बीरभूम खदान कारोबारी तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस, ₹3,000 करोड़ राजस्व चोरी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के फरार पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल के खिलाफ 11 अगस्त 2026 को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। तुलु मंडल पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार और ₹3,000 करोड़ की राजस्व चोरी के आरोप हैं। पुलिस को अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।
रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया
सोमवार को सरकार ने सूरी अदालत में रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का आवेदन दाखिल किया, जिसे मंगलवार को मंजूरी दे दी गई। सरकारी वकील विभास चटर्जी के अनुसार, तुलु मंडल को 14 अगस्त तक अदालत में पेश होने का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि वह निर्धारित समय में उपस्थित नहीं होता, तो उसे घोषित अपराधी करार दिया जाएगा और उसकी संपत्तियाँ जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोने की बरामदगी
जाँच की पृष्ठभूमि में एक बड़ी कार्रवाई हाल ही में हुई, जब बीरभूम के मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गाँव में तुलु मंडल के रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से पुलिस ने ₹28.5 करोड़ नकद और करीब 15 किलोग्राम सोना बरामद किया। इस बरामदगी के बाद से जाँच एजेंसियों ने तुलु मंडल के खिलाफ अभियान तेज कर दिया।
गिरफ्तारियाँ और पुलिस हिरासत
सोमवार को पुलिस ने तुलु मंडल के रिश्तेदार रिपोन मंडल को पूर्व बर्दवान जिले के आउसग्राम स्थित उसके घर पर छापा मारकर गिरफ्तार किया। मंगलवार को उसे सूरी अदालत में पेश किया गया। इसके अलावा दो अन्य आरोपियों — शेख रियाजुल इस्लाम और शेख नूर आलम — को भी अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। तीनों का नाम कथित पत्थर सिंडिकेट से जोड़ा जा रहा है।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपियों के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि केवल उनके मुवक्किलों को इस मामले में निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने माँग की कि उस दौर में प्रशासनिक पदों पर रहे अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
आगे की कार्रवाई
पुलिस तुलु मंडल की संपत्तियों का पता लगाने के लिए उसके विभिन्न ठिकानों के साथ-साथ रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है। यह मामला उस व्यापक जाँच का हिस्सा है जो बीरभूम के पत्थर खनन क्षेत्र में कथित सिंडिकेट संचालन और सरकारी राजस्व की चोरी से जुड़ी है। 14 अगस्त की समय-सीमा इस प्रकरण में निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।