क्या घाटाल में गणेश पूजा की परंपरा 2018 से भव्य बन रही है?

सारांश
Key Takeaways
- गणेश पूजा का आयोजन 2018 से घाटाल में हो रहा है।
- इस पूजा में धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक कार्य भी शामिल हैं।
- स्थानीय लोग मंडप निर्माण और सजावट में जुटे हुए हैं।
- सेवा कार्यक्रमों में रक्तदान शिविर और गरीबों को भोजन वितरण शामिल हैं।
- घाटाल की गणेश पूजा अब जिले की प्रमुख पूजा बन रही है।
घाटाल, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। गणेश चतुर्थी के अवसर पर देशभर में भगवान गणेश का स्वागत करने की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल में भी इस त्योहार को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से घाटाल के घर मोड़ क्षेत्र में गणेश पूजा की तैयारी रात में भी जारी है।
स्थानीय युवाओं और व्यापारियों के सहयोग से 2018 से इस इलाके में गणेश पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पूरे क्षेत्र के लोग, युवा और कारोबारी मिलकर भाग लेते हैं और इस आयोजन को सामूहिक भाव से संपन्न करते हैं।
पूजा समिति के एक सदस्य ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि हमने इस गणेश पूजा की शुरुआत 2018 में की थी। तब से हर साल यह परंपरा और भी भव्य होती जा रही है। इस पूजा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके साथ-साथ कई सामाजिक और सेवा कार्य भी किए जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस बार भी पूजा को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह है। मंडप निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है, और स्थानीय लोग सजावट, मूर्ति स्थापना और अन्य तैयारियों में दिन-रात जुटे हुए हैं। आयोजकों का कहना है कि इस बार की थीम पारंपरिक और सांस्कृतिक तत्वों को समाहित करेगी।
पूजा समिति के आयोजकों ने यह भी बताया कि इस बार पूजा के साथ कई सेवा कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें रक्तदान शिविर, वस्त्र वितरण, मुफ्त स्वास्थ्य जांच और गरीबों को भोजन वितरण जैसी योजनाएं शामिल हैं। उनका मानना है कि गणेश पूजा केवल पूजा-पाठ का अवसर नहीं बल्कि समाज सेवा और एकता का प्रतीक भी है।
घाटाल का माहौल गणपति बाप्पा मोरया के जयकारों से गूंजने लगा है। इस क्षेत्र की गणेश पूजा अब जिले की एक प्रमुख पूजा बनती जा रही है।