तमिलनाडु में अवैध खनन पर डिजिटल वार: डिजिटल वेटब्रिज से ₹9,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के खनन क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए एक केंद्रीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और खनन राजस्व को ₹4,500 करोड़ से बढ़ाकर आने वाले वर्षों में ₹9,000 करोड़ तक पहुँचाना है। इस योजना की समीक्षा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में इस सप्ताह हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जिसमें मुख्य सचिव, वित्त सचिव और कई प्रमुख विभागों के सचिव शामिल हुए।
क्या है डिजिटल मॉनिटरिंग की योजना
सरकार का लक्ष्य राज्य में सभी खनिजों के उत्खनन को एक एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दायरे में लाना है। इसके तहत पूरे राज्य में डिजिटल वेटब्रिज सिस्टम स्थापित किए जाएँगे, जो एक केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े होंगे। इससे खदानों से निकलने वाले प्रत्येक खनिज लोड की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी संभव हो सकेगी।
अधिकारियों ने माना है कि शुरुआती दौर में सख्त नियमों के कारण खनन गतिविधियाँ कुछ धीमी पड़ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रणाली नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित करेगी और राजस्व में निरंतर वृद्धि लाएगी।
राजस्व की स्थिति और लक्ष्य
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्राकृतिक संसाधन विभाग ने खनन पट्टा शुल्क, रॉयल्टी, खनिज युक्त भूमि कर, ग्रीन फंड योगदान और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट भुगतान के माध्यम से कुल ₹4,500 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। सरकार का अनुमान है कि तकनीक-आधारित निगरानी के पहले चरण में यह आय बढ़कर ₹6,500 करोड़ तक पहुँच सकती है, जबकि अगले कुछ वर्षों में इसे ₹9,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पट्टे वाले और बिना पट्टे वाले कई क्षेत्रों से निकाले जा रहे रफ स्टोन और अन्य खनिजों का बड़ा हिस्सा खनिज भूमि कर और रॉयल्टी के दायरे से बाहर रह जाता है, जिससे सरकार को प्रतिवर्ष भारी राजस्व हानि होती है।
अवैध खनन पर पहले से शुरू हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि सरकार की सख्ती पहले ही ज़मीन पर दिखने लगी है। पिछले महीने तेनकासी, कन्याकुमारी, विरुधुनगर और मदुरै जिलों की 67 पत्थर खदानों का संचालन रोक दिया गया, जहाँ जाँच में स्वीकृत सीमा से परे अवैध उत्खनन की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने कुल 431 खदानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 155 खदानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया।
तमिलनाडु माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स, 1959 के तहत अब तक कुल ₹78 करोड़ का जुर्माना लगाया जा चुका है। कई खदान संचालकों के विरुद्ध जुर्माने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ मामलों में अपील पर विचार जारी है।
अन्य खनिज क्षेत्र और निर्यात प्रतिबंध
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में चूना पत्थर, लिग्नाइट, मार्ल, ग्रेफाइट, मैग्नेसाइट और परमाणु खनिजों के खनन पट्टों से राज्य को ₹433 करोड़ की आय हुई। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने हाल ही में निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले एग्रीगेट को पड़ोसी राज्यों में भेजने पर तीन महीने का प्रतिबंध लगाया है, जिसके बाद ऐसे खनिजों की आवाजाही में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
आगे की राह
तमिलनाडु सरकार के इन कदमों को खनन क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। डिजिटल वेटब्रिज प्रणाली के पूरी तरह लागू होने के बाद राज्य के खनन मानचित्र में पारदर्शिता का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता काफी हद तक क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी निगरानी तंत्र की मज़बूती पर निर्भर करेगी।