15 जुलाई 2026
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फेड प्रमुख केविन वार्श का ट्रंप दबाव पर करारा जवाब: 'मैं अपना काम करता रहूँगा'

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फेड प्रमुख केविन वार्श का ट्रंप दबाव पर करारा जवाब: 'मैं अपना काम करता रहूँगा'

सारांश

फेड प्रमुख केविन वार्श ने अमेरिकी संसद में दो-टूक कहा — ट्रंप प्रशासन का दबाव हो या न हो, वे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेंगे। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब डेमोक्रेट्स को आशंका है कि व्हाइट हाउस ब्याज दरों पर फेड को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है।

मुख्य बातें

केविन वार्श ने 15 जुलाई 2026 को हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के सामने फेड अध्यक्ष के रूप में पहली बार गवाही दी।
डेमोक्रेटिक सांसद नाइडिया वेलाज़क्वेज़ के सीधे सवाल पर वार्श ने कहा — 'मैं अपना काम करता रहूँगा।' वार्श ने स्पष्ट किया कि फेडरल रिजर्व एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक है, जिसकी स्वायत्तता अमेरिकी कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त है।
सांसद मैक्सीन वॉटर्स ने याद दिलाया कि ट्रंप ने पूर्व फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल की ब्याज दरों को लेकर बार-बार आलोचना की थी।
वार्श ने 'स्वतंत्रता और सुधार — दोनों के प्रति प्रतिबद्धता' दोहराई और कहा कि फेड राजनीतिक विवादों से दूर रहेगा।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने 15 जुलाई 2026 को वॉशिंगटन में प्रतिनिधि सभा की वित्तीय सेवा समिति के समक्ष स्पष्ट कर दिया कि वे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेंगे। डेमोक्रेटिक सांसदों के तीखे सवालों के बीच वार्श ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के किसी भी दबाव की परवाह किए बिना वे अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

समिति में क्या हुआ

फेड अध्यक्ष बनने के बाद वार्श पहली बार हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के सामने पेश हुए। डेमोक्रेटिक सांसद नाइडिया वेलाज़क्वेज़ ने सीधे पूछा, 'क्या आप डोनाल्ड ट्रंप के लिए काम करते हैं? हां या नहीं।' इस पर वार्श ने दृढ़ता से कहा, 'हम एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक हैं और हमें अपनी स्वतंत्रता पर गर्व है। यह स्वतंत्रता हमें कांग्रेस ने दी है।'

जब वेलाज़क्वेज़ ने यह जानना चाहा कि यदि ट्रंप प्रशासन ब्याज दरों पर मतदान के कारण उन पर या फेड के अन्य गवर्नरों पर दबाव बनाए तो वे क्या करेंगे, तो वार्श ने पहले इस काल्पनिक प्रश्न पर टिप्पणी से परहेज किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट मौद्रिक नीति के संचालन में फेड की स्वतंत्रता को पहले ही मान्यता दे चुका है। दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने संक्षेप में कहा, 'मैं अपना काम करता रहूँगा।'

राजनीतिक दबाव की पृष्ठभूमि

यह सुनवाई ऐसे समय में हुई जब डेमोक्रेटिक नेताओं के बीच फेड पर राजनीतिक प्रभाव को लेकर चिंता गहरा रही है। डेमोक्रेटिक सांसद मैक्सीन वॉटर्स ने याद दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्याज दरों को लेकर वार्श के पूर्ववर्ती जेरोम पॉवेल की बार-बार सार्वजनिक आलोचना की थी। उन्होंने पूछा कि नए अध्यक्ष अपने सहयोगियों और संस्था की स्वतंत्रता की रक्षा कैसे करेंगे।

वार्श ने जवाब दिया कि पद संभालने के पहले छह-सात सप्ताह में उन्होंने 'स्वतंत्रता और सुधार — दोनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता' प्रदर्शित की है और कहा, 'ये दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और मैं दोनों पर खरा उतरूंगा।'

फेड की स्वतंत्रता: संवैधानिक ढाँचा

गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस ने फेडरल रिजर्व की स्थापना एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक के रूप में की थी। इसके अध्यक्ष और गवर्नरों की नियुक्ति राष्ट्रपति के नामांकन के बाद सीनेट की मंजूरी से होती है। फेड कांग्रेस के प्रति जवाबदेह है और उसका अध्यक्ष साल में दो बार सांसदों के समक्ष मौद्रिक नीति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

वार्श ने सांसदों को यह भी आश्वस्त किया कि केंद्रीय बैंक अपने कानूनी अधिकार-क्षेत्र के भीतर ही काम करेगा और राजनीतिक विवादों से दूर रहेगा। उन्होंने कहा, 'फेडरल रिजर्व की चारदीवारी के बाहर काफी राजनीति है, इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन केंद्रीय बैंक के भीतर मेरा लक्ष्य है कि राजनीति के लिए कोई जगह न हो।'

वैश्विक असर और भारत पर प्रभाव

फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर दुनिया भर की नजर रहती है, क्योंकि अमेरिका में ब्याज दरों से जुड़े फैसलों का सीधा असर अमेरिकी डॉलर, वैश्विक उधारी की लागत और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह पर पड़ता है। भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए फेड की नीतिगत दिशा विदेशी पूंजी प्रवाह, रुपये की विनिमय दर और घरेलू महंगाई को प्रभावित करती है।

वेलाज़क्वेज़ ने वार्श को याद दिलाया कि नियुक्ति की पुष्टि सुनवाई के दौरान उन्होंने मौद्रिक नीति को 'पूरी तरह स्वतंत्र' रखने का वादा किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस प्रतिबद्धता पर अब भी कायम हैं, तो उन्होंने कहा, 'बिलकुल।' यह टकराव इस बात का संकेत है कि आने वाले महीनों में फेड की स्वायत्तता एक केंद्रीय राजनीतिक और आर्थिक विमर्श बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — जब फेड को दर कटौती या बढ़ोतरी का वास्तविक फैसला लेना होगा। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही जेरोम पॉवेल को निशाना बनाकर यह संकेत दे दिया है कि व्हाइट हाउस फेड की स्वायत्तता को एक राजनीतिक बाधा की तरह देखता है। वार्श की नियुक्ति स्वयं ट्रंप ने की है, जो एक अंतर्निहित तनाव पैदा करती है जिसे कोई भी संसदीय आश्वासन पूरी तरह नहीं मिटा सकता। भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह विमर्श महज अमेरिकी घरेलू राजनीति नहीं है — फेड की विश्वसनीयता सीधे वैश्विक पूंजी प्रवाह और मुद्रा स्थिरता को प्रभावित करती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केविन वार्श ने ट्रंप प्रशासन के दबाव पर क्या कहा?
वार्श ने कहा कि वे फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता बनाए रखेंगे और किसी भी दबाव की परवाह किए बिना 'अपना काम करते रहेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के भीतर राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होगी।
फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता क्यों महत्वपूर्ण है?
फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ब्याज दर संबंधी फैसले उधारी की लागत, रोजगार, महंगाई और वैश्विक पूंजी प्रवाह को प्रभावित करते हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप से बाजारों का विश्वास कमजोर हो सकता है और अमेरिकी डॉलर की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
केविन वार्श से पहले फेड प्रमुख कौन थे और ट्रंप का उनसे क्या विवाद था?
वार्श के पूर्ववर्ती जेरोम पॉवेल थे, जिनकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्याज दरों को लेकर बार-बार सार्वजनिक आलोचना की थी। डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसी पृष्ठभूमि में वार्श से उनकी स्वतंत्रता की गारंटी माँगी।
फेड अध्यक्ष की नियुक्ति कैसे होती है और वे किसके प्रति जवाबदेह हैं?
फेड अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति के नामांकन के बाद सीनेट की मंजूरी से होती है। हालाँकि, फेड कांग्रेस के प्रति जवाबदेह है और उसका अध्यक्ष साल में दो बार सांसदों के समक्ष मौद्रिक नीति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
फेड की ब्याज दर नीति का भारत पर क्या असर पड़ता है?
अमेरिकी फेड के ब्याज दर फैसलों का असर अमेरिकी डॉलर, वैश्विक उधारी की लागत और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह पर पड़ता है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में इससे विदेशी निवेश, रुपये की विनिमय दर और घरेलू महंगाई प्रभावित होती है।
राष्ट्र प्रेस
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