मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन', किसी अंतरराष्ट्रीय नेता को पहली बार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स ने अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' प्रदान किया है — और यह पहला अवसर है जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है। 29 जून 2026 को विक्टोरिया में आयोजित एक विशेष समारोह में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे राष्ट्रपति कार्यालय ने 'प्रतीकात्मक और आत्मीय' बताया।
ऐतिहासिक अवसर पर मिला ऐतिहासिक सम्मान
यह समारोह दोहरे ऐतिहासिक मील के पत्थर पर आयोजित हुआ — सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती। सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों का गौरव है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच 50 वर्षों की दोस्ती, विश्वास और सहयोग का प्रतीक बताया।
मोदी ने यह भी कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों का साझा घर है और इसकी सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने मिशन लाइफ, इंटरनेशनल सोलर अलायंस और आपदा-रोधी ढाँचे जैसी भारतीय पहलों का उल्लेख करते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सम्मान का स्वरूप और महत्व
'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' एक पारंपरिक पदक नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक राष्ट्रपति सम्मान है। यह उन नेताओं को दिया जाता है जिनका कार्य समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा होता है।
सेशेल्स सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान सतत विकास, हिंद महासागर की समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा, ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने और छोटे द्वीपीय देशों के पक्ष में निरंतर खड़े रहने की नीति को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया है।
नई पुरस्कार प्रणाली की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह सम्मान प्रणाली हाल ही में हुए बड़े विधायी बदलावों के बाद अस्तित्व में आई है। 5 जून 2026 को प्रकाशित सेशेल्स नेशन की रिपोर्ट के अनुसार, सेशेल्स की संसद ने 'राष्ट्रीय पुरस्कार (निरसन) विधेयक 2026' पारित कर पहले से मौजूद राष्ट्रीय पुरस्कार व्यवस्था और 'मेडल ऑफ द रिपब्लिक' को समाप्त कर दिया।
इस विधेयक के पक्ष में यूनाइटेड सेशेल्स (यूएस) के 17 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि लिनीओन डेमोक्रेटिक सेसेल्वा (एलडीएस) के 14 सदस्यों ने विरोध में वोट दिया। कोई भी सदस्य मतदान से अनुपस्थित नहीं रहा। 2022 में बनाई गई पुरानी व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति को स्वतः सम्मान देने का प्रावधान था, जिसे पारदर्शिता संबंधी चिंताओं के चलते समाप्त किया गया। हालाँकि, पहले प्रदान किए गए सभी पुरस्कार वैध बने रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की लंबी सूची में नया अध्याय
यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को मिले कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में नवीनतम है। इससे पहले उन्हें एफएओ (खाद्य और कृषि संगठन) का एग्रीकोला मेडल, सोल शांति पुरस्कार और संयुक्त राष्ट्र का 'चैंपियन ऑफ द अर्थ' सम्मान मिल चुका है।
सेशेल्स सरकार ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और समुद्री चुनौतियों के सबसे अग्रिम मोर्चे पर खड़े देश के रूप में उनके लिए ऐसे वैश्विक साझेदारों की पहचान करना और उन्हें सम्मानित करना विशेष महत्व रखता है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती साझेदारी और नेतृत्व की भूमिका को और पुख्ता करता है।