एमपीएससी कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त 2027 तक स्थगित, सीएम फडणवीस का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 16 जुलाई को घोषणा की कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की प्रस्तावित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली को अगस्त 2027 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। तब तक आयोग की सभी परीक्षाएं पूर्ववत ऑफलाइन (पेन और पेपर) माध्यम से आयोजित होती रहेंगी। यह निर्णय राज्यभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय
मुंबई स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार, राज्य के मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार के अनुसार, इस अतिरिक्त समय का उपयोग महाराष्ट्र के सभी जिलों में तकनीकी रूप से सुदृढ़ डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित करने में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का पक्ष
बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि परीक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोकने और समय पर परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सुरक्षित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया हमेशा मेरी प्राथमिकता रही है। परीक्षा समय पर हो, पूरी पारदर्शिता के साथ हो और परिणाम भी जल्द घोषित किए जाएं। लेकिन किसी भी नई व्यवस्था में बदलाव धीरे-धीरे और पूरी तैयारी के साथ होना चाहिए।' उन्होंने माना कि अचानक बदलाव से अभ्यर्थियों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
विरोध-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जून 2026 के अंतिम सप्ताह में एमपीएससी ने घोषणा की थी कि ग्रुप-सी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से शुरुआत करते हुए परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित (CBT) तरीके से होंगी और नॉर्मलाइजेशन मार्किंग प्रणाली लागू की जाएगी। इस घोषणा के बाद पुणे, छत्रपति संभाजीनगर समेत राज्य के कई हिस्सों में छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षार्थी सड़कों पर उतर आए। छात्र संगठनों ने तर्क दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल परीक्षा केंद्रों का अभाव है, जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को बड़े शहरों तक जाना पड़ता। इसके अलावा, सर्वर फेल होने, तकनीकी गड़बड़ियों और नॉर्मलाइजेशन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।
आम अभ्यर्थियों पर असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय से आयोग को करीब 13 महीने का अतिरिक्त समय मिला है। इस अवधि में ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में मानक डिजिटल परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। अब तक ओएमआर शीट आधारित परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नई व्यवस्था के लिए मानसिक और रणनीतिक रूप से तैयार होने का समय भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने एमपीएससी को इन दिशा-निर्देशों के आधार पर संस्थागत तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या होगा
अगस्त 2027 तक एमपीएससी की समस्त परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से ही आयोजित होंगी, जबकि आयोग नई डिजिटल व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी जारी रखेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की मांग लगातार तेज हो रही है।