13 सितंबर 2026
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गणेश चतुर्थी 2026: देशभर के बाज़ारों में उमड़ी भीड़, मूर्तियों-सजावट की ज़बरदस्त माँग

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गणेश चतुर्थी 2026: देशभर के बाज़ारों में उमड़ी भीड़, मूर्तियों-सजावट की ज़बरदस्त माँग

सारांश

गणेश चतुर्थी 2026 से एक दिन पहले देशभर के बाज़ार भक्तों से गुलज़ार हो उठे। कोल्हापुर, अगरतला, धारवाड़, पटना और अलीगढ़ तक — मूर्तियों और सजावटी सामान की माँग तेज़। राजस्थानी कारीगर ढाई महीने की मेहनत के बाद डिलीवरी में जुटे हैं।

मुख्य बातें

गणेश चतुर्थी 2026 से एक दिन पहले 13 सितंबर को देशभर के बाज़ारों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
कोल्हापुर, अगरतला, धारवाड़, पटना, अलीगढ़ और तिरुपत्तूर सहित कई शहरों में मूर्तियों व सजावटी सामान की माँग तेज़ रही।
मूर्तिकार उत्तम चक्रवर्ती के अनुसार पिछले 8-10 वर्षों में गणेश मूर्तियों की माँग विश्वकर्मा पूजा की मूर्तियों से भी अधिक हो गई है।
तमिलनाडु के वनियामबाड़ी में मूर्तियाँ ₹100 से लेकर हज़ारों रुपये तक में बिकीं।
अलीगढ़ के राजस्थानी कारीगर गणेश और उनका परिवार करीब ढाई महीने से मूर्तियाँ तैयार करने में जुटा है; फिनिशिंग में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है।
महंगाई के बावजूद भक्तों का उत्साह बरकरार — कई शहरों में दोपहर बाद खरीदारों की भीड़ और बढ़ी।

गणेश चतुर्थी 2026 से ठीक एक दिन पहले, 13 सितंबर को देशभर के बाज़ारों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नई दिल्ली से लेकर कोल्हापुर, अगरतला, धारवाड़, पटना और अलीगढ़ तक — हर जगह लोग भगवान गणेश की मूर्तियाँ, पूजा सामग्री, इलेक्ट्रिक लाइट, कृत्रिम फूल, तोरण और सजावट का सामान खरीदते नज़र आए। महंगाई के बावजूद उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।

कोल्हापुर और धारवाड़ में बाज़ारों की रौनक

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गणेशोत्सव से पहले बड़े बाज़ारों के साथ-साथ आसपास की छोटी दुकानों पर भी भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर के समय खरीदारों की संख्या और अधिक बढ़ गई। वहीं कर्नाटक के धारवाड़ में भी यही तस्वीर रही — कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद गणपति की मूर्तियाँ, पूजा सामग्री, फूल, फल और सजावटी सामान खरीदने के लिए लोग बड़ी संख्या में बाज़ार पहुँचे।

मूर्तिकारों पर बढ़ा काम का बोझ

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। मूर्तिकार उत्तम चक्रवर्ती ने बताया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में गणेश की मूर्तियों की माँग तेज़ी से बढ़ी है और अब यह माँग विश्वकर्मा पूजा की मूर्तियों से भी अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि बढ़ती माँग के कारण दुर्गा पूजा पंडालों से जुड़े काम में कुछ देरी हुई है, हालाँकि गणेशोत्सव शुरू होने से पहले सभी मूर्तियों की डिलीवरी पूरी कर दी जाएगी।

तमिलनाडु और बिहार में भी उत्सव का माहौल

तमिलनाडु के तिरुपत्तूर ज़िले के वनियामबाड़ी में रंग-बिरंगी और आकर्षक डिज़ाइन वाली गणेशजी की प्रतिमाएँ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। भक्तों ने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा के लिए ₹100 से लेकर हज़ारों रुपये तक की मूर्तियाँ उत्साह के साथ खरीदीं। बिहार की राजधानी पटना में भी गणेश चतुर्थी की धूम देखी गई। मूर्ति खरीदने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि हर साल इस त्योहार का इंतज़ार रहता है और इस बार की रंग-बिरंगी मूर्तियाँ देखकर मन प्रसन्न हो गया।

महंगाई का असर, फिर भी उत्साह बरकरार

पटना में एक श्रद्धालु ने कहा कि महंगाई थोड़ी ज़्यादा ज़रूर है, लेकिन त्योहार में सभी चीज़ों को मैनेज किया जाता है। यह भावना देशभर में दिखी — बाज़ार कीमतें चाहे जितनी भी रही हों, भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई का दबाव आम परिवारों पर पहले से है, फिर भी त्योहारी खर्च में कटौती का रुझान नहीं दिखा।

राजस्थानी कारीगरों की ढाई महीने की मेहनत

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में राजस्थान से आए मूर्ति कारीगर गणेश ने बताया कि वे और उनका परिवार गणेश उत्सव के लिए अलग-अलग आकार और कीमतों की मूर्तियाँ तैयार करते हैं। उनके अनुसार, एक मूर्ति का प्रारंभिक निर्माण करीब ढाई से तीन घंटे में हो जाता है, जबकि उसकी फिनिशिंग में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि इस उत्सव के लिए मूर्तियाँ तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने की पूरी प्रक्रिया में उनका परिवार करीब ढाई महीने से जुटा हुआ है। यह कारीगर वर्ग की वह अदृश्य मेहनत है जो हर गणेशोत्सव को संभव बनाती है। आने वाले दिनों में विसर्जन तक यह उत्सवी माहौल और गहरा होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब भी त्योहारी खर्च में उछाल यह बताता है कि भारतीय उपभोक्ता आस्था और उत्सव पर कटौती करने में सबसे पीछे हैं। मूर्तिकार उत्तम चक्रवर्ती का यह बयान कि माँग विश्वकर्मा पूजा से भी आगे निकल गई है, गणेश उत्सव के भौगोलिक विस्तार को रेखांकित करता है — यह अब केवल महाराष्ट्र का उत्सव नहीं, बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और त्रिपुरा तक फैल चुका है। राजस्थानी कारीगरों का अलीगढ़ जैसे शहरों में आना यह भी दर्शाता है कि यह उत्सव रोज़गार का एक अनौपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण ज़रिया बन चुका है, जिस पर नीतिगत ध्यान अभी भी सीमित है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
गणेश चतुर्थी 2026 का त्योहार 14 सितंबर को मनाया जा रहा है। 13 सितंबर को त्योहार से एक दिन पहले देशभर के बाज़ारों में खरीदारी अपने चरम पर रही।
इस बार गणेश मूर्तियों की कीमत कितनी है?
तमिलनाडु के वनियामबाड़ी में मूर्तियाँ ₹100 से लेकर हज़ारों रुपये तक में बिकती देखी गईं। कीमतें आकार और डिज़ाइन के अनुसार अलग-अलग हैं; हालाँकि इस बार महंगाई के कारण कुछ वस्तुओं के दाम पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बताए जा रहे हैं।
एक गणेश मूर्ति बनाने में कितना समय लगता है?
अलीगढ़ के राजस्थानी कारीगर गणेश के अनुसार एक मूर्ति का प्रारंभिक निर्माण ढाई से तीन घंटे में हो जाता है, लेकिन उसकी फिनिशिंग में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। उनका परिवार इस उत्सव के लिए करीब ढाई महीने पहले से तैयारी शुरू कर देता है।
गणेश मूर्तियों की माँग पिछले कुछ वर्षों में कितनी बढ़ी है?
अगरतला के मूर्तिकार उत्तम चक्रवर्ती के अनुसार पिछले 8 से 10 वर्षों में गणेश मूर्तियों की माँग तेज़ी से बढ़ी है और अब यह विश्वकर्मा पूजा की मूर्तियों की माँग से भी अधिक हो गई है। बढ़ती माँग के कारण दुर्गा पूजा से जुड़े कामों में कुछ देरी भी हुई है।
किन शहरों में गणेश चतुर्थी की सबसे ज़्यादा रौनक देखी गई?
इस बार महाराष्ट्र के कोल्हापुर, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला, कर्नाटक के धारवाड़, तमिलनाडु के तिरुपत्तूर ज़िले के वनियामबाड़ी, बिहार की राजधानी पटना और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में बाज़ारों में खासी रौनक देखी गई। इन सभी शहरों में दोपहर बाद खरीदारों की भीड़ और बढ़ गई।
राष्ट्र प्रेस
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