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तमिलनाडु: 155 खदानों में अनियमितताएं, अब ड्रोन से होगी निगरानी; खनन पर तत्काल रोक

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तमिलनाडु: 155 खदानों में अनियमितताएं, अब ड्रोन से होगी निगरानी; खनन पर तत्काल रोक

सारांश

तमिलनाडु ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए बड़ा तकनीकी दांव खेला है। 431 खदानों के निरीक्षण में 155 में अनियमितताएं मिलने के बाद सरकार अब अत्याधुनिक ड्रोन से रियल-टाइम निगरानी करेगी और दोषी खदानों पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने राज्यभर की खदानों की ड्रोन-आधारित निगरानी का निर्णय लिया।
औचक निरीक्षण में कुल 431 खदानों में से 155 खदानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया।
प्रभु ने तेनकासी , कन्याकुमारी , विरुधुनगर और मदुरै की खदानों का स्वयं निरीक्षण किया।
उल्लंघन करने वाली सभी खदानों में खनन गतिविधियाँ तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए।
उल्लंघनों में लीज़ शर्तों का पालन न करना और स्वीकृत सीमा से अधिक खनन शामिल।

तमिलनाडु के भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने राज्य की सभी लीज़-आधारित खदानों पर नज़र रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस ड्रोन तैनात करने का निर्णय लिया है। यह कदम हाल ही में चलाए गए औचक निरीक्षण अभियान के बाद उठाया गया, जिसमें राज्य भर की 431 खदानों में से 155 खदानों में नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए।

निरीक्षण अभियान की मुख्य बातें

पिछले सप्ताह प्राकृतिक संसाधन विभाग द्वारा चलाए गए इस अभियान में मंत्री टी.के. प्रभु ने स्वयं तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै ज़िलों की खदानों का दौरा किया। अधिकारियों ने खनन कार्यों, लीज़ की शर्तों और संचालन-संबंधी दिशा-निर्देशों के पालन की बारीक़ी से जाँच की।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, जाँच में लीज़ की शर्तों का उल्लंघन, स्वीकृत सीमा से अधिक खनन और अन्य नियामकीय अनियमितताएं पाई गईं। मंत्री ने उल्लंघन करने वाली सभी 155 खदानों में खनन गतिविधियाँ तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए हैं।

ड्रोन निगरानी कैसे काम करेगी

विभाग के अनुसार, ये ड्रोन हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरों और रियल-टाइम डेटा-ट्रांसमिशन प्रणाली से लैस होंगे। ये खुदाई की मात्रा मापने, स्वीकृत खनन सीमा का सत्यापन करने और अवैध गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम होंगे। खदान पट्टाधारकों को निरीक्षण से पहले सूचना दी जाएगी, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

आगे की कार्रवाई

विभाग ने निलंबित खदान संचालकों के विरुद्ध आगे की क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों से खनिजों का अवैध परिवहन रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में भी निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान जारी रहेंगे।

क्यों मायने रखता है यह क़दम

तमिलनाडु लंबे समय से अवैध बालू एवं ग्रेनाइट खनन के आरोपों से जूझता रहा है, और दक्षिण भारत के कई ज़िलों में यह राजनीतिक तथा पर्यावरणीय विवाद का विषय रहा है। गौरतलब है कि ड्रोन-आधारित निगरानी पारंपरिक भौतिक निरीक्षण की सीमाओं — जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच और मानवीय पूर्वाग्रह — को कम कर सकती है। सरकार का मानना है कि यह तकनीकी हस्तक्षेप खनन क्षेत्र में नियंत्रण मज़बूत करेगा और प्राकृतिक संसाधनों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

आने वाले हफ़्तों में ड्रोन-आधारित पहले चरण की निगरानी रिपोर्ट इस नई व्यवस्था की प्रभावशीलता का पहला बड़ा संकेत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या हवाई डेटा को सत्यापन-योग्य कार्रवाई और दंड से जोड़ा जाता है — या यह पहले के निरीक्षण अभियानों की तरह काग़ज़ी रह जाएगा। पारदर्शिता के लिए यह ज़रूरी है कि ड्रोन रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हों, अन्यथा तकनीक भी पुराने ढाँचे की एक और परत बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार खदानों पर ड्रोन निगरानी क्यों लागू कर रही है?
राज्य के भूविज्ञान एवं खनन विभाग के औचक निरीक्षण में 431 खदानों में से 155 में नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ड्रोन से अवैध खनन, स्वीकृत सीमा से अधिक खुदाई और लीज़-शर्तों के उल्लंघन की रियल-टाइम पहचान संभव होगी।
155 खदानों में किस तरह के उल्लंघन पाए गए?
अधिकारियों के अनुसार, उल्लंघनों में लीज़ की शर्तों का पालन न करना, स्वीकृत सीमा से अधिक खनन और अन्य नियामकीय अनियमितताएं शामिल हैं। सभी संबंधित खदानों में खनन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
ड्रोन निगरानी कैसे काम करेगी?
ड्रोन अत्याधुनिक कैमरों और निगरानी प्रणाली से लैस होंगे, जो हवाई तस्वीरें और रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएंगे। निरीक्षण से पहले खदान पट्टाधारकों को सूचना दी जाएगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
निरीक्षण किन ज़िलों में किया गया?
प्राकृतिक संसाधन मंत्री टी.के. प्रभु ने स्वयं तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै ज़िलों की खदानों का दौरा किया। अभियान पूरे राज्य में फैला था और कुल 431 खदानों को कवर किया गया।
दोषी खदान संचालकों पर क्या कार्रवाई होगी?
विभाग ने निलंबित खदान संचालकों के विरुद्ध आगे की क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों से खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए विशेष क़दम उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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