गणेश चतुर्थी 2026: देशभर के बाज़ारों में उमड़ी भीड़, मूर्तियों-सजावट की ज़बरदस्त माँग
सारांश
मुख्य बातें
गणेश चतुर्थी 2026 से ठीक एक दिन पहले, 13 सितंबर को देशभर के बाज़ारों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नई दिल्ली से लेकर कोल्हापुर, अगरतला, धारवाड़, पटना और अलीगढ़ तक — हर जगह लोग भगवान गणेश की मूर्तियाँ, पूजा सामग्री, इलेक्ट्रिक लाइट, कृत्रिम फूल, तोरण और सजावट का सामान खरीदते नज़र आए। महंगाई के बावजूद उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
कोल्हापुर और धारवाड़ में बाज़ारों की रौनक
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गणेशोत्सव से पहले बड़े बाज़ारों के साथ-साथ आसपास की छोटी दुकानों पर भी भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर के समय खरीदारों की संख्या और अधिक बढ़ गई। वहीं कर्नाटक के धारवाड़ में भी यही तस्वीर रही — कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद गणपति की मूर्तियाँ, पूजा सामग्री, फूल, फल और सजावटी सामान खरीदने के लिए लोग बड़ी संख्या में बाज़ार पहुँचे।
मूर्तिकारों पर बढ़ा काम का बोझ
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। मूर्तिकार उत्तम चक्रवर्ती ने बताया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में गणेश की मूर्तियों की माँग तेज़ी से बढ़ी है और अब यह माँग विश्वकर्मा पूजा की मूर्तियों से भी अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि बढ़ती माँग के कारण दुर्गा पूजा पंडालों से जुड़े काम में कुछ देरी हुई है, हालाँकि गणेशोत्सव शुरू होने से पहले सभी मूर्तियों की डिलीवरी पूरी कर दी जाएगी।
तमिलनाडु और बिहार में भी उत्सव का माहौल
तमिलनाडु के तिरुपत्तूर ज़िले के वनियामबाड़ी में रंग-बिरंगी और आकर्षक डिज़ाइन वाली गणेशजी की प्रतिमाएँ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। भक्तों ने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा के लिए ₹100 से लेकर हज़ारों रुपये तक की मूर्तियाँ उत्साह के साथ खरीदीं। बिहार की राजधानी पटना में भी गणेश चतुर्थी की धूम देखी गई। मूर्ति खरीदने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि हर साल इस त्योहार का इंतज़ार रहता है और इस बार की रंग-बिरंगी मूर्तियाँ देखकर मन प्रसन्न हो गया।
महंगाई का असर, फिर भी उत्साह बरकरार
पटना में एक श्रद्धालु ने कहा कि महंगाई थोड़ी ज़्यादा ज़रूर है, लेकिन त्योहार में सभी चीज़ों को मैनेज किया जाता है। यह भावना देशभर में दिखी — बाज़ार कीमतें चाहे जितनी भी रही हों, भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई का दबाव आम परिवारों पर पहले से है, फिर भी त्योहारी खर्च में कटौती का रुझान नहीं दिखा।
राजस्थानी कारीगरों की ढाई महीने की मेहनत
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में राजस्थान से आए मूर्ति कारीगर गणेश ने बताया कि वे और उनका परिवार गणेश उत्सव के लिए अलग-अलग आकार और कीमतों की मूर्तियाँ तैयार करते हैं। उनके अनुसार, एक मूर्ति का प्रारंभिक निर्माण करीब ढाई से तीन घंटे में हो जाता है, जबकि उसकी फिनिशिंग में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि इस उत्सव के लिए मूर्तियाँ तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने की पूरी प्रक्रिया में उनका परिवार करीब ढाई महीने से जुटा हुआ है। यह कारीगर वर्ग की वह अदृश्य मेहनत है जो हर गणेशोत्सव को संभव बनाती है। आने वाले दिनों में विसर्जन तक यह उत्सवी माहौल और गहरा होने की उम्मीद है।