मुंबई एयरपोर्ट फनल जोन और जुहू सैन्य क्षेत्र में पुनर्विकास: CM फडणवीस ने दिए तेज़ी के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 9 जुलाई 2026 को मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में दशकों से अटकी जर्जर इमारतों के पुनर्विकास को गति देने के लिए ठोस प्रशासनिक आदेश जारी किए। ये निर्देश एयरपोर्ट फनल जोन (सांताक्रूज़, विले पार्ले और कुर्ला क्षेत्र) तथा जुहू सैन्य ट्रांसमीटर स्टेशन के सुरक्षा घेरे में स्थित इमारतों पर लागू होंगे। विधान भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के प्रमुख मंत्री और वरिष्ठ शहरी नियोजन अधिकारी भी उपस्थित रहे।
समस्या की जड़: ऊंचाई सीमा और आर्थिक अव्यवहार्यता
विमानों की सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित अप्रोच फनल क्षेत्र में ऊंचाई पर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। इन प्रतिबंधों के कारण डेवलपर्स के लिए पुनर्विकास परियोजनाएं ऐतिहासिक रूप से आर्थिक रूप से अव्यवहार्य रही हैं — क्योंकि ऊंचाई सीमित होने पर उतनी मंजिलें नहीं बन सकतीं जो निवेश को लाभकारी बना सकें। यही कारण है कि इन क्षेत्रों की सैकड़ों जर्जर इमारतें वर्षों से पुनर्विकास की प्रतीक्षा में हैं और वहाँ के निवासी असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
'संभावित एफएसआई' मॉडल: अभिनव समाधान
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक 'संभावित एफएसआई' (Potential FSI) मॉडल प्रस्तुत किया है। इसके तहत बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को निर्देश दिया गया है कि वह ऊंचाई-प्रतिबंधित भूखंडों पर अप्रयुक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) और हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) का सटीक मानचित्रण करे।
राज्य सरकार एक एकीकरण नीति पर विचार कर रही है जो सड़क चौड़ीकरण नियमों के अनुरूप होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नीति के अंतर्गत डेवलपर्स को ऊंचाई-प्रतिबंधित भवन का उच्च संभावित FSI पड़ोसी या आस-पास के भूखंडों पर चल रही निर्माण परियोजनाओं के साथ जोड़ने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा, उच्च संभावित FSI आवंटन आस-पास की सड़कों की चौड़ाई के आधार पर तय किए जाएंगे, ताकि विकास संबंधी बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर किया जा सके।
आवास एजेंसियों में संरचनात्मक सुधार
तात्कालिक जोन संशोधनों से आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने मुंबई की प्रमुख आवास एजेंसियों के आपसी समन्वय में भी संरचनात्मक बदलाव का आदेश दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA), महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) और सिडको (CIDCO) जैसी एजेंसियाँ अब तक स्वतंत्र रूप से कार्य करती रही हैं, जिससे समन्वय की कमी रही है।
अब शहरी विकास विभाग को आवास प्रवर्तन को एकीकृत करने के लिए सर्वोच्च नियामक और निगरानी नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया जाएगा। यह कदम मुंबई के शहरी नियोजन ढाँचे में एक बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन का संकेत है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि सांताक्रूज़, विले पार्ले, कुर्ला और जुहू जैसे घनी आबादी वाले उपनगरों में हज़ारों परिवार वर्षों से जर्जर इमारतों में रह रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुंबई में मानसून के दौरान पुरानी इमारतों के ढहने की घटनाएं चिंता का विषय बनी रहती हैं। यदि यह नीति प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इन क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित आवास मिल सकता है और डेवलपर्स को भी पुनर्विकास के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।
आगे की राह
BMC द्वारा FSI और TDR मानचित्रण पूरा होने के बाद एकीकरण नीति का विस्तृत खाका सामने आने की उम्मीद है। शहरी विकास विभाग की नोडल भूमिका कब से प्रभावी होगी, इसकी समय-सीमा अभी घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीति की सफलता विमानन और रक्षा नियामकों के साथ समन्वय पर निर्भर करेगी।