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क्या भारत के लिए अमेरिका से ट्रेड डील पर बातचीत करने का रास्ता खुला है?

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क्या भारत के लिए अमेरिका से ट्रेड डील पर बातचीत करने का रास्ता खुला है?

सारांश

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत का रास्ता खुला है, भले ही ट्रंप ने 25 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान किया हो। यह स्थिति भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की क्षमता को दर्शाती है। जानें इस मुद्दे पर क्या है अर्थशास्त्रियों की राय।

मुख्य बातें

ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर सकता है।
भारत को अमेरिका के साथ बातचीत करने का मौका मिल सकता है।
भारत के घरेलू बाजार का बड़ा आकार टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकता है।

नई दिल्ली, 31 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाने के निर्णय के बावजूद, अर्थशास्त्री मानते हैं कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है।

अर्थशास्त्री त्रिन्ह गुयेन के अनुसार, ट्रंप का टैरिफ संबंधी निर्णय कोई नया नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "क्या यह आश्चर्यजनक है? बिल्कुल नहीं। पिछले हफ्ते से मैं इस बारे में सोच रहा था कि अमेरिका-भारत समझौता कैसे होगा, और मुझे इसका अंदाजा था। मुझे लगता है कि भारत इस चुनौती का सामना करने के लिए बातचीत कर सकता है।"

अमेरिका की ओर से टैरिफ की घोषणा के बाद, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा, जैसे कि हाल में ब्रिटेन के साथ हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते में।

गुयेन ने बताया कि यह ट्रंप की एक सोची-समझी रणनीति है, जो उनके पिछले कार्यकाल में जापान के साथ की गई रणनीति को याद दिलाती है। उन्होंने कहा, "यह एक परिचित तरीका है। पहले कठोर आंकड़ा पेश करो, दबाव बनाओ, फिर बातचीत शुरू करो।"

उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप के कुछ ऐसे लक्ष्य हैं जिनमें वे भारत या प्रधानमंत्री मोदी की मदद चाहते हैं, जिसमें यूक्रेन युद्ध का समाधान शामिल है। भारत इस मुद्दे में ज्यादा रुचि नहीं रखता, क्योंकि यह एक उभरता हुआ देश है जो सस्ता तेल खरीदने में रुचि रखता है।

गुयेन के अनुसार, यूरोपीय संघ और जापान को भी आंशिक राहत मिली है, जहां ऑटोमोबाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है।

उन्होंने कहा, "भारत के लिए, 15 प्रतिशत टैरिफ सबसे बेहतर स्थिति हो सकती है।"

ट्रंप का एक अन्य लक्ष्य यह है कि वे यह दिखाएं कि उन्होंने भारत के विशाल बाजार को अमेरिकी निर्यातकों के लिए खोला है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है।

गुयेन ने कहा, "भारत-ब्रिटेन समझौता दर्शाता है कि भारत खुल रहा है, लेकिन अपनी गति से। मतलब यह कि बहुत धीरे-धीरे और उन क्षेत्रों में जहां उसे लगता है कि उसे संरक्षण की आवश्यकता नहीं है।"

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ में किसी भी वृद्धि का व्यापक आर्थिक प्रभाव देश के घरेलू बाजार के बड़े आकार से कम हो जाएगा।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की निर्यात क्षमता अंततः चीन जैसे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर भी निर्भर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत को अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ बातचीत की संभावनाओं को देखना चाहिए। आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह आवश्यक है कि हम समझौतों में अपनी स्थिति को मजबूती से पेश करें।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ट्रंप के टैरिफ का भारत पर कोई असर पड़ेगा?
हाँ, ट्रंप के टैरिफ का असर भारत की व्यापार नीति और निर्यात पर पड़ सकता है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत अपने बड़े घरेलू बाजार के कारण इससे बच सकता है।
भारत के लिए सबसे अच्छा समाधान क्या हो सकता है?
भारत के लिए 15 प्रतिशत टैरिफ सबसे बेहतर स्थिति हो सकती है, जिससे देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके।
क्या भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील कर पाएगा?
हां, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत अमेरिका के साथ बातचीत करने में सफल हो सकता है, भले ही चुनौतियाँ हों।
राष्ट्र प्रेस
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