तमिलनाडु में ~200 अवैध एम-सैंड इकाइयों पर सख्ती, बिना पंजीकरण नवीनीकरण के चल रही थीं फैक्ट्रियाँ
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के खनन क्षेत्र में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। चेन्नई से मिली जानकारी के अनुसार, औचक निरीक्षणों में सामने आया है कि राज्य की 506 पंजीकृत मैन्युफैक्चर्ड सैंड (एम-सैंड) इकाइयों में से करीब 40 प्रतिशत — लगभग 200 फैक्ट्रियाँ — अनिवार्य पंजीकरण नवीनीकरण कराए बिना वर्षों से उत्पादन जारी रखे हुए हैं। सरकार अब इन इकाइयों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी में है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य के खान एवं खनिज मंत्री प्रभु कई जिलों में बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण अभियान चला रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खनन नियमों का उल्लंघन करने वाली खदानों को तत्काल सील किया जाए। इसके साथ ही, अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने में विफल रहने के संदेह में खनिज संसाधन विभाग के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला भी किया गया है।
यह कार्रवाई राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बहाल करने के व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हाल ही में भूविज्ञान एवं खनन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।
पंजीकरण उल्लंघन की स्थिति
भूविज्ञान एवं खनन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सभी एम-सैंड निर्माण इकाइयों के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। गुणवत्ता और संचालन संबंधी मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए इन पंजीकरणों का हर तीन से पाँच वर्ष में नवीनीकरण कराया जाना ज़रूरी है।
पंजीकरण रिकॉर्ड की हालिया जाँच में पता चला कि राज्य की 506 पंजीकृत इकाइयों में से करीब 200 फैक्ट्रियों ने अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया है। इनमें से कई इकाइयाँ तीन वर्ष से अधिक समय से बिना नवीनीकृत पंजीकरण के उत्पादन करती रही हैं।
कीमतों पर असर और सरकार की चेतावनी
सरकार की सख्ती के शुरुआती दौर में एम-सैंड की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। उत्पादकों ने काले ग्रेनाइट की खदानों पर कार्रवाई के चलते उत्पादन प्रभावित होने का हवाला दिया था। हालाँकि, खान एवं खनिज मंत्री ने उद्योग संगठनों के साथ बैठक कर उन्हें स्थिति का अनुचित लाभ उठाने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी, जिसके बाद प्रस्तावित मूल्य वृद्धि वापस ले ली गई।
एम-सैंड क्यों है ज़रूरी
अधिकारियों के अनुसार, एम-सैंड कठोर काले पत्थरों को क्रश और प्रोसेस करके तैयार किया जाता है। यह उन नदियों की प्राकृतिक रेत का विकल्प है जिनका खनन पर्यावरणीय कारणों से सीमित किया जा रहा है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से निर्माण कार्यों में एम-सैंड के उपयोग की सिफारिश करती रही है। ऐसे में बिना नवीनीकृत पंजीकरण वाली इकाइयों से आपूर्ति होने पर गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, वैध पंजीकरण के बिना संचालित एम-सैंड इकाइयों के खिलाफ जल्द ही प्रवर्तन कार्रवाई शुरू किए जाने की संभावना है। सरकार ने एम-सैंड निर्माण इकाइयों द्वारा किए गए कथित नियम उल्लंघनों की विस्तृत जाँच के भी आदेश दिए हैं। यह कदम खनन क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार के व्यापक अभियान का हिस्सा होगा।