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शिवकाशी पटाखा उद्योग के लिए तमिलनाडु लाएगी व्यापक नीति, चीनी उत्पादों को टक्कर और ग्लोबल एक्सपोर्ट पर फोकस

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शिवकाशी पटाखा उद्योग के लिए तमिलनाडु लाएगी व्यापक नीति, चीनी उत्पादों को टक्कर और ग्लोबल एक्सपोर्ट पर फोकस

सारांश

तमिलनाडु सरकार शिवकाशी के ₹6,000 करोड़ के पटाखा उद्योग को वैश्विक ब्रांड बनाने की तैयारी में है। नई नीति में चीनी उत्पादों से मुकाबला, ग्रीन क्रैकर्स को बढ़ावा, छोटी इकाइयों के लिए निर्यात के दरवाज़े और बंदरगाह लॉजिस्टिक्स सुधार शामिल हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार शिवकाशी के पटाखा उद्योग के लिए व्यापक नई नीति तैयार कर रही है।
कीर्तना ने 14 जून को घोषणा की — मुख्य लक्ष्य ग्लोबल एक्सपोर्ट विस्तार और चीनी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा।
शिवकाशी भारत के कुल पटाखा उत्पादन का 90 प्रतिशत करता है और सालाना ₹6,000 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है।
ग्रीन क्रैकर्स को प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानकों के अनुपालन पर विशेष जोर।
चेन्नई और थूथुकुडी बंदरगाहों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचा अपग्रेड की योजना।
छोटी और सूक्ष्म इकाइयों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के अवसर देना नीति का हिस्सा।

तमिलनाडु सरकार ने शिवकाशी के ऐतिहासिक पटाखा उद्योग को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने की घोषणा की है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी उत्पादों से मुकाबले और निर्यात विस्तार को केंद्र में रखा गया है। उद्योग मंत्री एस. कीर्तना ने 14 जून को मीडिया से बातचीत में इस पहल की रूपरेखा साझा की और कहा कि यह नीति राज्य के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक उद्योगों में से एक को नई ऊर्जा देगी।

शिवकाशी उद्योग की मौजूदा स्थिति

विरुधुनगर जिले में स्थित शिवकाशी भारत के पटाखा क्षेत्र की रीढ़ है। मंत्री कीर्तना के अनुसार, देश के कुल पटाखा उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत यहीं होता है और यह उद्योग सालाना ₹6,000 करोड़ से अधिक का कारोबार करता है। हज़ारों श्रमिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार देने वाला यह क्षेत्र हाल के वर्षों में कड़े नियमों, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव में रहा है।

गौरतलब है कि चीनी पटाखा उत्पादकों की कम लागत और आक्रामक निर्यात रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शिवकाशी के उत्पादों के लिए चुनौती खड़ी की है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाजार में भी पर्यावरण नियमों के कारण मांग में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

नई नीति में क्या होगा

प्रस्तावित नीति के तहत सरकार एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की योजना बना रही है जो कारखाना सुरक्षा सुधार, औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम और उत्पादन प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर सिफारिशें देगी। साथ ही उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के उपाय भी सुझाए जाएंगे।

ग्रीन क्रैकर्स यानी पर्यावरण के अनुकूल पटाखों के उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि विभिन्न देशों के पर्यावरण और आयात नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। मंत्री कीर्तना ने कहा, 'इसका उद्देश्य न केवल निर्यात को मजबूत करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि शिवकाशी के निर्माता अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी उत्पादकों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें।'

लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढाँचा

निर्यात को सुगम बनाने के लिए सरकार चेन्नई और थूथुकुडी बंदरगाहों के माध्यम से पटाखों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लॉजिस्टिक्स और परिवहन बुनियादी ढाँचे को अपग्रेड करने की योजना बना रही है। इससे निर्माताओं को लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाएं कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंत्री कीर्तना ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक निर्यात में बड़ी कंपनियों का वर्चस्व रहा है, लेकिन नई नीति से छोटी और सूक्ष्म इकाइयों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के अवसर मिलेंगे।

श्रमिक कल्याण और सतत विकास

निर्यात विस्तार के साथ-साथ सरकार श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देने पर जोर दे रही है। अधिकारियों के अनुसार, इससे उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित होगी और शिवकाशी तथा विरुधुनगर जिले की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।

नीति के अंतिम स्वरूप और क्रियान्वयन की समयसीमा की घोषणा आने वाले समय में अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — यह उद्योग दशकों से सुरक्षा हादसों और नियामकीय अनिश्चितता से जूझता रहा है। चीनी उत्पादों से मुकाबले का संकल्प तब तक कागज़ी रहेगा जब तक उत्पादन लागत, गुणवत्ता प्रमाणन और वैश्विक वितरण नेटवर्क पर ठोस निवेश नहीं होता। ग्रीन क्रैकर्स की दिशा सही है, पर छोटी इकाइयों के लिए तकनीकी उन्नयन की लागत एक बड़ी बाधा बन सकती है जिसे नीति को सीधे संबोधित करना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवकाशी पटाखा उद्योग के लिए तमिलनाडु की नई नीति में क्या होगा?
प्रस्तावित नीति में निर्यात विस्तार, श्रमिक सुरक्षा, बुनियादी ढाँचा विकास और नियामकीय सुधार शामिल हैं। साथ ही एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी जो कारखाना सुरक्षा और उत्पादन आधुनिकीकरण पर सिफारिशें देगी।
शिवकाशी उद्योग कितना बड़ा है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
शिवकाशी भारत के कुल पटाखा उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत करता है और सालाना ₹6,000 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। यह विरुधुनगर जिले में हज़ारों श्रमिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देता है।
तमिलनाडु सरकार चीनी पटाखा उत्पादकों से मुकाबले के लिए क्या करेगी?
सरकार ग्रीन क्रैकर्स उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन पर जोर देगी और चेन्नई व थूथुकुडी बंदरगाहों के ज़रिए लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचा अपग्रेड करेगी। इससे शिवकाशी के उत्पादों की विदेशी बाजारों में स्वीकार्यता बढ़ाने की उम्मीद है।
क्या छोटी पटाखा इकाइयों को भी इस नीति का लाभ मिलेगा?
उद्योग मंत्री एस. कीर्तना के अनुसार, अभी तक निर्यात में बड़ी कंपनियों का वर्चस्व रहा है। नई नीति का उद्देश्य छोटी और सूक्ष्म इकाइयों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के अवसर बनाना है।
शिवकाशी के लिए नई नीति कब लागू होगी?
नीति अभी तैयारी के चरण में है और अंतिम स्वरूप व क्रियान्वयन की समयसीमा की घोषणा आने वाले समय में होनी है। सरकार ने विशेषज्ञ समिति गठन की योजना बनाई है जो सिफारिशें देगी।
राष्ट्र प्रेस
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