ट्रंप का बयान: बढ़ती तेल कीमतों में अमेरिका को मिल रहा है लाभ
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वाशिंगटन, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के चलते तेल की कीमतों में हुई वृद्धि ने पूरे विश्व को चिंतित कर रखा है। कई राष्ट्र ईंधन की खपत कम करने के उपायों की खोज में जुटे हैं। इस संदर्भ में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि का लाभ अमेरिका को मिल रहा है।
ट्रंप ने ईरान की तेल की बढ़ती कीमतों और बाजार की अस्थिरता को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का फायदा इस स्थिति में स्पष्ट है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "अमेरिका सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हमें इससे बहुत लाभ होता है। लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हमें ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहिए, क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया को खतरा हो सकता है।"
ट्रंप ने यह भी कहा, "मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा।" यह टिप्पणी उस समय आई है जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान के हमलों के बढ़ने के कारण दुनिया को तेल की आपूर्ति में ऐतिहासिक बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
बुधवार को ओहियो में ट्रंप ने गैस की कीमतों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मैं कहूंगा कि यह हमारी अपेक्षा से कम बढ़ी है।" उन्होंने आश्वासन दिया कि "यह इतनी कम हो जाएगी कि कोई भी समझ नहीं पाएगा।"
मध्य पूर्व संकट के बीच, आईईए के सदस्य देशों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने 32 सदस्यों के आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल को बाजार में लाने पर सहमति जताई है।
ये आपातकालीन भंडार सदस्य देशों की राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार, समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराए जाएंगे। भारत ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
आईईए के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार है, जिसमें से सरकार की बाध्यता के तहत उद्योगों के पास करीब 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त भंडार है। यह पहले ऐसा छठा अवसर है जब आईईए ने समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया है।
आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बाजार की स्थिति की समीक्षा करने के लिए सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वर्तमान में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।