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तमिलनाडु में अवैध खनन पर डिजिटल वार: डिजिटल वेटब्रिज से ₹9,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य

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तमिलनाडु में अवैध खनन पर डिजिटल वार: डिजिटल वेटब्रिज से ₹9,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य

सारांश

तमिलनाडु सरकार डिजिटल वेटब्रिज और केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए खनन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी में है। ₹4,500 करोड़ के मौजूदा राजस्व को ₹9,000 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य है। 431 खदानों के निरीक्षण में 155 में उल्लंघन, और ₹78 करोड़ का जुर्माना — यह सुधार अभियान अब डिजिटल निगरानी के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

मुख्य बातें

जोसेफ विजय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्यव्यापी डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना की समीक्षा की गई।
वित्त वर्ष 2025-26 में खनन राजस्व ₹4,500 करोड़ रहा; पहले चरण में ₹6,500 करोड़ और आगे ₹9,000 करोड़ का लक्ष्य।
431 खदानों के निरीक्षण में 155 में नियम उल्लंघन; 67 खदानों का संचालन तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै में रोका गया।
तमिलनाडु माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स, 1959 के तहत अब तक ₹78 करोड़ का जुर्माना लगाया जा चुका है।
पड़ोसी राज्यों में एग्रीगेट निर्यात पर तीन महीने का प्रतिबंध ; खनिज आवाजाही में 15% की कमी दर्ज।
वित्त वर्ष 2024-25 में प्रमुख खनिज पट्टों से ₹433 करोड़ की आय।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य के खनन क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए एक केंद्रीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और खनन राजस्व को ₹4,500 करोड़ से बढ़ाकर आने वाले वर्षों में ₹9,000 करोड़ तक पहुँचाना है। इस योजना की समीक्षा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में इस सप्ताह हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जिसमें मुख्य सचिव, वित्त सचिव और कई प्रमुख विभागों के सचिव शामिल हुए।

क्या है डिजिटल मॉनिटरिंग की योजना

सरकार का लक्ष्य राज्य में सभी खनिजों के उत्खनन को एक एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दायरे में लाना है। इसके तहत पूरे राज्य में डिजिटल वेटब्रिज सिस्टम स्थापित किए जाएँगे, जो एक केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े होंगे। इससे खदानों से निकलने वाले प्रत्येक खनिज लोड की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी संभव हो सकेगी।

अधिकारियों ने माना है कि शुरुआती दौर में सख्त नियमों के कारण खनन गतिविधियाँ कुछ धीमी पड़ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रणाली नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित करेगी और राजस्व में निरंतर वृद्धि लाएगी।

राजस्व की स्थिति और लक्ष्य

सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्राकृतिक संसाधन विभाग ने खनन पट्टा शुल्क, रॉयल्टी, खनिज युक्त भूमि कर, ग्रीन फंड योगदान और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट भुगतान के माध्यम से कुल ₹4,500 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। सरकार का अनुमान है कि तकनीक-आधारित निगरानी के पहले चरण में यह आय बढ़कर ₹6,500 करोड़ तक पहुँच सकती है, जबकि अगले कुछ वर्षों में इसे ₹9,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पट्टे वाले और बिना पट्टे वाले कई क्षेत्रों से निकाले जा रहे रफ स्टोन और अन्य खनिजों का बड़ा हिस्सा खनिज भूमि कर और रॉयल्टी के दायरे से बाहर रह जाता है, जिससे सरकार को प्रतिवर्ष भारी राजस्व हानि होती है।

अवैध खनन पर पहले से शुरू हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि सरकार की सख्ती पहले ही ज़मीन पर दिखने लगी है। पिछले महीने तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै जिलों की 67 पत्थर खदानों का संचालन रोक दिया गया, जहाँ जाँच में स्वीकृत सीमा से परे अवैध उत्खनन की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने कुल 431 खदानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 155 खदानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया।

तमिलनाडु माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स, 1959 के तहत अब तक कुल ₹78 करोड़ का जुर्माना लगाया जा चुका है। कई खदान संचालकों के विरुद्ध जुर्माने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ मामलों में अपील पर विचार जारी है।

अन्य खनिज क्षेत्र और निर्यात प्रतिबंध

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में चूना पत्थर, लिग्नाइट, मार्ल, ग्रेफाइट, मैग्नेसाइट और परमाणु खनिजों के खनन पट्टों से राज्य को ₹433 करोड़ की आय हुई। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने हाल ही में निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले एग्रीगेट को पड़ोसी राज्यों में भेजने पर तीन महीने का प्रतिबंध लगाया है, जिसके बाद ऐसे खनिजों की आवाजाही में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

आगे की राह

तमिलनाडु सरकार के इन कदमों को खनन क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। डिजिटल वेटब्रिज प्रणाली के पूरी तरह लागू होने के बाद राज्य के खनन मानचित्र में पारदर्शिता का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता काफी हद तक क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी निगरानी तंत्र की मज़बूती पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती तकनीक को ज़मीन पर उतारने की है — राज्य में खनन माफिया का नेटवर्क गहरा है और पिछले कई वर्षों में प्रशासनिक सख्ती के बावजूद अवैध उत्खनन जारी रहा है। ₹78 करोड़ का जुर्माना प्रभावशाली लगता है, लेकिन यदि अनुमानित वार्षिक राजस्व हानि हजारों करोड़ में है, तो यह राशि नाकाफी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि डिजिटल प्रणाली को दरकिनार करने के रास्ते खोजने में खनन संचालक कितना समय लेंगे — और क्या राज्य की निगरानी क्षमता उनसे एक कदम आगे रह पाएगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु का डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम खनन क्षेत्र में क्या बदलेगा?
यह प्रणाली राज्यभर में डिजिटल वेटब्रिज स्थापित करेगी, जो एक केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े होंगे और खदानों से निकलने वाले प्रत्येक खनिज लोड की रियल-टाइम निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य अवैध खनन रोकना, राजस्व चोरी समाप्त करना और पूरे खनन तंत्र को पारदर्शी बनाना है।
तमिलनाडु सरकार का खनन राजस्व लक्ष्य क्या है?
वित्त वर्ष 2025-26 में खनन राजस्व ₹4,500 करोड़ रहा। सरकार का लक्ष्य पहले चरण में इसे ₹6,500 करोड़ और अगले कुछ वर्षों में ₹9,000 करोड़ तक पहुँचाना है।
तमिलनाडु में अवैध खनन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
अधिकारियों ने 431 खदानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 155 में नियम उल्लंघन पाया गया। तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै में 67 खदानों का संचालन रोका गया और तमिलनाडु माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स, 1959 के तहत अब तक ₹78 करोड़ का जुर्माना लगाया जा चुका है।
एग्रीगेट निर्यात पर प्रतिबंध का क्या असर हुआ?
राज्य सरकार ने निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले एग्रीगेट को पड़ोसी राज्यों में भेजने पर तीन महीने का प्रतिबंध लगाया, जिसके बाद ऐसे खनिजों की आवाजाही में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इस योजना की समीक्षा किसने की और इसमें कौन शामिल था?
इस योजना की समीक्षा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में इस सप्ताह हुई उच्चस्तरीय बैठक में की गई। बैठक में मुख्य सचिव, वित्त सचिव और कई प्रमुख विभागों के सचिव भी शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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