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तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की कमी रोकने को खनन निदेशक को मिले अंतरराज्यीय परिवहन रोकने के अधिकार

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तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की कमी रोकने को खनन निदेशक को मिले अंतरराज्यीय परिवहन रोकने के अधिकार

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने खनन नियमों में नया नियम 3-ए जोड़कर भूविज्ञान एवं खनन निदेशक को एम-सैंड, पत्थर और अन्य निर्माण खनिजों के अंतरराज्यीय परिवहन पर अस्थायी रोक लगाने का अधिकार दे दिया है — ताकि राज्य की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित रहे।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 9 जुलाई 2026 को सरकारी आदेश जारी कर खनन नियमों में संशोधन किया।
भूविज्ञान एवं खनन निदेशक को अब एम-सैंड, मेटल जेली, रफ स्टोन, बोल्डर, बैलास्ट सहित निर्माण सामग्री के अंतरराज्यीय परिवहन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिला।
तमिलनाडु अवैध खनन नियम, 2011 में नया नियम 3-ए जोड़ा गया, जो खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बना है।
हाल के महीनों में एम-सैंड और ब्लू मेटल की आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया।
सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं और निजी निर्माण कार्य दोनों के लिए आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखना है।

तमिलनाडु सरकार ने 9 जुलाई 2026 को जारी सरकारी आदेश के माध्यम से राज्य में निर्माण सामग्री की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाया है। भूविज्ञान एवं खनन निदेशक को अब यह अधिकार दिया गया है कि वे आवश्यकता पड़ने पर पत्थर, एम-सैंड और अन्य निर्माण खनिजों के अंतरराज्यीय परिवहन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा सकते हैं। यह संशोधन तमिलनाडु अवैध खनन, परिवहन एवं खनिज भंडारण तथा खनिज डीलर नियम, 2011 में नया नियम 3-ए जोड़कर लागू किया गया है।

नए नियम में क्या है

प्राकृतिक संसाधन विभाग द्वारा जारी इस सरकारी आदेश के तहत भूविज्ञान एवं खनन निदेशक को रफ स्टोन, खंडा, बोल्डर और उनसे निर्मित उत्पादों — जिनमें एम-सैंड, मेटल जेली, बैलास्ट, मिलस्टोन, हैंड चक्की तथा भवन एवं सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थर शामिल हैं — के दूसरे राज्यों में परिवहन को नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया है। ये नियम खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बनाए गए हैं।

यदि राज्य में इन सामग्रियों की कमी की आशंका होती है या घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी समझा जाता है, तो निदेशक इनके राज्य से बाहर जाने पर अस्थायी रोक लगा सकेंगे।

फैसले की पृष्ठभूमि

हाल के महीनों में एम-सैंड और ब्लू मेटल जैसी निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति में बाधा और कीमतों में उतार-चढ़ाव की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने खनन और खनिज परिवहन से जुड़े नियमों की व्यापक समीक्षा की, जिसके परिणामस्वरूप यह संशोधन लाया गया। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की रफ्तार तेज़ है और निर्माण सामग्री की माँग उच्च स्तर पर बनी हुई है।

खनन क्षेत्र में पारदर्शिता की कोशिश

राज्य प्रशासन ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध खनन तथा अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी एवं प्रवर्तन अभियान पहले से तेज़ किए हुए हैं। खदान क्षेत्रों में निरीक्षण बढ़ाए गए हैं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज़ हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह संशोधन प्रशासन को ऐसी परिस्थितियों में तेज़ी से निर्णय लेने की सुविधा देगा जब बाज़ार में असामान्य स्थिति उत्पन्न हो।

आम जनता और निर्माण क्षेत्र पर असर

अधिकारियों का कहना है कि संशोधित नियमों से खनिजों के परिवहन पर निगरानी और मज़बूत होगी। सरकार का मानना है कि अंतरराज्यीय परिवहन को नियंत्रित करके आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखा जा सकेगा, जिससे सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के साथ-साथ निजी निर्माण कार्य भी अप्रभावित रहेंगे। सीमित आपूर्ति की स्थिति में तमिलनाडु की विकास और आधारभूत संरचना संबंधी ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जा सकेगी।

आगे क्या होगा

नए नियम 3-ए के तहत मिले अधिकारों का उपयोग भूविज्ञान एवं खनन निदेशक स्थिति के अनुसार करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रावधान की असली परीक्षा तब होगी जब इसे पहली बार लागू किया जाएगा — विशेषकर यह देखना होगा कि 'कमी की आशंका' को परिभाषित करने के लिए क्या मानदंड अपनाए जाते हैं। राज्य सरकार के इस कदम से अन्य राज्यों में भी इसी तरह के नियामक बदलावों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'कमी की आशंका' जैसे अस्पष्ट मानदंड पर टिका होना इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है — बिना स्पष्ट परिभाषा के यह अधिकार मनमाने उपयोग का द्वार खोल सकता है। अंतरराज्यीय व्यापार पर इस तरह के एकतरफा प्रतिबंध संवैधानिक रूप से संवेदनशील हैं और अन्य राज्यों के साथ आपूर्ति विवाद को जन्म दे सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह नीति दीर्घकालिक खनन प्रबंधन की कमियों को दूर करती है, या केवल तात्कालिक राहत का उपाय है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार ने खनन नियमों में क्या बदलाव किया है?
तमिलनाडु सरकार ने 9 जुलाई 2026 को जारी सरकारी आदेश के ज़रिए तमिलनाडु अवैध खनन, परिवहन एवं खनिज भंडारण तथा खनिज डीलर नियम, 2011 में नया नियम 3-ए जोड़ा है। इसके तहत भूविज्ञान एवं खनन निदेशक को एम-सैंड, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री के अंतरराज्यीय परिवहन पर अस्थायी रोक लगाने का अधिकार दिया गया है।
इस नए नियम के तहत कौन-कौन सी सामग्रियों पर प्रतिबंध लग सकता है?
नए नियम 3-ए के अंतर्गत रफ स्टोन, खंडा, बोल्डर, एम-सैंड, मेटल जेली, बैलास्ट, मिलस्टोन, हैंड चक्की और भवन एवं सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थर शामिल हैं। इन सभी सामग्रियों के अंतरराज्यीय परिवहन को निदेशक आवश्यकतानुसार नियंत्रित कर सकते हैं।
यह फैसला क्यों लिया गया?
हाल के महीनों में तमिलनाडु में एम-सैंड और ब्लू मेटल जैसी निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति में बाधा और कीमतों में उतार-चढ़ाव की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद सरकार ने खनन और खनिज परिवहन नियमों की समीक्षा की और यह संशोधन लागू किया।
इस नियम से निर्माण क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार का कहना है कि इस नियम से सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं और निजी निर्माण कार्य दोनों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर रहेगी। कमी की स्थिति में राज्य की ज़रूरतों को प्राथमिकता मिलेगी और बाज़ार में असामान्य उतार-चढ़ाव को रोका जा सकेगा।
क्या यह प्रतिबंध स्थायी होगा?
नहीं, यह प्रावधान केवल अस्थायी प्रतिबंध का अधिकार देता है। भूविज्ञान एवं खनन निदेशक केवल तभी रोक लगा सकते हैं जब राज्य में इन सामग्रियों की कमी की आशंका हो या घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी समझा जाए।
राष्ट्र प्रेस
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