27 जून 2026
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PM मोदी सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रवाना, स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस पर 'सम्मानित अतिथि' बनेंगे

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PM मोदी सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रवाना, स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस पर 'सम्मानित अतिथि' बनेंगे

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा महज़ एक समारोह में शिरकत नहीं है — यह हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक पकड़ मज़बूत करने का सुनियोजित कदम है। फरवरी में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा और अक्टूबर में उपराष्ट्रपति धनखड़ के दौरे के बाद, यह तीसरी बड़ी उच्च-स्तरीय मुलाकात है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी 27 जून 2026 को सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रवाना हुए।
मोदी राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में शामिल होंगे।
सेशेल्स नेशनल असेंबली को संबोधन और भारतीय समुदाय से संवाद यात्रा का हिस्सा।
दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर और महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद।
AI, साइबर सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और DPI नए सहयोग के प्रमुख क्षेत्र।
फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा और अक्टूबर 2025 में उपराष्ट्रपति धनखड़ के दौरे के बाद उच्च-स्तरीय संपर्क में तेज़ी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जून 2026 (शनिवार) को सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रवाना हुए, जहाँ वे देश के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में 'गेस्ट ऑफ ऑनर' (सम्मानित अतिथि) के रूप में शामिल होंगे। यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के व्यक्तिगत निमंत्रण पर हो रही है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का ताज़ा उदाहरण है।

यात्रा का एजेंडा

विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। इसके अलावा, मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे — जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा वहाँ की संसद को दिया जाने वाला एक दुर्लभ संबोधन होगा।

यात्रा के दौरान सेशेल्स में भारत के हाई कमिश्नर रोहित राठीश के अनुसार, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने और अहम क्षेत्रों में नतीजों की घोषणा होने की उम्मीद है। मोदी वहाँ रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी सीधी बातचीत करेंगे।

भारत-सेशेल्स संबंधों की पृष्ठभूमि

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत और सेशेल्स के बीच साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी रही है। हिंद महासागर में एक अहम समुद्री पड़ोसी के रूप में, सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर' — यानी क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए समग्र प्रगति — और 'ग्लोबल साउथ' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है।

गौरतलब है कि यह यात्रा उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संपर्क की एक श्रृंखला की कड़ी है। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी छह दिन की सरकारी यात्रा पर भारत आए थे, जिसमें दोनों नेताओं ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में सहयोग पर सहमति जताई थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी सेशेल्स की यात्रा कर चुके हैं।

नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ

हाई कमिश्नर राठीश ने बताया कि दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान एवं संरक्षण और ब्लू इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को 'गतिशील और बेहतरीन' बताया।

दोनों देशों ने 'बेहतर जुड़ाव के ज़रिए सस्टेनेबिलिटी, आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए संयुक्त विज़न' अपनाया है, जिसके तहत मोदी ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और समावेशी विकास पर ध्यान देते हुए सेशेल्स के राष्ट्रीय विकास एजेंडा में भारत की भागीदारी का संकल्प दोहराया है।

जयशंकर की पहल और आर्थिक सहयोग

अप्रैल 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में 9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे से मुलाकात की थी। जयशंकर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा था, '9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे से मिलकर बहुत अच्छा लगा। भारत मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सेशेल्स का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत किया।' यह बयान विक्टोरिया को आर्थिक चुनौतियों से उबारने में नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

आगे क्या होगा

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और मज़बूत होने की उम्मीद है। नेशनल असेंबली में संबोधन और भारतीय समुदाय से संवाद के साथ-साथ संभावित समझौते इस यात्रा को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि ठोस नतीजे देने वाली कूटनीतिक पहल बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के जवाब में छोटे द्वीपीय देशों को साधने की रणनीति का हिस्सा है। फरवरी में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा, अक्टूबर में उपराष्ट्रपति का दौरा और अब प्रधानमंत्री की यात्रा — यह तीव्र कूटनीतिक लय असाधारण है और संकेत देती है कि नई दिल्ली सेशेल्स को रणनीतिक प्राथमिकता मान रही है। असली परीक्षा यह होगी कि DPI, ब्लू इकोनॉमी और AI सहयोग के वादे कागज़ से ज़मीन पर कितना उतरते हैं — क्योंकि हिंद महासागर के छोटे देशों के साथ भारत के पिछले 'विशेष पैकेज' अक्सर घोषणाओं में मज़बूत और क्रियान्वयन में कमज़ोर रहे हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी सेशेल्स क्यों जा रहे हैं?
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर वहाँ के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में शामिल होने जा रहे हैं। इस यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी होने की उम्मीद है।
मोदी की सेशेल्स यात्रा में क्या-क्या होगा?
मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और वहाँ रहने वाले भारतीय समुदाय से मिलेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग के कौन-से नए क्षेत्र हैं?
दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान एवं संरक्षण और ब्लू इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में पहले ही सहमति बन चुकी है।
हाल के महीनों में भारत-सेशेल्स के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क कैसा रहा है?
फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति हर्मिनी छह दिन की सरकारी यात्रा पर भारत आए थे। इससे पहले अक्टूबर 2025 में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सेशेल्स गए थे। अप्रैल 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में 9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान सेशेल्स के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी।
भारत के 'विजन महासागर' में सेशेल्स का क्या महत्व है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में एक अहम समुद्री पड़ोसी होने के नाते सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर' — यानी क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए समग्र प्रगति — और 'ग्लोबल साउथ' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है।
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