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तमिलनाडु में बिजली बिल विवाद: टीएनपीडीसीएल ने पूरे राज्य में बिलिंग जांच कड़ी की, कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

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तमिलनाडु में बिजली बिल विवाद: टीएनपीडीसीएल ने पूरे राज्य में बिलिंग जांच कड़ी की, कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

अत्यधिक बिजली बिलों से नाराज उपभोक्ताओं के दबाव में टीएनपीडीसीएल ने पूरे तमिलनाडु में बिलिंग जांच कड़ी कर दी है। लेकिन 60% से अधिक पद रिक्त होने की स्थिति में, सख्त निर्देश बिना भर्ती के कितना असर करेंगे — यह असली सवाल है।

मुख्य बातें

टीएनपीडीसीएल ने 20 जुलाई को पूरे तमिलनाडु में बिलिंग गलतियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया।
गलत बिल जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
7,565 मूल्यांकनकर्ता पदों में से लगभग 60% और 3,961 मूल्यांकन निरीक्षक पदों में से 42% पद रिक्त हैं।
गलत मीटर रीडिंग, खराब मीटर और आउटसोर्स रीडरों पर निर्भरता को बिलिंग गलतियों की प्रमुख वजह बताया गया।
कर्मचारी संघों ने लापरवाही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की कमी को समस्या की जड़ बताया।

तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएनपीडीसीएल) ने 20 जुलाई को पूरे राज्य में बिलिंग गलतियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया, जब घरेलू उपभोक्ताओं की ओर से अत्यधिक बिजली बिलों को लेकर शिकायतों की बाढ़ आ गई। कंपनी ने सभी फील्ड अधिकारियों को सटीक मीटर आकलन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है और स्पष्ट किया है कि गलत बिल जारी करने वालों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

सभी सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों को जारी एक आंतरिक सर्कुलर में टीएनपीडीसीएल ने तीन प्रमुख निर्देश दिए हैं — बिलिंग जांच को सुदृढ़ करना, फील्ड निरीक्षण तेज करना और प्रत्येक स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय करना। कॉर्पोरेशन ने माना कि मुख्यालय से बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद बिलिंग सटीकता में कमियाँ बनी रहीं।

सर्कुलर के अनुसार, गलत मीटर रीडिंग, खराब मीटर और प्रक्रियात्मक खामियों के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल भेजे गए। निदेशक (वित्त) ने कई वितरण क्षेत्रों में असामान्य बिलिंग की बार-बार होने वाली घटनाओं की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी थी कि इससे उपभोक्ताओं का भरोसा और कंपनी की वित्तीय स्थिति, दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

निगरानी में कहाँ चूक हुई

टीएनपीडीसीएल के निरीक्षणों में पाया गया कि राजस्व पर्यवेक्षकों, मूल्यांकन पर्यवेक्षकों, सहायक लेखा अधिकारियों और अन्य मूल्यांकन कर्मचारियों द्वारा पर्याप्त निगरानी नहीं की जा रही थी। वितरण सर्कल स्तर पर निरीक्षण अपर्याप्त थे और खराब मीटर अक्सर लंबे समय तक पकड़ में नहीं आते थे — जिससे उपभोक्ता की शिकायत दर्ज होने तक बिलिंग गलतियाँ जारी रहती थीं।

सरकार की प्रतिक्रिया और नए निर्देश

इस समस्या के समाधान के लिए कंपनी ने सभी सर्किलों को औचक निरीक्षण और बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाने का निर्देश दिया है। मूल्यांकन कर्मचारियों को मीटर रीडिंग की सावधानीपूर्वक जांच करने को कहा गया है, जबकि निरीक्षण अधिकारियों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होगी। सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों से कहा गया है कि वे सर्कल, डिवीजन और सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें ताकि पारदर्शी और ग्राहक-अनुकूल बिलिंग सुनिश्चित हो सके।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बढ़े हुए द्विमासिक बिल, देर से मीटर रीडिंग और सरकार की मुफ्त बिजली योजना का लाभ न मिलने की शिकायतें राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे टीवीके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है।

कर्मचारी संघों का पक्ष

कर्मचारी संघों ने बार-बार होने वाली इन समस्याओं के लिए लापरवाही के बजाय कर्मचारियों की भारी कमी को जिम्मेदार ठहराया है। तमिलनाडु बिजली कर्मचारी केंद्रीय संगठन के अध्यक्ष एस. कन्नन ने बताया कि 7,565 मूल्यांकनकर्ता पदों में से लगभग 60 प्रतिशत और 3,961 मूल्यांकन निरीक्षक पदों में से लगभग 42 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं।

कन्नन ने यह भी कहा कि निरीक्षकों को अक्सर मीटर रीडिंग का काम करना पड़ता है और राजस्व पर्यवेक्षकों को बिल वसूली में लगाया जाता है। आउटसोर्स मीटर रीडरों पर बढ़ती निर्भरता ने भी बिलिंग की गलतियों को बढ़ावा दिया है।

आगे क्या होगा

टीएनपीडीसीएल की यह कार्रवाई तब तक परिणाम नहीं दे सकती जब तक रिक्त पदों को भरने और आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करने की ठोस योजना नहीं बनती। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बिलिंग सुधार के निर्देश जारी हुए हों — संरचनात्मक बदलाव के बिना, उपभोक्ताओं की शिकायतें जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समाधान नहीं। जब 60% मूल्यांकनकर्ता पद रिक्त हों और निरीक्षकों को मीटर रीडिंग का काम करना पड़े, तो 'सख्त निर्देश' महज कागजी कार्रवाई बनकर रह जाते हैं। असली सवाल यह है कि मुख्यालय से बार-बार निर्देशों के बावजूद स्थिति क्यों नहीं सुधरी — और इसका जवाब भर्ती प्रक्रिया में है, न अनुशासन में। टीवीके सरकार के लिए यह केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक परीक्षा भी है, क्योंकि मुफ्त बिजली योजना का लाभ न मिलना उपभोक्ताओं में सीधा असंतोष पैदा कर रहा है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएनपीडीसीएल ने बिलिंग जांच क्यों कड़ी की?
अत्यधिक बिजली बिलों, देर से मीटर रीडिंग और मुफ्त बिजली योजना का लाभ न मिलने की बढ़ती शिकायतों के बाद टीएनपीडीसीएल ने यह कदम उठाया। कॉर्पोरेशन ने माना कि गलत मीटर रीडिंग और खराब मीटरों के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल भेजे गए।
टीएनपीडीसीएल के नए निर्देशों में क्या शामिल है?
कंपनी ने सभी सर्किलों में औचक निरीक्षण और सत्यापन अभियान चलाने, मीटर रीडिंग की सावधानीपूर्वक जांच करने और सर्कल, डिवीजन व सब-डिवीजन स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। गलत बिल जारी करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कर्मचारी संघों का इस पर क्या कहना है?
तमिलनाडु बिजली कर्मचारी केंद्रीय संगठन के अध्यक्ष एस. कन्नन ने कहा कि समस्या लापरवाही नहीं, बल्कि भारी कर्मचारी कमी है। 7,565 मूल्यांकनकर्ता पदों में से 60% और 3,961 निरीक्षक पदों में से 42% रिक्त हैं, जिससे आउटसोर्स रीडरों पर निर्भरता बढ़ी है।
क्या तमिलनाडु में मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिल रहा है?
शिकायतों के अनुसार कई उपभोक्ताओं को सरकार की मुफ्त बिजली योजना का लाभ बिलों में नहीं मिल रहा, जो असंतोष की एक प्रमुख वजह है। टीएनपीडीसीएल ने इसे बिलिंग प्रक्रिया की खामियों से जोड़ा है, जिसे नए निर्देशों से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस समस्या का उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ रहा है?
घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़े हुए द्विमासिक बिल मिल रहे हैं और मुफ्त बिजली योजना का लाभ नहीं मिल रहा, जिससे व्यापक जन असंतोष है। निदेशक (वित्त) के अनुसार इससे उपभोक्ताओं का भरोसा और कंपनी की वित्तीय स्थिति, दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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