अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में वृद्धि पर विवाद, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप की नीतियों की आलोचना की
सारांश
Key Takeaways
- गैसोलीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि
- डेमोक्रेटिक पार्टी की आलोचना
- राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों पर सवाल
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने की मांग
- आर्थिक दबाव में परिवार
वाशिंगटन, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के चलते, वहां के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ चल रही जंग की तीखी आलोचना की है। उन्होंने व्हाइट हाउस से आग्रह किया है कि आम जनता को राहत देने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी किया जाए।
मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतें चार साल में पहली बार 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। एक बैरल कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर तक जा पहुंची है। इससे अमेरिका में ईंधन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
इंडियन अमेरिकन कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि बढ़ती कीमतें उन परिवारों पर सीधे असर डाल रही हैं जो पहले से ही रहने-खाने के खर्चों से जूझ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के साथ जंग के चलते इलिनोइस में पिछले एक महीने में ईंधन की औसत कीमत लगभग 50 सेंट प्रति गैलन बढ़ गई है। ट्रंप इसे “बहुत छोटी कीमत” मानते हैं, लेकिन जिन परिवारों को अपने वाहनों में पेट्रोल भरवाना पड़ता है, उनके लिए यह एक बड़ी समस्या बन गई है।
कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति ने बिना किसी ठोस रणनीति के यह संघर्ष शुरू किया है और उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि इसका असर मेहनती अमेरिकी नागरिकों पर क्या पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से तुरंत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने की अपील की। उनका कहना है कि इससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ था, तब भी इसी भंडार से तेल जारी किया गया था।
मिशिगन की कांग्रेस सदस्य हेली स्टीवंस ने भी प्रशासन की आलोचना की और कहा कि अमेरिकी परिवार इस लड़ाई के आर्थिक नतीजे भुगत रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण अमेरिकी परिवारों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। अस्थिर व्यापार शुल्क और ईरान के साथ युद्ध ने अस्थिरता बढ़ाई है और अमेरिका में लोगों का जीवन महंगा होता जा रहा है।
स्टीवंस ने कहा कि अमेरिका इस युद्ध पर हर दिन लगभग एक बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। साथ ही तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि प्रशासन ने ईरान की संभावित प्रतिक्रिया का सही अंदाजा नहीं लगाया।
सीनेट डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर ने भी प्रशासन से रिजर्व से तेल छोड़ने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के साथ लड़ाई के कारण पूरे देश में ऊर्जा की लागत तेजी से बढ़ रही है। शूमर ने कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार ऐसे ही आपात समय के लिए बनाया गया है।
ईरान के साथ संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था। तब से ईंधन की कीमत लगभग 43 सेंट प्रति गैलन बढ़कर करीब 3.41 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकर ट्रैफिक में रुकावटों ने दुनिया भर में तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा काट दिया है, जिससे ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। शूमर ने कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए ताकि बाजार स्थिर हो सके और कीमतें कम हों।
सीनेट डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन ने भी लड़ाई से निपटने के प्रशासन के तरीके की आलोचना की।
डर्बिन ने कहा, "प्रेसिडेंट ट्रंप ने खुद को 'पीस प्रेसिडेंट' के तौर पर दिखाने की कोशिश की है, लेकिन उनके काम कुछ और ही कहानी बताते हैं।"
इसी बीच, डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने भी प्रशासन की आलोचना की और कहा कि बढ़ती कीमतें अमेरिकी परिवारों के लिए एक नया आर्थिक बोझ हैं।
समिति की प्रवक्ता केंडल विटमर ने कहा कि ट्रंप आम अमेरिकी नागरिकों की समस्याओं से कटे हुए नजर आते हैं। कामकाजी परिवार अपने बैंक खातों की आखिरी बचत तक खर्च कर रहे हैं।