MCX पर सोना ₹1,63,202 और चांदी ₹2,45,421 पर, कच्चे तेल व बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती घंटे में दोनों में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड के कमजोर पड़ने से मिले सपोर्ट ने संभाला।
सोने का कारोबार
MCX पर सोने का 5 अक्टूबर का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹1,62,882 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले ₹320 की बढ़त के साथ ₹1,63,202 प्रति 10 ग्राम पर खुला। सुबह 9:35 बजे IST तक यह मामूली होकर ₹34 की बढ़त के साथ ₹1,62,916 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,62,855 का निचला स्तर और ₹1,63,202 का ऊपरी स्तर छुआ, जो दर्शाता है कि धातु एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है।
चांदी का कारोबार
चांदी का 4 सितंबर 2026 का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹2,44,127 प्रति किलो के मुकाबले ₹1,456 की तेजी के साथ ₹2,45,583 प्रति किलो पर खुला। खबर लिखे जाने तक यह ₹1,294 यानी 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,45,421 प्रति किलो पर था।
चांदी ने दिन के कारोबार में ₹2,45,094 प्रति किलो का न्यूनतम और ₹2,46,180 प्रति किलो का अधिकतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में तेजी रही। कॉमेक्स पर सोना 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ $4,699 प्रति औंस पर और चांदी 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ $69 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही थी।
तेजी की वजह: कच्चा तेल और डॉलर की कमजोरी
जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी में इस बढ़त के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट है। इन दोनों कारकों ने डॉलर को कमजोर किया, जिससे कीमती धातुओं को सीधा सपोर्ट मिला — यह एक जाना-पहचाना बाजार संबंध है।
विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओमान और ईरान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट को खोलने और माइन हटाने को लेकर बातचीत चल रही है। इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.3 प्रतिशत गिरकर $85 प्रति बैरल के करीब आ गई।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर सतर्कता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में दबाव जारी रहा, तो कीमती धातुओं को निकट भविष्य में भी सपोर्ट मिलता रह सकता है।