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तमिलनाडु में अवैध खनन पर कार्रवाई: मंत्री डॉ. टीके प्रभु ने 2,000 से अधिक खदानों के निरीक्षण के आदेश दिए

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तमिलनाडु में अवैध खनन पर कार्रवाई: मंत्री डॉ. टीके प्रभु ने 2,000 से अधिक खदानों के निरीक्षण के आदेश दिए

सारांश

तमिलनाडु में अवैध खनन की शिकायतों के बाद प्राकृतिक संसाधन मंत्री डॉ. टीके प्रभु ने राज्य की 2,000 से अधिक पत्थर खदानों का तत्काल निरीक्षण कराने का आदेश दिया है। नियम उल्लंघन पर खदानें बंद और जुर्माने की कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

टीके प्रभु ने 22 मई 2025 को राज्य की सभी खदानों के तत्काल निरीक्षण के आदेश दिए।
तमिलनाडु में 2,000 से अधिक पत्थर खदानों को भूविज्ञान एवं खनन विभाग द्वारा संचालन की अनुमति दी गई है।
शिकायतें हैं कि कई खदानें एसईआईएए द्वारा निर्धारित मानदंडों से अधिक खनन कर रही हैं।
सुरक्षा खान प्राधिकरण की निगरानी टीमों पर भी पर्याप्त निगरानी न करने के आरोप लगे हैं।
नियम उल्लंघन करने वाली खदानों को तत्काल बंद करने और सरकार को हुए नुकसान के लिए जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है।

तमिलनाडु के प्राकृतिक संसाधन मंत्री डॉ. टीके प्रभु ने 22 मई 2025 को राज्य भर की 2,000 से अधिक पत्थर खदानों का तत्काल निरीक्षण कराने के आदेश जारी किए हैं। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि कई खदानें सरकारी अनुमति से अधिक खनन कर रही हैं और कुछ बिना किसी वैध अनुमति के ही संचालित हो रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

तमिलनाडु भूविज्ञान एवं खनन विभाग द्वारा राज्य में 2,000 से अधिक पत्थर खदानों को संचालन की अनुमति दी गई है। लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों में यह आरोप लगाया गया है कि इनमें से अनेक खदानें सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक पत्थर का उत्खनन कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, कई खदानें बिना किसी सरकारी अनुमति के अवैध रूप से चल रही हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) ने खदानों से निकाले जा सकने वाले पत्थरों की मात्रा के संबंध में स्पष्ट मानदंड निर्धारित किए हैं। आरोपों के अनुसार, कई स्थानों पर इन मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

निगरानी तंत्र पर सवाल

शिकायतों में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा खान प्राधिकरण के रूप में जानी जाने वाली निगरानी टीमें खदान संचालन की समुचित निगरानी नहीं कर रही हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन के विरुद्ध देशभर में आवाज़ें उठ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि निगरानी तंत्र की इस विफलता ने अवैध खनन को पनपने का मौका दिया।

मंत्री के निर्देश

मंत्री डॉ. टीके प्रभु ने भूविज्ञान एवं खनन विभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

सभी खदानों का तत्काल निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि खनन सरकारी अनुमतियों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। यह भी जाँचा जाए कि कोई खदान स्वीकृत सीमा से अधिक उत्खनन तो नहीं कर रही। साथ ही, सभी खदानों की वैधता की जाँच कर यह पता लगाया जाए कि वे खनन नियमों का पालन कर रही हैं या अवैध रूप से संचालित हो रही हैं।

उल्लंघन पर कार्रवाई

निरीक्षणों के निष्कर्षों के आधार पर, सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित सीमा से अधिक पत्थर निकालने वाली खदानों को तत्काल बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

आगे की राह

यह कार्रवाई तमिलनाडु में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। निरीक्षण रिपोर्टें प्राप्त होने के बाद सरकार आगे की नीतिगत कार्रवाई तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उनके निष्कर्षों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई हो। सुरक्षा खान प्राधिकरण की निगरानी विफलता की स्वीकारोक्ति स्वयं यह बताती है कि समस्या एकल घटना नहीं, बल्कि प्रणालीगत है। बिना स्वतंत्र सत्यापन और जवाबदेही ढाँचे के, यह आदेश भी पिछली घोषणाओं की तरह महज़ कागज़ी कार्रवाई बनकर रह सकता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में खदान निरीक्षण का आदेश क्यों दिया गया?
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह आदेश दिया गया, जिनमें आरोप था कि कई खदानें सरकारी अनुमति से अधिक खनन कर रही हैं और कुछ बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं। एसईआईएए के मानदंडों के उल्लंघन और निगरानी तंत्र की विफलता की शिकायतें भी सामने आई थीं।
तमिलनाडु में कितनी पत्थर खदानें अधिकृत हैं?
तमिलनाडु भूविज्ञान एवं खनन विभाग द्वारा राज्य में 2,000 से अधिक पत्थर खदानों को संचालन की अनुमति दी गई है। इन सभी का निरीक्षण कराने का आदेश दिया गया है।
नियम उल्लंघन करने वाली खदानों पर क्या कार्रवाई होगी?
निरीक्षण में नियम उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खदानों को तत्काल बंद किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
एसईआईएए क्या है और खनन से इसका क्या संबंध है?
राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) केंद्र सरकार की एक संस्था है जो खदानों से निकाले जा सकने वाले पत्थरों की अधिकतम मात्रा निर्धारित करती है। आरोप है कि कई खदानें इन निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन कर रही हैं।
इस निरीक्षण अभियान से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
अवैध खनन पर रोक लगने से पर्यावरणीय क्षति कम होगी और स्थानीय समुदायों को राहत मिलेगी। हालाँकि, अल्पकाल में खदानें बंद होने से निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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