तमिलनाडु DCPU कर्मियों की CM विजय से मांग: बाल संरक्षण ढाँचा मजबूत करें, 14 साल से अनुबंध पर काम
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU) में कार्यरत कर्मचारियों ने 20 जून 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में बाल संरक्षण सेवाओं को सुदृढ़ करने और कर्मियों की वर्षों से लंबित माँगों को पूरा करने का आग्रह किया है। चेन्नई से उठी यह आवाज़ उस वक्त आई है जब राज्य में बाल कल्याण तंत्र की ज़मीनी कमज़ोरियाँ एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
मुख्य माँगें और समस्याएँ
ज्ञापन के अनुसार, कर्मचारी बाल कल्याण एवं विशेष सेवा विभाग (DCWSS) के अंतर्गत किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत काम करते हैं। उनका कहना है कि कई जिला बाल संरक्षण कार्यालय, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियाँ अब भी किराये के भवनों या अपर्याप्त सुविधाओं वाले सरकारी परिसरों में संचालित हो रही हैं। समर्पित वाहनों की कमी के चलते बच्चों से जुड़े आपातकालीन मामलों में समय पर हस्तक्षेप करना कठिन हो जाता है।
अस्थायी आश्रय और पुनर्वास गृहों की माँग
कर्मचारियों ने प्रत्येक जिले में संकटग्रस्त बच्चों के लिए अस्थायी आश्रय गृह स्थापित करने की माँग रखी है, जहाँ परामर्शदाता, चिकित्सक, विशेष शिक्षक और अन्य सहायता सेवाएँ उपलब्ध हों। इसके साथ ही, 18 वर्ष से कम आयु के कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों के लिए प्रत्येक जिले में विशेष पुनर्वास गृह स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि इन बच्चों को उचित देखभाल, परामर्श, शिक्षा और समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिल सके।
वित्तीय सहायता और ज़मीनी तंत्र का विस्तार
ज्ञापन में सरकार से विभाग की देखरेख में रहने वाले बच्चों के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार करने का आग्रह किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान सहायता सीमित है और सभी पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पा रही। बाल संरक्षण व्यवस्था को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के लिए उन्होंने गाँव, ब्लॉक, नगर पालिका और निगम स्तर पर बाल संरक्षण समितियों की गतिविधियों का विस्तार करने तथा ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त बाल संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की माँग की है।
14 साल से अनुबंध पर, नौकरी सुरक्षा नहीं
कर्मचारियों के अनुसार, वे वर्ष 2012 से वार्षिक अनुबंध के आधार पर कार्यरत हैं। 14 वर्षों से अधिक की सेवा के बावजूद उन्हें नौकरी की सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और सेवानिवृत्ति संबंधी कल्याण लाभ नहीं मिले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सेवाओं को नियमित करने, स्थायी नियुक्ति देने और कल्याणकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग की है।
आगे क्या होगा
यह ज्ञापन ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार बाल कल्याण नीतियों की समीक्षा कर रही है। कर्मचारियों का मानना है कि उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार होने से राज्य में बाल कल्याण और सुरक्षा व्यवस्था की समग्र प्रभावशीलता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।