क्या बीएमसी चुनावों में पीएडीयू मशीनें केवल बैकअप के रूप में उपयोग की जाएंगी?
सारांश
Key Takeaways
- राज्य निर्वाचन आयोग ने तकनीकी समस्याओं के समय पीएडीयू मशीनों के उपयोग की पुष्टि की है।
- 140 पीएडीयू यूनिट्स बीएमसी चुनावों के लिए उपलब्ध हैं।
- राज ठाकरे ने पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं।
मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों के संदर्भ में राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बुधवार को स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान यदि कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तभी प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) मशीनों का उपयोग किया जाएगा।
इसका अर्थ यह है कि पीएडीयू मशीनें सामान्य वोट गिनने के लिए नहीं लगाई जाएंगी, बल्कि केवल उन मामलों में जब बीएलई (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) की वोटिंग मशीनों में कोई तकनीकी गड़बड़ी हो, तभी इन्हें बैकअप के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
एसईसी ने बताया कि बीएमसी चुनावों में प्रयुक्त होने वाली बीएलई मशीनें 'एम3ए' मॉडल की हैं, जो कि चुनाव आयोग की हैं। वोट गिनती की प्रक्रिया में सबसे पहले बैलट यूनिट (बीयू) को कंट्रोल यूनिट (सीयू) से जोड़ा जाएगा और इसी के माध्यम से वोटों की गिनती की जाएगी। पीएडीयू केवल असाधारण परिस्थितियों में काम आएगी।
बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने भी कहा कि पीएडीयू मशीनें केवल बैकअप के तौर पर प्रयोग की जाएंगी।
एसईसी के द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि पीएडीयू डिवाइस केवल उन असामान्य मामलों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब तकनीकी समस्याओं के कारण सामान्य गिनती संभव न हो। इसके लिए कुल 140 पीएडीयू यूनिट्स बीएमसी चुनावों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। यदि किसी स्थिति में पीएडीयू का उपयोग करना पड़े, तो यह बीएलई तकनीशियन की उपस्थिति में ही होगा।
एसईसी ने पहले ही निर्देश दिए थे कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को पीएडीयू मशीन का कार्यशीलता प्रदर्शित किया जाए ताकि सभी को प्रक्रिया की जानकारी और पारदर्शिता मिले। इसके अनुसार बीएमसी ने भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के लिए मशीन का व्यावहारिक डेमो आयोजित किया।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने वोटिंग प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पीएडीयू मशीन को बैकअप के रूप में पेश करने पर सवाल उठाए और कहा कि यह मशीन राजनीतिक दलों को पहले से नहीं दिखाई गई थी। उनका आरोप था कि एसईसी ने राजनीतिक दलों को इस डिवाइस की जानकारी नहीं दी।
राज ठाकरे ने कहा कि जब ईवीएम का उपयोग होता है, तो पार्टी प्रतिनिधियों को बटन और मशीन की जांच के लिए बुलाया जाता है। लेकिन पीएडीयू मशीन के मामले में ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने इसे शुद्ध अराजकता बताया। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं की लिखित पूछताछ के बावजूद एसईसी ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।