28 जून 2026
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PM मोदी ने सेशेल्स संसद में दिया ऐतिहासिक संबोधन, बोले — हिंद महासागर जोड़ता है, अलग नहीं करता

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PM मोदी ने सेशेल्स संसद में दिया ऐतिहासिक संबोधन, बोले — हिंद महासागर जोड़ता है, अलग नहीं करता

सारांश

नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने मोदी ने विक्टोरिया में कहा — हिंद महासागर दीवार नहीं, पुल है। 1770 से चले आ रहे मानवीय रिश्तों और 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान के साथ यह यात्रा भारत की हिंद महासागर कूटनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने मोदी को प्रतिष्ठित 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से नवाज़ा।
मोदी ने अगस्त 1770 में जहाज 'टेलीमाक' से सेंट ऐनी द्वीप पहुँचे पाँच भारतीयों का उल्लेख कर दोनों देशों के 255 वर्ष पुराने मानवीय रिश्तों को रेखांकित किया।
सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूर्ण होने पर मोदी ने वहाँ की जनता को बधाई दी।
मोदी ने कहा कि 2015 में हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली यात्रा सेशेल्स की थी, जो भारत की हिंद महासागर नीति में इस देश की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स के बीच दूरी नहीं, बल्कि सेतु का काम करता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मोदी नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की हिंद महासागर नीति में सेशेल्स का स्थान केंद्रीय और विशेष है।

ऐतिहासिक संबोधन और स्वागत

राजधानी विक्टोरिया में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पीकर सिल्वेन लिबियन, सरकार के नेता बर्नार्ड जॉर्ज और नेशनल असेंबली के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, 'इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करना मेरे लिए विशेष सम्मान की बात है।' इससे पहले राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उन्हें प्रतिष्ठित 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से नवाज़ा, जिसे मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित सभी लोगों की प्रेरणा बताया।

255 वर्ष पुराने मानवीय रिश्तों की याद

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक जड़ों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अगस्त 1770 में जहाज 'टेलीमाक' से सेंट ऐनी द्वीप पहुँचे यात्रियों में पाँच भारतीय भी शामिल थे। यही क्षण दोनों देशों के बीच मानवीय रिश्तों की नींव बना और कालांतर में भारतीय समुदाय आधुनिक सेशेल्स की पहचान का अभिन्न अंग बन गया। गौरतलब है कि यह यात्रा राजनयिक संबंधों की स्थापना से भी दो सदी से अधिक पुरानी है।

उन्होंने कहा, 'हमारे संबंध सरकारों ने नहीं बनाए। इन्हें लोगों ने बनाया, परिवारों ने आगे बढ़ाया और पीढ़ियों ने संजोकर रखा। हिंद महासागर ने इस रिश्ते को मज़बूत किया है। यही कारण है कि हम अजनबियों की तरह नहीं, बल्कि पुराने मित्रों की तरह मिलते हैं।'

सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और साझा विरासत

सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूर्ण होने पर वहाँ की जनता को बधाई देते हुए मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स की मित्रता राजनयिक संबंधों के पाँच दशकों तक सीमित नहीं है — इसकी जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं। उन्होंने सेशेल्स की सांस्कृतिक विविधता की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने मिलकर एक साझा 'सेशेल्वा' पहचान गढ़ी है। नेशनल असेंबली का आदर्श वाक्य 'यूनिटी इन डायवर्सिटी' — जो भारत की अपनी संवैधानिक भावना से भी मेल खाता है — इसी एकता का प्रतीक है।

सांस्कृतिक जुड़ाव: करी से गरबा तक

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रोज़मर्रा के सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कारी कोको, समोसे और चटनी के स्वाद से लेकर दीपावली, थाई पोंगल और नवरात्रि के दौरान गरबा जैसे उत्सव दोनों देशों के सांस्कृतिक ताने-बाने को और मज़बूत करते हैं। क्रियोल संगीत, माउत्या नृत्य और फेस्टिवल क्रियोल जैसे आयोजनों में भी यह साझापन झलकता है।

2015 की यात्रा और हिंद महासागर की प्राथमिकता

मोदी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वर्ष 2015 में हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली यात्रा सेशेल्स की थी — और यह अफ्रीका का भी उनका पहला दौरा था। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आकस्मिक नहीं था, बल्कि यह भारत की हिंद महासागर रणनीति में सेशेल्स की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा सांस्कृतिक विरासत और क्रियोल भावना आने वाले वर्षों में भारत-सेशेल्स मित्रता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें छोटे हिंद महासागरीय द्वीप-राष्ट्रों को चीन के बढ़ते प्रभाव के विरुद्ध रणनीतिक साझेदार के रूप में साधने की कोशिश है। नेशनल असेंबली में संबोधन और 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान — दोनों प्रतीकात्मक रूप से शक्तिशाली हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि रक्षा, मत्स्य पालन और जलवायु सहयोग के ठोस समझौते किस हद तक ज़मीन पर उतरते हैं। यह भी गौरतलब है कि 2015 के बाद यह मोदी की दूसरी सेशेल्स यात्रा है — जो इस बात का संकेत है कि हिंद महासागर की भू-राजनीति में छोटे द्वीप-राष्ट्र अब नई दिल्ली की प्राथमिकता सूची में ऊपर आ चुके हैं।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है, और सेशेल्स भारत की हिंद महासागर नीति में विशेष स्थान रखता है। उन्होंने 1770 से चले आ रहे मानवीय रिश्तों का उल्लेख किया और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया।
'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान क्या है और मोदी को यह क्यों मिला?
यह सेशेल्स द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है, जो पर्यावरण और समुद्री संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने 28 जून 2026 को PM मोदी को यह सम्मान प्रदान किया।
भारत और सेशेल्स के संबंध कितने पुराने हैं?
मोदी के अनुसार, दोनों देशों के मानवीय रिश्ते अगस्त 1770 तक जाते हैं, जब जहाज 'टेलीमाक' से सेंट ऐनी द्वीप पहुँचे यात्रियों में पाँच भारतीय शामिल थे। राजनयिक संबंध 50 वर्ष पुराने हैं, लेकिन लोगों के बीच का रिश्ता इससे कहीं अधिक पुराना है।
मोदी की सेशेल्स यात्रा का रणनीतिक महत्व क्या है?
यह मोदी की 2015 के बाद दूसरी सेशेल्स यात्रा है और वे नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीति और छोटे द्वीप-राष्ट्रों के साथ साझेदारी मज़बूत करने की नीति को दर्शाती है।
सेशेल्स में भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव कैसे दिखता है?
मोदी ने बताया कि कारी कोको, समोसे और चटनी जैसे खाद्य पदार्थों से लेकर दीपावली, थाई पोंगल और नवरात्रि के दौरान गरबा जैसे त्योहार सेशेल्स की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय समुदाय आधुनिक सेशेल्स की पहचान का अभिन्न अंग है।
राष्ट्र प्रेस
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