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ताड़ासन से सीधी रहेगी रीढ़ की हड्डी, पोस्चर और आत्मविश्वास दोनों में होगा सुधार

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ताड़ासन से सीधी रहेगी रीढ़ की हड्डी, पोस्चर और आत्मविश्वास दोनों में होगा सुधार

सारांश

ताड़ासन — सभी योगासनों की नींव — सिर्फ खड़े रहने की मुद्रा नहीं है। रीढ़ को सीधा रखने, कंधों की जकड़न घटाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में इसकी भूमिका को आयुष मंत्रालय ने भी स्वीकार किया है। आधुनिक जीवनशैली में बिगड़ते पोस्चर के बीच यह सरल आसन एक प्रभावी समाधान है।

मुख्य बातें

ताड़ासन को भारतीय योग परंपरा में समस्त आसनों का आधार माना जाता है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने इसे दैनिक जीवनशैली में अपनाने की अनुशंसा की है।
नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है, स्पाइनल अलाइनमेंट बेहतर होता है और कंधों व गर्दन की जकड़न कम होती है।
इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रहने की सलाह दी जाती है।
लो बीपी के मरीज़ और गर्भवती महिलाएँ इसे विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।

भारतीय योग परंपरा में ताड़ासन को समस्त योगासनों की नींव माना जाता है। इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की भाँति ऊर्ध्वाकार और संतुलित अवस्था में रखा जाता है, जिससे न केवल शारीरिक स्थिरता आती है बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, इस सरल खड़े रहने वाले आसन को दैनिक जीवनशैली में शामिल करने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

ताड़ासन का अर्थ और महत्त्व

संस्कृत में 'ताड़' का अर्थ ताड़ का वृक्ष अथवा पर्वत होता है — दोनों ही ऊँचाई और दृढ़ता के प्रतीक हैं — और 'आसन' का अर्थ योग-मुद्रा है। इस प्रकार ताड़ासन शरीर को लंबा, सीधा और सुदृढ़ बनाने की कला है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन रीढ़ की हड्डी की प्राकृतिक संरचना को बनाए रखने में विशेष रूप से सहायक है।

स्वास्थ्य पर प्रमुख प्रभाव

योग विशेषज्ञों का मानना है कि ताड़ासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

रीढ़ की हड्डी को मज़बूत और सीधा रखने में सहायता मिलती है तथा स्पाइनल अलाइनमेंट बेहतर होता है। कंधों और गर्दन की जकड़न में उल्लेखनीय कमी आती है। शरीर का संतुलन और स्थिरता बढ़ती है। इसके साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, मन एकाग्र होता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

ताड़ासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ और दोनों पैरों को जोड़कर रखें। शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित करें। घुटनों को सीधा रखते हुए जाँघों को हल्का अंदर की ओर खींचें। पेट को हल्का अंदर रखें, छाती को आगे की ओर करें और कंधों को पीछे व नीचे की ओर ताकि रीढ़ स्वाभाविक रूप से सीधी रहे।

गर्दन सीधी रखें और आँखों को सामने किसी एक बिंदु पर केंद्रित करें। हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें अथवा दोनों हथेलियों को जोड़कर नमस्कार मुद्रा में छाती के सामने रखें। अभ्यास के दौरान गहरी साँस लेते और छोड़ते रहें। इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रुकें।

सावधानियाँ और विशेष निर्देश

निम्न रक्तचाप (लो बीपी) या चक्कर आने की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को पंजों पर संतुलन बनाते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना उचित है।

आयुष मंत्रालय की अनुशंसा

आयुष मंत्रालय ने ताड़ासन को दैनिक जीवनशैली में शामिल करने की अनुशंसा की है। मंत्रालय के अनुसार यह एक सरल, सुलभ और प्रभावशाली आसन है जो शरीर में स्थिरता लाता है और समग्र शारीरिक संतुलन को बेहतर करता है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब आधुनिक जीवनशैली में घंटों बैठे रहने के कारण पोस्चर संबंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक संकट की ओर ध्यान भी दिलाती है जो डेस्क-आधारित नौकरियों और स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग ने भारतीय युवाओं की रीढ़ और पोस्चर को पहुँचाया है। सरकारी अनुशंसाएँ तब तक सीमित प्रभाव डालती हैं जब तक स्कूल पाठ्यक्रम और कार्यस्थल नीतियों में योग को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता। जागरूकता अभियानों के साथ-साथ प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की पहुँच को ज़िला स्तर तक सुनिश्चित करना असली चुनौती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताड़ासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
ताड़ासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह सीधा और संतुलित रखा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करता है, पोस्चर सुधारता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है — इसीलिए इसे सभी आसनों का आधार माना जाता है।
ताड़ासन करने की सही विधि क्या है?
सीधे खड़े होकर दोनों पैर जोड़ें, भार समान रूप से वितरित करें, घुटने सीधे रखें, छाती आगे और कंधे पीछे-नीचे रखें। गहरी साँस लेते हुए इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रहें।
ताड़ासन रीढ़ की हड्डी के लिए कैसे फायदेमंद है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, ताड़ासन के नियमित अभ्यास से स्पाइनल अलाइनमेंट बेहतर होता है और रीढ़ की हड्डी प्राकृतिक रूप से सीधी रहती है। यह कंधों और गर्दन की जकड़न भी कम करता है।
ताड़ासन करते समय किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए?
निम्न रक्तचाप (लो बीपी) या चक्कर आने की समस्या वाले व्यक्तियों को पंजों पर संतुलन बनाते समय सतर्क रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।
आयुष मंत्रालय ने ताड़ासन के बारे में क्या कहा है?
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने ताड़ासन को दैनिक जीवनशैली में अपनाने की अनुशंसा की है। मंत्रालय के अनुसार यह एक सरल और प्रभावशाली आसन है जो शरीर में स्थिरता लाता है और समग्र संतुलन को बेहतर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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