण, विधानमंडल और जाँच समितियों की रिपोर्ट, राज्य निगमों और विश्वविद्यालयों की जानकारी, चुनाव संबंधी निर्णय, सरकारी योजनाएँ, सदस्यों की प्रोफाइल तथा महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों की डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराने का कार्य प्रगति पर है।

ई-ऑफिस से लेकर भविष्य की योजनाएँ

विधानसभा अध्यक्ष की पहल पर सर्वप्रथम उनके कार्यालय में 'ई-ऑफिस' प्रणाली लागू की गई, जिसे बाद में समूचे विधानमंडल सचिवालय में विस्तारित किया गया। आज अधिकांश प्रशासनिक कार्य ई-ऑफिस के माध्यम से संपन्न हो रहे हैं।

भविष्य में ई-एचआरएमएस (मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली), महा-पीएआर और ई-आरटीआई जैसी प्रणालियों को भी इस ढाँचे में एकीकृत किए जाने की योजना है। पुस्तकालय की संदर्भ सामग्री को भी एक क्लिक पर सदन के भीतर उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। यह डिजिटल डैशबोर्ड पारंपरिक कागजी निगरानी व्यवस्था का स्थान लेकर पूरी विधायी प्रक्रिया को डिजिटल युग में ले जाने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि भारत में कई राज्य विधानसभाएँ डिजिटल पहल की घोषणाएँ कर चुकी हैं, जो व्यवहार में सीमित उपयोग तक सिमट गईं। यह ऐसे समय में आया है जब विधायी जवाबदेही और प्रश्नकाल की प्रभावशीलता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। मुख्य सचिव स्तर तक की ऑनलाइन निगरानी यदि वास्तव में लागू हुई, तो यह नौकरशाही की जड़ता को तोड़ने का एक ठोस तंत्र बन सकती है। परंतु 1937 से अभिलेखों के डिजिटलीकरण जैसी उपलब्धियों के बावजूद, जब तक इस डेटा तक आम नागरिकों की पहुँच सुनिश्चित नहीं होती, पारदर्शिता का दावा अधूरा रहेगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र विधानसभा का डिजिटल डैशबोर्ड क्या है?
यह एक रियल-टाइम निगरानी प्रणाली है जिसे CM देवेंद्र फडणवीस ने 9 जुलाई 2026 को लॉन्च किया। यह लंबित विधायी मामलों — जैसे तारांकित-अतारांकित प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और विशेष उल्लेख — की तत्काल स्थिति प्रदर्शित करता है।
यह डैशबोर्ड विधायी प्रक्रिया को कैसे बेहतर बनाएगा?
यह प्रणाली राज्य सरकार और सदन के बीच समन्वय की कमी दूर करेगी। मुख्य सचिव और विभागीय प्रशासनिक सचिव ऑनलाइन लंबित सवालों की निगरानी कर सकेंगे, जिससे आधिकारिक जवाब देने की प्रक्रिया तेज और जवाबदेह बनेगी।
महाराष्ट्र विधानसभा के डिजिटलीकरण की शुरुआत कब हुई?
जुलाई 2022 में दोनों सदनों को पूर्णतः डिजिटल बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। दिसंबर 2024 में इस प्रक्रिया को और गति मिली और ई-ऑफिस प्रणाली समूचे विधानमंडल सचिवालय में लागू की गई।
क्या पुराने विधायी रिकॉर्ड भी डिजिटल हुए हैं?
हाँ, वर्ष 1937 से अब तक की समस्त विधायी बहस और कार्यवाही डिजिटल की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 2013 से सदन की कार्यवाही का ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड भी तैयार किया गया है, जो शोधकर्ताओं और सदस्यों के लिए उपलब्ध होगा।
भविष्य में इस डिजिटल ढाँचे में क्या और जुड़ेगा?
ई-एचआरएमएस (मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली), महा-पीएआर और ई-आरटीआई जैसी प्रणालियों को इसमें शामिल किए जाने की योजना है। पुस्तकालय की संदर्भ सामग्री को भी एक क्लिक पर सदन के भीतर उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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