16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एमपीएससी कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त 2027 तक स्थगित, सीएम फडणवीस का बड़ा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एमपीएससी कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त 2027 तक स्थगित, सीएम फडणवीस का बड़ा फैसला

सारांश

लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए राहत — सीएम फडणवीस ने एमपीएससी की कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को अगस्त 2027 तक टाल दिया। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में हफ्तों के विरोध-प्रदर्शन के बाद यह फैसला आया, जो ग्रामीण अभ्यर्थियों की डिजिटल तैयारी और बुनियादी ढाँचे की कमी की चिंताओं को स्वीकार करता है।

मुख्य बातें

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 16 जुलाई को घोषणा की कि एमपीएससी की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली अगस्त 2027 तक स्थगित रहेगी।
तब तक आयोग की सभी परीक्षाएं ऑफलाइन (पेन और पेपर) माध्यम से आयोजित होंगी।
सरकार ने आयोग को करीब 13 महीने का अतिरिक्त समय दिया है, जिसमें राज्यभर में डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे।
पुणे और छत्रपति संभाजीनगर समेत कई शहरों में छात्र संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद यह निर्णय लिया गया।
जून 2026 में एमपीएससी ने ग्रुप-सी परीक्षा से CBT और नॉर्मलाइजेशन प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी, जिसे अब टाल दिया गया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 16 जुलाई को घोषणा की कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की प्रस्तावित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली को अगस्त 2027 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। तब तक आयोग की सभी परीक्षाएं पूर्ववत ऑफलाइन (पेन और पेपर) माध्यम से आयोजित होती रहेंगी। यह निर्णय राज्यभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय

मुंबई स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार, राज्य के मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार के अनुसार, इस अतिरिक्त समय का उपयोग महाराष्ट्र के सभी जिलों में तकनीकी रूप से सुदृढ़ डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित करने में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री का पक्ष

बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि परीक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोकने और समय पर परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सुरक्षित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया हमेशा मेरी प्राथमिकता रही है। परीक्षा समय पर हो, पूरी पारदर्शिता के साथ हो और परिणाम भी जल्द घोषित किए जाएं। लेकिन किसी भी नई व्यवस्था में बदलाव धीरे-धीरे और पूरी तैयारी के साथ होना चाहिए।' उन्होंने माना कि अचानक बदलाव से अभ्यर्थियों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

विरोध-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जून 2026 के अंतिम सप्ताह में एमपीएससी ने घोषणा की थी कि ग्रुप-सी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से शुरुआत करते हुए परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित (CBT) तरीके से होंगी और नॉर्मलाइजेशन मार्किंग प्रणाली लागू की जाएगी। इस घोषणा के बाद पुणे, छत्रपति संभाजीनगर समेत राज्य के कई हिस्सों में छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षार्थी सड़कों पर उतर आए। छात्र संगठनों ने तर्क दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल परीक्षा केंद्रों का अभाव है, जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को बड़े शहरों तक जाना पड़ता। इसके अलावा, सर्वर फेल होने, तकनीकी गड़बड़ियों और नॉर्मलाइजेशन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

आम अभ्यर्थियों पर असर

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय से आयोग को करीब 13 महीने का अतिरिक्त समय मिला है। इस अवधि में ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में मानक डिजिटल परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। अब तक ओएमआर शीट आधारित परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नई व्यवस्था के लिए मानसिक और रणनीतिक रूप से तैयार होने का समय भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने एमपीएससी को इन दिशा-निर्देशों के आधार पर संस्थागत तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

आगे क्या होगा

अगस्त 2027 तक एमपीएससी की समस्त परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से ही आयोजित होंगी, जबकि आयोग नई डिजिटल व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी जारी रखेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की मांग लगातार तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो अगस्त 2027 में फिर वही विरोध-प्रदर्शन दोहराए जाएंगे। असली परीक्षा अब एमपीएससी और राज्य सरकार की है — क्या वे इस मोहलत का उपयोग ठोस तैयारी के लिए करेंगे, या यह महज राजनीतिक राहत बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी की कंप्यूटर आधारित परीक्षा क्यों स्थगित की गई?
छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों की लगातार मांगों तथा राज्यभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सीएम फडणवीस ने यह निर्णय लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल परीक्षा केंद्रों की कमी और अभ्यर्थियों की CBT अनुभवहीनता मुख्य कारण रहे।
अगस्त 2027 तक एमपीएससी परीक्षाएं किस माध्यम से होंगी?
अगस्त 2027 तक एमपीएससी की सभी परीक्षाएं पूर्ववत ऑफलाइन यानी पेन और पेपर (OMR शीट) माध्यम से आयोजित की जाएंगी। नई कंप्यूटर आधारित प्रणाली इस अवधि के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
एमपीएससी CBT प्रणाली पर छात्रों की मुख्य आपत्तियाँ क्या थीं?
छात्र संगठनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में मानक डिजिटल परीक्षा केंद्रों की कमी, सर्वर फेल होने का डर, तकनीकी गड़बड़ियों की आशंका और नॉर्मलाइजेशन मार्किंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान की आशंका थी।
इस 13 महीने की अवधि में सरकार क्या करेगी?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस अवधि में महाराष्ट्र के सभी जिलों में तकनीकी रूप से सुदृढ़ और विश्वसनीय डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे। साथ ही एमपीएससी संस्थागत और प्रशासनिक तैयारियां पूरी करेगा ताकि नई व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हो सके।
एमपीएससी CBT की मूल योजना क्या थी?
जून 2026 के अंतिम सप्ताह में एमपीएससी ने घोषणा की थी कि ग्रुप-सी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से शुरुआत करते हुए परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित तरीके से होंगी और नॉर्मलाइजेशन मार्किंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य पेपर लीक रोकना, पारदर्शिता लाना और साल में कई बार परीक्षा आयोजित करना था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 6 महीने पहले