PM मोदी और सेशेल्स राष्ट्रपति हर्मिनी की द्विपक्षीय वार्ता, 'मेड इन इंडिया' गश्ती पोत सौंपा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने 29 जून 2025 को विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें रक्षा साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता को केंद्र में रखा गया। इस बैठक से एक दिन पहले भारत ने सेशेल्स को एक 'मेड इन इंडिया' फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) 'पीएस लेस्पवॉर' सहित कई रक्षा और नागरिक उपकरण सौंपे, जो दोनों देशों के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
द्विपक्षीय वार्ता में कौन-कौन शामिल रहे
स्टेट हाउस में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा हितों के मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स स्टेट हाउस में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इससे पहले सेशेल्स एयरपोर्ट पर आगमन के समय भी दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए और दोनों नेताओं ने सैन्य सलामी का निरीक्षण किया।
भारत ने सौंपे रक्षा और नागरिक उपकरण
यात्रा के पहले दिन शनिवार को सेशेल्स कोस्ट गार्ड बेस, विक्टोरिया में एक विशेष हस्तांतरण समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति हर्मिनी को 'मेड इन इंडिया' FPV 'पीएस लेस्पवॉर' के अलावा 6 एम्बुलेंस, 10 यूटिलिटी वाहन और 5 लेज़र रेडियल नौकाएं भी सौंपीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'एक खास पहल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मेड इन इंडिया' फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) 'पीएस लेस्पवॉर' राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को सौंपा। यह FPV सेशेल्स की समुद्री निगरानी और EEZ पेट्रोलिंग क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगा।'
यह हाई-स्पीड गश्ती पोत सेशेल्स के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में निगरानी को सुदृढ़ करेगा और समुद्री डकैती तथा तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा।
विजन महासागर और हिंद महासागर सुरक्षा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की 'विजन महासागर' पहल के तहत दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपनी रक्षा साझेदारी को और प्रगाढ़ कर रहे हैं। गौरतलब है कि हिंद महासागर भारत की समुद्री रणनीति का केंद्र है, और सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के साथ संबंध इस रणनीति की आधारशिला माने जाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर क्षेत्रीय देश सतर्क हैं। भारत का यह कदम 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'SAGAR' (Security and Growth for All in the Region) नीति की निरंतरता में है।
सांस्कृतिक और कूटनीतिक आयाम
दोनों नेताओं ने सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन में दुर्लभ 'कोको डी मेर' पाम का पौधा लगाया — जो दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता का प्रतीकात्मक संदेश था। प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के पारंपरिक माउट्या नृत्य और गुजरात के कच्छ क्षेत्र के लोक नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी देखी।
प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को सेशेल्स राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह उनकी सेशेल्स की दूसरी राजकीय यात्रा है। इससे पहले फरवरी में राष्ट्रपति हर्मिनी छह दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए थे, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक आदान-प्रदान की बढ़ती गति को दर्शाता है।
आगे क्या
सेशेल्स राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती में मोदी की उपस्थिति इस द्विपक्षीय संबंध को एक नई ऊंचाई देगी। रक्षा उपकरणों का यह हस्तांतरण भारत के 'मेड इन इंडिया' रक्षा निर्यात एजेंडे को भी बल देता है, और भविष्य में दोनों देशों के बीच और अधिक रक्षा सहयोग समझौतों की संभावना को खोलता है।