क्या भारत एआई मॉडल्स के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन गया है, सस्ते डेटा के चलते तेजी से हो रहा विस्तार: बोफा?
सारांश
Key Takeaways
- भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा एआई बाजार है।
- सस्ते डेटा की उपलब्धता ने एआई को अधिक सुलभ बनाया है।
- युवा जनसंख्या एआई के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- दूरसंचार कंपनियां एआई ऐप्स के सशुल्क संस्करणों की मुफ्त सदस्यता प्रदान कर रही हैं।
- कई भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल की उपलब्धता डिजिटल विभाजन को कम कर रही है।
नई दिल्ली, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत अब लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) के उपयोग में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय बाजार बन चुका है। यह जानकारी बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) द्वारा बुधवार को साझा की गई।
देश में चैटजीपीटी, जैमिनी और पर्प्लेक्सिटी जैसे एआई ऐप्स पर मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (एमएयू) और दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (डीएयू) की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है।
बोफा ने बताया कि भारत का एक प्रमुख एआई बाजार के रूप में तेजी से उभरना व्यापकता, किफायती उपलब्धता और जनसांख्यिकी के संयोजन से प्रेरित है।
भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन आबादी है, जिसमें 700-750 मिलियन से अधिक मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।
किफायती डेटा योजनाओं ने एआई तक पहुँच को आसान बना दिया है, जिससे उपयोगकर्ता लगभग 2 डॉलर में प्रति माह 20-30 जीबी डेटा का उपयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा, भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से 60 प्रतिशत से अधिक 35 वर्ष से कम आयु के हैं और इस जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजी बोलने वाला है और नई तकनीकों को तेजी से अपनाता है।
भारत में दूरसंचार कंपनियों द्वारा भी एआई को अपनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। बोफा ने बताया कि जियो और भारती एयरटेल जैसी दूरसंचार कंपनियां जैमिनी और परप्लेक्सिटी जैसे एआई ऐप्स के सशुल्क संस्करणों की मुफ्त सदस्यता प्रदान कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इससे उपयोगकर्ताओं, एआई कंपनियों और दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए लाभकारी स्थिति बन रही है।
उपभोक्ताओं के लिए, कम लागत पर उन्नत एआई उपकरणों तक पहुंच एक समान अवसर प्रदान करने में सहायक हो रही है।
भारतीय उपयोगकर्ता इन उपकरणों का उपयोग सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।
बोफा ने रिपोर्ट में बताया कि कई भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल की उपलब्धता डिजिटल विभाजन को पाटने और भाषा संबंधी बाधाओं को कम करने में भी सहायक हो रही है, जिससे एआई का लोकतंत्रीकरण हो रहा है।