MCX पर सोना ₹1,43,470 और चांदी ₹2,19,100 प्रति किलो; अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी तेज़ी
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं में तेज़ी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। सोने में 0.39 प्रतिशत और चांदी में 1.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो वैश्विक बाज़ार के सकारात्मक रुझान के अनुरूप रही।
सोने का कारोबार
5 अक्टूबर 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹1,42,915 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले ₹1,43,559 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार खोला। सुबह 9:50 बजे IST तक यह ₹555 की बढ़त के साथ ₹1,43,470 प्रति 10 ग्राम पर था। इंट्राडे कारोबार में सोने ने ₹1,43,365 का निचला और ₹1,43,915 का ऊपरी स्तर छुआ।
चांदी का कारोबार
4 सितंबर 2026 के चांदी के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹2,16,746 प्रति किलो के मुकाबले ₹2,18,143 प्रति किलो पर शुरुआत की। बाद में यह ₹2,354 यानी 1.09 प्रतिशत की तेज़ी के साथ ₹2,19,100 प्रति किलो पर पहुँच गया। इंट्राडे में चांदी ने ₹2,18,143 का निचला और ₹2,19,896 का ऊपरी स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुझान
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में तेज़ी बनी रही। COMEX पर सोना 0.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,113 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.98 प्रतिशत की मज़बूती के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 'गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स' रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में सोने की कुल वैश्विक मांग सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही। साल की पहली छमाही में मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन हो गई, जिसकी कुल कीमत 380 अरब डॉलर आँकी गई।
हालाँकि, दूसरी तिमाही में गोल्ड ETF, बार और सिक्कों में संयुक्त निवेश घटकर 262 टन रह गया। इसकी मुख्य वजह गोल्ड-बैक्ड ETF से 45 टन की निकासी रही। गौरतलब है कि पहली छमाही में ETF की मांग 18 टन के साथ थोड़ी सकारात्मक बनी रही। बार और सिक्कों में निवेश काफी हद तक स्थिर रहा — दूसरी तिमाही में साल-दर-साल केवल 3 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई, जबकि पहली छमाही की मांग पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रही, जो पहली तिमाही की मज़बूत माँग से प्रेरित थी।
आने वाले सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों और डॉलर की चाल पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी, जो कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगे।