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ताड़ासन से सुधारें मुद्रा, आयुष मंत्रालय ने बताए नियमित अभ्यास के स्थिरता और संतुलन लाभ

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ताड़ासन से सुधारें मुद्रा, आयुष मंत्रालय ने बताए नियमित अभ्यास के स्थिरता और संतुलन लाभ

सारांश

आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस की पूर्वसंध्या में ताड़ासन को दैनिक जीवन में अपनाने की सलाह दी है, जो गलत मुद्रा से होने वाले पीठ दर्द, गर्दन दर्द और थकान से राहत दिलाता है। मात्र 5-10 मिनट के नियमित अभ्यास से रीढ़, संतुलन और आत्मविश्वास में सुधार संभव है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 9 मई को ताड़ासन अभ्यास की सलाह दी, विश्व योग दिवस की पूर्वसंध्या में।
ताड़ासन या 'माउंटेन पोज' रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और शारीरिक संतुलन बढ़ाता है।
आजकल की कंप्यूटर-केंद्रित जीवनशैली से गलत मुद्रा, पीठ दर्द और गर्दन दर्द आम हो गए हैं।
सुबह खाली पेट या शाम को 5-10 मिनट का नियमित अभ्यास पर्याप्त है।
शुरुआत में दीवार का सहारा लेकर अभ्यास किया जा सकता है, जो संतुलन बनाने में मदद करता है।

नई दिल्ली, 9 मई। विश्व योग दिवस की पूर्वसंध्या में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नागरिकों को सही मुद्रा (पोस्चर) बनाए रखने की महत्ता पर जोर दिया है और ताड़ासन योगासन को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, सही पोस्चर एक रात में नहीं बनता — यह जागरुकता, संतुलन और रोजमर्रा के खड़े होने के तरीके से शुरू होता है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में कंप्यूटर और मोबाइल के लंबे समय के उपयोग से गलत मुद्रा की समस्या आम हो गई है, जिससे पीठ दर्द, गर्दन में दर्द और थकान बढ़ रहे हैं।

ताड़ासन क्या है और इसके लाभ

'माउंटेन पोज' के नाम से भी जाने जाते हैं ताड़ासन, यह आसन शरीर की संरचना को बेहतर बनाने, पोस्चर को मजबूत करने, स्थिरता बढ़ाने और पूरे शारीरिक संतुलन की मजबूत नींव रखने में अत्यंत उपयोगी है। देखने में यह आसान लगता है, लेकिन यह बुनियादी योगासन सजगता, रीढ़ की हड्डी और शरीर के विभिन्न अंगों के बेहतर तालमेल में कारगर है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत और सीधी रहती है, कंधों और गर्दन की जकड़न कम होती है, शरीर के संतुलन और स्थिरता में वृद्धि होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, मन एकाग्र होता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

सही तरीके से ताड़ासन का अभ्यास कैसे करें

ताड़ासन अभ्यास के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को जोड़कर रखें और वजन समान रूप से दोनों पैरों पर वितरित करें। घुटनों को सीधा रखते हुए जांघों को थोड़ा अंदर की ओर खींचें, पेट को हल्का अंदर की ओर रखें और छाती को आगे की ओर करें। कंधों को पीछे और नीचे की ओर रखें ताकि रीढ़ सीधी रहे। इस दौरान गर्दन सीधी रखें और आंखों को आगे किसी बिंदु पर केंद्रित करें। हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें या दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर नमस्कार मुद्रा में छाती के सामने रखें। अभ्यास के दौरान गहरी सांस लेते और छोड़ते रहें। इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रहें।

आयुष मंत्रालय की अपील और अभ्यास के सुझाव

आयुष मंत्रालय सभी उम्र के लोगों, खासकर युवाओं और ऑफिस जाने वाले लोगों से अपील करता है कि वे अपनी दिनचर्या में ताड़ासन को शामिल करें। सुबह खाली पेट या शाम को यह आसन 5-10 मिनट तक किया जा सकता है। शुरुआत में दीवार का सहारा लेकर भी अभ्यास किया जा सकता है, जो संतुलन बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्चर में सुधार, स्थिरता बनाना और स्पाइनल अलाइनमेंट को सपोर्ट करना एक आसान स्टैंडिंग पोज से शुरू किया जा सकता है, जो आधुनिक जीवनशैली की समस्याओं का एक प्रभावी समाधान है।

विश्व योग दिवस और स्वास्थ्य जागरुकता

विश्व योग दिवस की पूर्वसंध्या में यह पहल भारत की प्राचीन योग परंपरा को आधुनिक समय की स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ जोड़ने का एक प्रयास है। ताड़ासन जैसे सरल आसनों के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य जनता को व्यावहारिक और सुलभ योग समाधान प्रदान करना है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इससे उपजी पीठ और गर्दन की समस्याएं अब युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं। ताड़ासन जैसे सरल आसनों को बढ़ावा देना न केवल योग की परंपरा को जीवंत रखता है, बल्कि महँगे फिजियोथेरेपी विकल्पों का एक सुलभ विकल्प भी प्रदान करता है। हालाँकि, यह महत्वपूर्ण है कि सरकार इन सलाहों के साथ व्यावहारिक कार्यक्रम भी चलाए — स्कूलों में योग शिक्षा, कार्यालयों में ब्रेक-टाइम योग सेशन, और गलत मुद्रा से संबंधित समस्याओं के दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध। सलाह अकेली काफी नहीं है; संरचनात्मक परिवर्तन की जरूरत है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताड़ासन क्या है और इसे 'माउंटेन पोज' क्यों कहते हैं?
ताड़ासन एक बुनियादी योगासन है जिसे 'माउंटेन पोज' कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर की स्थिति पर्वत जैसी दृढ़, स्थिर और संतुलित होती है। यह आसन शरीर की संरचना को बेहतर बनाता है, पोस्चर को मजबूत करता है और शारीरिक संतुलन की मजबूत नींव रखता है।
ताड़ासन का अभ्यास कितने समय तक करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सुबह खाली पेट या शाम को ताड़ासन का अभ्यास 5-10 मिनट तक किया जा सकता है। शुरुआत में प्रत्येक अभ्यास सेशन में इस आसन को 30 से 60 सेकंड तक रखना चाहिए और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाई जा सकती है।
ताड़ासन के मुख्य लाभ क्या हैं?
ताड़ासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत और सीधी रहती है, कंधों और गर्दन की जकड़न कम होती है, शारीरिक संतुलन और स्थिरता बढ़ती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, मन एकाग्र होता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
क्या शुरुआत में ताड़ासन का अभ्यास करते समय कोई सहायता ले सकते हैं?
हाँ, शुरुआत में दीवार का सहारा लेकर ताड़ासन का अभ्यास किया जा सकता है। यह संतुलन बनाने में मदद करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। जैसे-जैसे शरीर मजबूत होता है, आप बिना सहायता के अभ्यास कर सकते हैं।
आजकल के समय में ताड़ासन की सलाह क्यों दी जा रही है?
आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग कंप्यूटर और मोबाइल पर लंबे समय तक काम करते हैं, जिससे गलत मुद्रा की समस्या आम हो गई है। इससे पीठ दर्द, गर्दन में दर्द और थकान बढ़ रहे हैं। ताड़ासन जैसे सरल आसनों का नियमित अभ्यास इन समस्याओं से राहत दिलाता है।
राष्ट्र प्रेस
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