तमिलनाडु: CM विजय करेंगे नवनिर्वाचित विधायकों की दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन, 18 जून से पहला सत्र
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 16 जून 2026 को चेन्नई के कलाईवानार अरंगम में 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन एवं रिफ्रेशर कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 और 17 जून को आयोजित किया जा रहा है, जो 18 जून को होने वाले विधानसभा के पहले सत्र से ठीक पहले है।
क्यों आयोजित हो रहा है यह प्रशिक्षण
17वीं तमिलनाडु विधानसभा में निर्वाचित आधे से अधिक सदस्य पहली बार विधायक बने हैं। इस बड़ी संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं और सदन के कामकाज से परिचित कराने के लिए यह विशेष कार्यशाला तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार, इस रिफ्रेशर प्रोग्राम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सदस्य पहले सत्र से पहले प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं से भलीभाँति परिचित हों।
कार्यशाला में क्या सिखाया जाएगा
दोनों दिन कलाईवानार अरंगम की तीसरी मंजिल पर सत्र आयोजित होंगे। कार्यशाला में विधायकों को बहसों में प्रभावी भागीदारी, जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के तरीके, विधायी कामकाज की बारीकियाँ और सदन के भीतर मर्यादा बनाए रखने के विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने बताया कि 17वीं विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्यों को इस रिफ्रेशर कोर्स में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
स्पीकर प्रभाकर ने सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'इस नए तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्घाटन मुख्यमंत्री विजय करेंगे। सदस्यों को विधानसभा में कैसा व्यवहार करना है और विधायिका से जुड़ी पुरानी संसदीय परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।'
पारदर्शिता पर भी होगा जोर
स्पीकर प्रभाकर ने यह भी बताया कि विधानसभा की कार्यवाही के पूर्ण लाइव प्रसारण के बारे में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। उनके अनुसार इससे विधायी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता की भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिलेगा। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश भर में विधायी संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हुई है।
18 जून से शुरू होगा पहला सत्र
17वीं तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र 18 जून 2026 को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के सदन में संबोधन के साथ आरंभ होगा। इस संबोधन में नई निर्वाचित सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और विधायी एजेंडे की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। यह प्रशिक्षण कार्यशाला उस ऐतिहासिक सत्र की तैयारी का अहम हिस्सा है।
संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नवनिर्वाचित विधायकों के लिए इस तरह की संरचित ट्रेनिंग संसदीय कामकाज की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होती है। यह पहल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार विधायक बने सदस्यों की इतनी बड़ी संख्या के साथ सदन का संचालन सुचारु रखना एक प्रशासनिक प्राथमिकता बन जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रशिक्षण सदन की बहसों की गुणवत्ता और विधायी उत्पादकता पर किस हद तक असर डालता है।