बीआरएस का तेलंगाना के राज्यपाल से अनुरोध, राजस्व मंत्री को करें बर्खास्त

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बीआरएस का तेलंगाना के राज्यपाल से अनुरोध, राजस्व मंत्री को करें बर्खास्त

सारांश

बीआरएस ने तेलंगाना के राजस्व मंत्री पर अवैध खनन के आरोपों के चलते बर्खास्तगी की मांग की है। इस मुद्दे पर विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला और स्वतंत्र जांच की मांग की। क्या यह विवाद तेलंगाना की राजनीति में नया मोड़ लाएगा?

Key Takeaways

  • राजस्व मंत्री पर अवैध खनन के आरोप लगाए गए हैं।
  • बीआरएस ने राज्यपाल से बर्खास्तगी की मांग की है।
  • प्रतिनिधिमंडल ने स्वतंत्र जांच की आवश्यकता जताई।
  • सरकार ने आरोपों का समाधान नहीं किया।
  • राजनीतिक विवाद में नया मोड़ आने की संभावना है।

हैदराबाद, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने सोमवार को तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से अवैध खनन और भूमि हड़पने के आरोपों के कारण राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को तत्काल बर्खास्त करने का अनुरोध किया।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव के नेतृत्व में बीआरएस विधायकों और एमएलसी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला और मंत्री के खिलाफ अवैध खनन और भूमि हड़पने की गतिविधियों की जांच की मांग करते हुए एक औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से संबंधित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के सबूत पेश किए, जिनमें अवैध खनन कार्य और भूमि अतिक्रमण शामिल हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मंत्री रेड्डी को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और पारदर्शिता एवं न्याय सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा हाई कोर्ट जज की निगरानी में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की आवश्यकता है।

बीआरएस नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्री से संबंधित कंपनी राघवा कंस्ट्रक्शंस नीति का उल्लंघन कर अवैध खनन कर रही है, जिसमें प्रतिबंधित जलाशयों जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ये गतिविधियां खनिज डीलर लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण अनुमोदन, बिजली अनुमतियां और औद्योगिक मंजूरी के बिना चल रही थीं, जिससे सैकड़ों करोड़ रुपए के सार्वजनिक संसाधनों का नुकसान हो रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि जब इन मुद्दों को विधानसभा में उठाया गया, तो सत्ताधारी कांग्रेस सरकार ने आरोपों का समाधान करने के बजाय बीआरएस विधायकों और एमएलसी को निलंबित और निष्कासित करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा में यह स्वीकार किया था कि राघवा कंस्ट्रक्शंस को नोटिस जारी किए गए थे, जिससे अनियमितताओं को मान्यता दी गई थी।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद, रामा राव ने मीडिया को बताया कि मामले की जांच के लिए विधायकों और एमएलसी के एक समूह का गठन किया जाना चाहिए, या स्वतंत्र न्यायिक जांच का आदेश दिया जाना चाहिए।

उन्होंने सीबी-सीआईडी जैसी राज्य एजेंसियों पर अविश्वास व्यक्त किया, विशेषकर तब जब मुख्यमंत्री स्वयं गृह मंत्रालय का कार्यभार संभालते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि श्रीनिवास रेड्डी एक मौजूदा मंत्री हैं, इसलिए राज्य सरकार द्वारा की जाने वाली किसी भी जांच को प्रभावित करने का खतरा है, इसलिए उन्हें तुरंत पद से हटा दिया जाना चाहिए।

बीआरएस नेताओं ने राज्यपाल से न्याय के हित में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच का निर्देश देने का आग्रह किया, चाहे वह उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के माध्यम से हो या केंद्रीय एजेंसियों के जरिए।

केटीआर ने इस मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी की आलोचना करते हुए कहा कि वह अब तक राज्य सरकार पर कोई दबाव नहीं बना पाई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का आदेश देने के अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया और मंत्री के खिलाफ सबूत पेश होने के बावजूद उनकी निष्क्रियता पर सवाल उठाया।

Point of View

और इनकी जांच आवश्यक है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

बीआरएस ने किस कारण से राजस्व मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की?
बीआरएस ने मंत्री पर अवैध खनन और भूमि हड़पने के आरोपों के चलते बर्खास्तगी की मांग की।
राज्यपाल से मुलाकात में क्या मुख्य बातें उठाई गईं?
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से जुड़े अनियमितताओं के सबूत पेश करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।
क्या राज्य सरकार ने आरोपों का समाधान किया?
नहीं, राज्य सरकार ने आरोपों का समाधान करने के बजाय बीआरएस विधायकों को निलंबित किया।
राजस्व मंत्री पर लगाए गए आरोप कितने गंभीर हैं?
आरोप गंभीर हैं क्योंकि इससे सार्वजनिक संसाधनों का नुकसान हो रहा है और यह कानून का उल्लंघन है।
क्या बीआरएस ने न्यायिक जांच की मांग की है?
हां, बीआरएस ने मौजूदा हाई कोर्ट जज के माध्यम से स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।
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