मोदी ने 20वीं बार विदेशी संसद को संबोधित किया, सेशेल्स नेशनल असेंबली में बोले — 'भारत-सेशेल्स का प्यार का रिश्ता'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में देश की नेशनल असेंबली को संबोधित किया और इसी के साथ उन्होंने किसी विदेशी संसद को 20वीं बार संबोधित करने का नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच 50 साल पुराना गहरा रिश्ता है और दोनों देश न केवल साझेदार हैं, बल्कि उनके बीच प्रेम और विश्वास का बंधन है।
ऐतिहासिक संबोधन और नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। रवाना होने से पूर्व उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, "मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है।"
नेशनल असेंबली में उन्होंने कहा, "सेशेल्स के दिल में भारतीयों के लिए प्यार है। सेशेल्स के साथ भारत का प्यार का रिश्ता है और दोनों देश साझेदार हैं।"
विदेशी संसद संबोधनों का सफर: 2014 से 2026 तक
2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद मोदी ने सबसे पहले भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फिजी की संसदों को संबोधित किया। 2015 में यह सिलसिला मॉरीशस की नेशनल असेंबली, श्रीलंका, मंगोलिया, ब्रिटेन और अफगानिस्तान की संसदों तक पहुँचा।
2016 में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया और 2023 में दोबारा अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित कर वह अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इसके अलावा 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव और 2024 में गुयाना की संसदों को भी संबोधित किया गया।
2025 में जुलाई के दौरान घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा नामीबिया की राष्ट्रीय संसदों को संबोधन हुआ। उसी वर्ष दिसंबर में इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जो अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को रेखांकित करता है।
इस वर्ष 25 फरवरी 2026 को यरुशलम की राजकीय यात्रा के दौरान उन्होंने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित किया और इस तरह नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
सर्वोच्च सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन'
सेशेल्स यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके नेतृत्व के लिए सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' प्रदान किया गया। यह सम्मान सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की ओर से दिया गया।
मोदी ने एक्स पर लिखा, "मुझे 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से सम्मानित करने के लिए सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी का आभार।" उन्होंने यह सम्मान उन सभी देशों को समर्पित किया जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण को अपना दायित्व मानते हैं।
भारत-सेशेल्स संबंधों का महत्व
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को लेकर व्यापक चर्चा है। गौरतलब है कि सेशेल्स हिंद महासागर का एक महत्वपूर्ण द्वीपीय देश है और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' तथा 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति में इसका विशेष स्थान है। दोनों देशों के बीच 50 वर्षों की राजनयिक मित्रता समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर टिकी है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस संबोधन के साथ भारत की संसदीय कूटनीति एक नए मुकाम पर पहुँची है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और गहरे सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है।