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तमिलनाडु DCPU कर्मियों की CM विजय से मांग: बाल संरक्षण ढाँचा मजबूत करें, 14 साल से अनुबंध पर काम

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तमिलनाडु DCPU कर्मियों की CM विजय से मांग: बाल संरक्षण ढाँचा मजबूत करें, 14 साल से अनुबंध पर काम

सारांश

तमिलनाडु में 2012 से वार्षिक अनुबंध पर काम कर रहे DCPU कर्मियों ने CM विजय से बाल संरक्षण तंत्र को मज़बूत करने की माँग की है — हर जिले में आश्रय गृह, पुनर्वास केंद्र और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ खुद के लिए नौकरी सुरक्षा और स्थायी सेवा की भी गुहार लगाई है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु DCPU कर्मचारियों ने 20 जून 2026 को मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय को ज्ञापन सौंपा।
कर्मचारी 2012 से वार्षिक अनुबंध पर हैं — 14 वर्षों से अधिक सेवा के बावजूद नौकरी सुरक्षा, बीमा या सेवानिवृत्ति लाभ नहीं।
माँग: प्रत्येक जिले में अस्थायी आश्रय गृह और 18 वर्ष से कम बच्चों के लिए विशेष पुनर्वास गृह ।
ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त बाल संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति और बाल संरक्षण समितियों के विस्तार की सिफारिश।
वित्तीय सहायता योजनाओं का दायरा बढ़ाने और सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित करने की माँग।

तमिलनाडु की जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU) में कार्यरत कर्मचारियों ने 20 जून 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में बाल संरक्षण सेवाओं को सुदृढ़ करने और कर्मियों की वर्षों से लंबित माँगों को पूरा करने का आग्रह किया है। चेन्नई से उठी यह आवाज़ उस वक्त आई है जब राज्य में बाल कल्याण तंत्र की ज़मीनी कमज़ोरियाँ एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

मुख्य माँगें और समस्याएँ

ज्ञापन के अनुसार, कर्मचारी बाल कल्याण एवं विशेष सेवा विभाग (DCWSS) के अंतर्गत किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत काम करते हैं। उनका कहना है कि कई जिला बाल संरक्षण कार्यालय, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियाँ अब भी किराये के भवनों या अपर्याप्त सुविधाओं वाले सरकारी परिसरों में संचालित हो रही हैं। समर्पित वाहनों की कमी के चलते बच्चों से जुड़े आपातकालीन मामलों में समय पर हस्तक्षेप करना कठिन हो जाता है।

अस्थायी आश्रय और पुनर्वास गृहों की माँग

कर्मचारियों ने प्रत्येक जिले में संकटग्रस्त बच्चों के लिए अस्थायी आश्रय गृह स्थापित करने की माँग रखी है, जहाँ परामर्शदाता, चिकित्सक, विशेष शिक्षक और अन्य सहायता सेवाएँ उपलब्ध हों। इसके साथ ही, 18 वर्ष से कम आयु के कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों के लिए प्रत्येक जिले में विशेष पुनर्वास गृह स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि इन बच्चों को उचित देखभाल, परामर्श, शिक्षा और समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिल सके।

वित्तीय सहायता और ज़मीनी तंत्र का विस्तार

ज्ञापन में सरकार से विभाग की देखरेख में रहने वाले बच्चों के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार करने का आग्रह किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान सहायता सीमित है और सभी पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पा रही। बाल संरक्षण व्यवस्था को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के लिए उन्होंने गाँव, ब्लॉक, नगर पालिका और निगम स्तर पर बाल संरक्षण समितियों की गतिविधियों का विस्तार करने तथा ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त बाल संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की माँग की है।

14 साल से अनुबंध पर, नौकरी सुरक्षा नहीं

कर्मचारियों के अनुसार, वे वर्ष 2012 से वार्षिक अनुबंध के आधार पर कार्यरत हैं। 14 वर्षों से अधिक की सेवा के बावजूद उन्हें नौकरी की सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और सेवानिवृत्ति संबंधी कल्याण लाभ नहीं मिले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सेवाओं को नियमित करने, स्थायी नियुक्ति देने और कल्याणकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग की है।

आगे क्या होगा

यह ज्ञापन ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार बाल कल्याण नीतियों की समीक्षा कर रही है। कर्मचारियों का मानना है कि उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार होने से राज्य में बाल कल्याण और सुरक्षा व्यवस्था की समग्र प्रभावशीलता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बाल संरक्षण जैसी संवेदनशील सेवाओं में निरंतरता और विशेषज्ञता को भी कमज़ोर करता है। किराये के भवनों में चलने वाले किशोर न्याय बोर्ड और वाहनों के अभाव में आपातकालीन हस्तक्षेप की सीमाएँ — ये कमियाँ बजट आवंटन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती हैं। CM विजय के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या वे इस ज्ञापन को महज़ प्रशासनिक फ़ाइल मानते हैं या बाल कल्याण को नीतिगत एजेंडे में वास्तविक स्थान देते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु DCPU कर्मचारियों ने CM विजय को ज्ञापन क्यों सौंपा?
DCPU कर्मचारियों ने बाल संरक्षण सेवाओं में बुनियादी ढाँचे की कमियों और अपनी वर्षों से लंबित माँगों को लेकर CM विजय को ज्ञापन सौंपा। वे 2012 से वार्षिक अनुबंध पर काम कर रहे हैं और स्थायी नियुक्ति, बीमा व सेवानिवृत्ति लाभ की माँग कर रहे हैं।
DCPU कर्मचारियों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
उनकी प्रमुख माँगों में प्रत्येक जिले में अस्थायी आश्रय गृह, 18 वर्ष से कम बच्चों के लिए विशेष पुनर्वास गृह, ब्लॉक स्तर पर बाल संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति, वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार और कर्मियों की सेवाओं का नियमितीकरण शामिल हैं।
तमिलनाडु में DCPU कर्मचारी कब से अनुबंध पर काम कर रहे हैं?
ये कर्मचारी वर्ष 2012 से वार्षिक अनुबंध के आधार पर कार्यरत हैं। 14 वर्षों से अधिक सेवा देने के बावजूद उन्हें नौकरी की सुरक्षा, दुर्घटना बीमा या सेवानिवृत्ति संबंधी कोई कल्याण लाभ नहीं मिला है।
DCPU किस कानून के तहत काम करती है और इसका क्या काम है?
DCPU किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत काम करती है। यह विभाग बच्चों को शोषण से बचाने, बाल विवाह रोकने, बाल श्रम समाप्त करने, भीख माँगने के लिए मजबूर बच्चों के बचाव और कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों के पुनर्वास में भूमिका निभाता है।
क्या CM विजय ने इस ज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
20 जून 2026 तक मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी माँगों पर शीघ्र विचार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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