ईरान के साथ युद्ध में ट्रंप पर डेमोक्रेट्स का दबाव, रणनीति की कमी पर उठे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- ईरान युद्ध में कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं है।
- युद्ध की लागत बढ़ती जा रही है।
- डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
- पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
- अमेरिकी विदेश नीति में स्पष्टता की कमी है।
वाशिंगटन, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण सियासी स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और संघर्ष के लंबे खिंचने के संभावित खतरों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने बताया कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या योजना नहीं है। उन्होंने कहा, "ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की रणनीति के बारे में स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे हैं।
चक शूमर ने व्हाइट हाउस के बयानों को भी विरोधाभासी करार दिया। उन्होंने कहा, "यह क्या चल रहा है? यह कमांडर-इन-चीफ की नेतृत्व क्षमता नहीं है। या तो वह भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे हैं, या फिर दोनों ही।"
उन्होंने इस युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल की कीमतों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत करीब २.९३ डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर ३.९४ डॉलर हो गई है। यह बढ़ोतरी यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी में से एक है।
चक शूमर ने सीनेट में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए रिपब्लिकन नेताओं से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा, "हमें जवाबदेही, पारदर्शिता और सबसे जरूरी, एक स्पष्ट रणनीति और संघर्ष का अंत चाहिए।"
इसी तरह, सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा, "अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। न इसका विस्तार हो और न ही जमीनी सैनिक भेजे जाएं।"
ग्रेग लैंड्समैन के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अब और गहराई से शामिल होना अमेरिका को बिना योजना वाले लंबे युद्ध में फंसा सकता है।
सीनेटर पीटर वेल्च ने भी सरकार के रुख की आलोचना की और युद्ध के लिए मांगे गए २०० अरब डॉलर के फंड का विरोध किया। उन्होंने कहा, "हमारा देश इस पीढ़ी के सबसे बड़े युद्ध में गहराई तक उतर चुका है, लेकिन अब तक सीनेट में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।"
पीटर वेल्च ने इसके आर्थिक प्रभाव पर भी चिंता जताई कि पूरे देश में पेट्रोल की कीमतें कम से कम १ डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे एक सामान्य अमेरिकी परिवार को सालाना लगभग २,००० डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त १,००० डॉलर का बोझ पड़ सकता है।
वहीं, सीनेटर सारा जैकब्स ने इस पूरे मामले को अमेरिकी विदेश नीति की एक बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा, "यह शायद अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी चूक है।" सारा जैकब्स ने कहा कि सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम जनता को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध क्या है, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी।