पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: तेल कंपनियों को ₹52,700 करोड़ की राहत संभव, SBI रिसर्च रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की हालिया बढ़ोतरी से सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मूल्य संशोधन से ओएमसी को लगभग ₹52,700 करोड़ की राहत मिल सकती है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में इन कंपनियों के अनुमानित कुल घाटे का करीब 15 प्रतिशत है।
क्यों बढ़ाई गई कीमतें
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार उछाल के बावजूद घरेलू खुदरा ईंधन दरों में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे अंडर-रिकवरी का दबाव बढ़ता रहा। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, तेल कंपनियों को रोज़ाना करीब ₹1,000 करोड़ और सालाना लगभग ₹3.6 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा था।
महंगाई पर असर
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि मई-जून 2026 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई पर इस बढ़ोतरी का तत्काल असर 15 से 20 बेसिस पॉइंट तक हो सकता है। इसी को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इस मूल्य वृद्धि का सरकार की राजकोषीय स्थिति पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वार्षिक तेल खपत पर इस बढ़ोतरी का दीर्घकालिक असर सीमित रहने की संभावना है। पिछले अनुभव बताते हैं कि कीमत बढ़ने के तुरंत बाद खपत में मामूली गिरावट आती है, लेकिन साल के दौरान माँग फिर सामान्य स्तर पर लौट आती है।
एक्साइज ड्यूटी का समीकरण
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती की थी, जिससे सरकारी राजस्व में करीब ₹1.1 लाख करोड़ की कमी आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, यदि ओएमसी को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह शून्य किया जाता है, तो केंद्र सरकार को लगभग ₹1.9 लाख करोड़ और राज्यों को करीब ₹80,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रुपए की कमज़ोरी — सबसे बड़ा जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि रुपए में और गिरावट आती है तो ईंधन मूल्य वृद्धि से मिलने वाला लाभ निष्प्रभावी हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि डॉलर के मुकाबले रुपया वित्त वर्ष 2026-27 के औसत 94 रुपए से और 2 रुपए कमज़ोर होता है, तो घरेलू ईंधन मूल्य संशोधन से मिलने वाला पूरा लाभ समाप्त हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया, 'रुपया पहले ही एक महत्वपूर्ण गिरावट के स्तर के करीब पहुँच चुका है। इससे आगे अगर मुद्रा में और कमज़ोरी आती है, तो घरेलू ईंधन कीमत संशोधन से मिलने वाला फायदा काफी हद तक कम हो सकता है।'
आगे क्या
ओएमसी की वित्तीय सेहत काफी हद तक कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और रुपए-डॉलर विनिमय दर पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और रुपया मज़बूत बना रहता है, तो यह मूल्य वृद्धि ओएमसी को वित्तीय स्थिरता की ओर ले जा सकती है — अन्यथा सरकार को एक बार फिर नीतिगत हस्तक्षेप पर विचार करना पड़ सकता है।