पीएम मोदी का सेशेल्स दौरा: सुरक्षा, समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के आमंत्रण पर तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर सेशेल्स जाएंगे। मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित गोल्डन जुबली समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे — एक ऐसा सम्मान जो दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करता है। सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रथीश ने इस दौरे के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दौरे का महत्व और समय
उच्चायुक्त रोहित रथीश ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है। सेशेल्स अपनी आज़ादी की 50वीं वर्षगाँठ पर गोल्डन जुबली मना रहा है और पीएम मोदी मुख्य अतिथि हैं — यह दर्शाता है कि हमारा संबंध कितना गहरा है।' उन्होंने बताया कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंध सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग और विज्ञान सहित तमाम क्षेत्रों में और अधिक सुदृढ़ होंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और सेशेल्स के बीच कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
पिछले नौ महीनों में मजबूत हुए संबंध
रथीश ने बताया कि पिछले नौ महीनों में दोनों देशों के आपसी संबंध तेज़ी से प्रगाढ़ हुए हैं। अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति हर्मिनी के शपथग्रहण समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन विशेष रूप से उपस्थित रहे थे। इसके बाद राष्ट्रपति हर्मिनी स्वयं भारत दौरे पर आए। उच्चायुक्त के अनुसार, 'प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में इस साझेदारी को नई ऊर्जा और गति मिली है।' पीएम मोदी इस दौरे के दौरान सेशेल्स में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।
समुद्री सुरक्षा और 'विजन महासागर'
भारतीय समुद्री क्षेत्र में सेशेल्स की भूमिका पर रथीश ने कहा, 'हम दोनों देश इस क्षेत्र को साझा करते हैं और अपनी आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा के लिए हिंद महासागर पर निर्भर हैं।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रतिपादित 'विजन महासागर' का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें व्यापार, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा समेत कई आयाम शामिल हैं, जो हिंद महासागर क्षेत्र की सामूहिक प्रबंधन की अवधारणा को बढ़ावा देते हैं।
साझा खतरों से मिलकर निपटने की प्रतिबद्धता
उच्चायुक्त रथीश ने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण साझेदार देशों की क्षमता को मज़बूत करना, ज़रूरत पड़ने पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका निभाना और क्षेत्रीय खतरों से मिलकर निपटना है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रग तस्करी, मानव तस्करी और अवैध मत्स्य आखेट को प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया। रथीश ने ज़ोर देकर कहा, 'सेशेल्स के साथ हमारे रक्षा और सुरक्षा संबंध पहले से कहीं बेहतर हैं।' यह दौरा हिंद महासागर में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।