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ट्रंप ने भारत की 7-8% GDP वृद्धि को बताया अमेरिका का नया आर्थिक मानक, फेड पर साधा निशाना

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ट्रंप ने भारत की 7-8% GDP वृद्धि को बताया अमेरिका का नया आर्थिक मानक, फेड पर साधा निशाना

सारांश

ट्रंप ने भारत की 7-8% विकास दर को अमेरिका के लिए प्रेरणा बताते हुए 12-13% जीडीपी का लक्ष्य रखने की वकालत की। साथ ही फेडरल रिज़र्व पर निशाना साधा कि ऊँची ब्याज दरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को कृत्रिम रूप से थाम रही हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जुलाई 2026 को सीएनबीसी साक्षात्कार में भारत की 7-8% GDP वृद्धि दर को अमेरिका के लिए नया आर्थिक मानक बताया।
ट्रंप ने कहा अमेरिका को 4% पर नहीं रुकना चाहिए — लक्ष्य 12-13% जीडीपी वृद्धि होना चाहिए।
फेडरल रिज़र्व की आलोचना करते हुए कहा कि ऊँची ब्याज दरें आर्थिक विस्तार को अनावश्यक रूप से रोक रही हैं।
ट्रंप ने वित्तीय बाज़ारों में 'महंगाई के विरोधाभास' को रेखांकित किया, जिसमें अच्छे आँकड़े भी निवेशकों में घबराहट पैदा करते हैं।
बयान उम्मीद से अधिक मज़बूत अमेरिकी रोज़गार आँकड़ों के जारी होने के बाद आया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जुलाई 2026 को सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिनाते हुए कहा कि अमेरिका को महंगाई और ब्याज दरों की चिंताओं से ऊपर उठकर कहीं अधिक आर्थिक विकास का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अत्यधिक सतर्कता अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को धीमा करने का जोखिम पैदा कर रही है।

भारत की विकास दर बनी चर्चा का केंद्र

ट्रंप ने साक्षात्कार में कहा, "आपके पास कुछ देश हैं, भारत उनमें से एक है, जो बहुत अच्छा कर रहा है, लेकिन यह 7-8 फीसदी पर है। हमें ऊपर बढ़ने की इजाज़त नहीं है। अगर हम ऊपर जाते हैं, तो वे इसे खत्म करना चाहते हैं।" उनका यह बयान उम्मीद से अधिक मजबूत अमेरिकी रोज़गार आँकड़े जारी होने के तुरंत बाद आया, जिसने ब्याज दरों को लेकर बहस को फिर से हवा दी है।

ट्रंप ने तर्क दिया कि अमेरिका को कहीं अधिक महत्वाकांक्षी विकास दर का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें 4 फीसदी पर रुकना चाहिए। हमें 12 और 13 फीसदी जीडीपी पर रहना चाहिए।"

फेडरल रिज़र्व पर सीधा हमला

राष्ट्रपति ने फेडरल रिज़र्व के नीति-निर्माताओं पर आरोप लगाया कि वे ऊँची ब्याज दरें बनाए रखकर आर्थिक विस्तार को अनावश्यक रूप से रोक रहे हैं। उन्होंने वित्तीय बाज़ारों में मौजूद 'महंगाई के विरोधाभास' की ओर ध्यान दिलाया — जिसके तहत अर्थव्यवस्था के सकारात्मक आँकड़े आने पर भी निवेशक ब्याज दर बढ़ने की आशंका से घबरा जाते हैं।

ट्रंप ने कहा कि वे उस दौर को याद करते हैं जब मज़बूत आर्थिक डेटा से वित्तीय बाज़ारों को स्वाभाविक बढ़ावा मिलता था। उनके अनुसार, आर्थिक विकास को स्वतः महंगाई बढ़ाने वाला नहीं मान लेना चाहिए — नीति-निर्माताओं को इस सोच से बाहर निकलना होगा।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की 'स्वर्ण युग' वाली तस्वीर

ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश की। उन्होंने दावा किया, "आज हमारे यहाँ पहले से कहीं ज़्यादा फ़ैक्ट्रियाँ बन रही हैं। आज हमारे देश के इतिहास में पहले से कहीं ज़्यादा लोग काम कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी श्रमिक — "अमीर नहीं, बल्कि सामान्य नौकरियों वाले लोग" — पहले से कहीं अधिक कमा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में शेयर बाज़ार बार-बार रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचा है और मौजूदा आर्थिक प्रदर्शन उनके पहले कार्यकाल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुका है। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों का संदर्भ

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लगातार अपनी जगह बनाए हुए है। इस विकास को घरेलू खपत, सरकारी बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते खर्च और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की प्रवृत्ति से बल मिला है।

पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हुआ है। दोनों देश अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत निवेश और आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएँ भी जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

घरेलू राजनीतिक दबाव अधिक लगता है — फेडरल रिज़र्व को कोसने का यह उनका पुराना तरीका है। 12-13% जीडीपी का लक्ष्य अर्थशास्त्रियों की दृष्टि में अवास्तविक है, क्योंकि अमेरिका जैसी परिपक्व अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक सीमाएँ भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था से बिल्कुल अलग हैं। भारत की तुलना एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल हो रही है, न कि नीतिगत खाके के रूप में। असली सवाल यह है कि क्या यह बयानबाज़ी फेड की स्वायत्तता पर दबाव बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने 3 जुलाई 2026 को सीएनबीसी साक्षात्कार में भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिनाते हुए उसकी 7-8% विकास दर की सराहना की। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए एक नया आर्थिक मानक बताया।
ट्रंप ने फेडरल रिज़र्व की आलोचना क्यों की?
ट्रंप का कहना है कि फेडरल रिज़र्व ऊँची ब्याज दरें बनाए रखकर अमेरिकी आर्थिक विस्तार को कृत्रिम रूप से रोक रहा है। उनके अनुसार आर्थिक विकास को स्वतः महंगाई का कारण नहीं मान लेना चाहिए।
ट्रंप ने अमेरिका के लिए कितनी जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य बताया?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को 4% पर नहीं रुकना चाहिए और 12-13% जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य रखना चाहिए। हालाँकि, अर्थशास्त्री इस लक्ष्य को एक परिपक्व अर्थव्यवस्था के लिए अवास्तविक मानते हैं।
भारत की विकास दर इतनी ऊँची क्यों है?
भारत की उच्च विकास दर को घरेलू खपत, सरकारी बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते निवेश और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने से बल मिला है। चीन से परे विनिर्माण स्थानांतरण ने भी वैश्विक निवेश आकर्षित किया है।
भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध अभी कैसे हैं?
पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हुआ है। दोनों देश निवेश और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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