ईरान संघर्ष से उपजी महंगाई अस्थायी, कीमतें जल्द घटेंगी: अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 5 जून 2026 को वॉशिंगटन में प्रतिनिधि सभा की वेज एंड मीन्स समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि ईरान संघर्ष के कारण ईंधन और उपभोक्ता वस्तुओं में आई मूल्यवृद्धि अल्पकालिक है और स्थिति सामान्य होते ही कीमतें घट जाएंगी। यह बयान ऐसे समय आया जब ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों को लेकर डेमोक्रेटिक सांसदों की ओर से तीखी आलोचना हो रही थी।
सुनवाई में क्या हुआ
वेज एंड मीन्स समिति की यह सुनवाई कई बार तीखे तेवर अख्तियार कर गई। डेमोक्रेटिक सांसदों ने आरोप लगाया कि ईरान से जुड़े सैन्य संघर्ष के कारण ईंधन, किराने का सामान और घरेलू खर्च बढ़ा है, जिसकी मार आम अमेरिकी परिवारों पर पड़ रही है। समिति के शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य रिचर्ड नील ने कहा कि परिवारों को रोज़मर्रा की ज़रूरतों पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है और इसके लिए उन्होंने टैरिफ तथा ईरान संघर्ष — दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
जुडी चू ने कहा कि अमेरिकी नागरिक अब भी पेट्रोल, किराने के सामान और घरेलू वस्तुओं के लिए अधिक कीमत चुका रहे हैं, जबकि ब्रेंडन बॉयल ने अर्थव्यवस्था को संभालने के तरीके को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी का उल्लेख किया।
बेसेंट की दलीलें
जॉन लार्सन के सीधे सवाल पर कि क्या संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, बेसेंट ने स्वीकार किया — 'जी हाँ, संघर्ष की वजह से कीमतें बढ़ीं।' हालाँकि उन्होंने तुरंत जोड़ा कि यह बढ़ोतरी अस्थायी है। उन्होंने कहा, 'ईरान संघर्ष के कारण कीमतों में अल्पकालिक बढ़ोतरी हुई है, जो समय के साथ कम हो जाएगी।'
वित्त मंत्री ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती का हवाला देते हुए रोजगार वृद्धि, निजी क्षेत्र में निवेश और वेतन बढ़ने के आँकड़े पेश किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद संभालने के बाद से कोर महंगाई दर में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम आर्थिक कीमत
बेसेंट ने ईरान नीति का बचाव करते हुए तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है और इसके लिए अल्पकालिक आर्थिक असुविधा स्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने या वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डालने की अनुमति दी जाती, तो अमेरिकी नागरिकों को कहीं अधिक गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते।
रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए प्रशासन की नीति का समर्थन किया, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि इसकी आर्थिक कीमत आम अमेरिकी नागरिकों को अधिक महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि के रूप में चुकानी पड़ रही है।
ऊर्जा बाज़ार में बदलाव के संकेत
बेसेंट ने यह भी कहा कि ऊर्जा बाज़ार पहले ही नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने लगे हैं। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है और पेट्रोल की कीमतें आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों का अनुसरण करती हैं। आलोचकों का कहना है कि यह राहत पंप पर उपभोक्ताओं तक पहुँचने में अभी भी समय लग सकता है।
आगे की राह
यह सुनवाई स्पष्ट करती है कि ईरान संघर्ष के आर्थिक प्रभाव अब वॉशिंगटन में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुके हैं। आने वाले हफ्तों में ऊर्जा कीमतों की दिशा और कोर महंगाई के ताज़ा आँकड़े तय करेंगे कि बेसेंट का 'अस्थायी' वाला दावा कितना सटीक साबित होता है।