ईरान 'आर्थिक मौत के भंवर' में: अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट का दावा, होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नियंत्रण
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 2 सितंबर 2026 को एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान आर्थिक रूप से 'मौत के भंवर' में फँस चुका है और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बढ़ते आर्थिक दबाव और सैन्य कार्रवाई का संयुक्त असर अंततः तेहरान को वार्ता की मेज पर वापस लाने के लिए बाध्य करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का दावा
बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर कोई नियंत्रण नहीं है — यह नियंत्रण हमारे पास है।' उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में लगभग 1 करोड़ 70 लाख बैरल कच्चा तेल इस जलमार्ग से निर्बाध रूप से गुजरा।
अमेरिकी सेना के सीमित हमलों में उन रडार प्रणालियों को निशाना बनाया गया, जिन्हें ईरान होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। बेसेंट के अनुसार यह कार्रवाई ईरान की समुद्री निगरानी क्षमता को कमज़ोर करने के लिए की गई।
ईरान की आर्थिक स्थिति
बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजह से वह सैन्य कदम उठाने पर मजबूर हो रही है। उन्होंने कहा, 'वे घबराए हुए हैं। आर्थिक दबाव बढ़ने के कारण वे सैन्य कार्रवाई का सहारा ले रहे हैं।' उन्होंने ईरान में ईंधन की कमी और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों का भी उल्लेख किया — यह विडंबना उजागर करते हुए कि दुनिया के बड़े ऊर्जा संसाधन-संपन्न देशों में शामिल होने के बावजूद ईरान की जनता ईंधन के लिए जूझ रही है।
ईरानी मुद्रा के मूल्य में आई तीव्र गिरावट को बेसेंट ने आर्थिक संकट का सबसे स्पष्ट संकेत बताया। उनके अनुसार, लगभग 16 महीने पहले एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा की विनिमय दर करीब 8 लाख प्रति डॉलर थी, जो अब गिरकर 2.10 लाख प्रति डॉलर के आसपास आ गई है।
वित्तीय नाकेबंदी की रणनीति
बेसेंट ने बताया कि अमेरिका ईरान की डॉलर तक पहुँच को पूरी तरह सीमित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन ईरान को रेनमिनबी (आरएमबी) में भुगतान करता है, जो खाड़ी क्षेत्र के वित्तीय नेटवर्क के ज़रिए वापस आता है। अमेरिका उन बैंकों, नकद लेनदेन केंद्रों और आपूर्ति नेटवर्क को निशाना बना रहा है जिनका उपयोग इन रकमों को परिवर्तित या स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले शुक्रवार को दुबई के एक बैंक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, हालाँकि उन्होंने उस बैंक का नाम सार्वजनिक नहीं किया। बेसेंट ने कहा, 'जब यह पैसा डॉलर में नहीं बदला जा सकेगा, तब यह शासन आर्थिक रूप से और कमज़ोर हो जाएगा।'
तीन संभावित परिणाम
बेसेंट ने कहा कि ईरानी नेतृत्व पर बढ़ता दबाव तीन में से एक नतीजे की ओर ले जा सकता है: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के भीतर आंतरिक फूट, जनता का सरकार के खिलाफ विरोध, या वाशिंगटन के साथ किसी व्यावहारिक समझौते के लिए वार्ता। उन्होंने स्वीकार किया कि दबाव बढ़ने के साथ ईरान आगे और सैन्य कार्रवाइयाँ कर सकता है, लेकिन उनका मानना है कि अंततः आर्थिक हालात तेहरान को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर करेंगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव अपने हालिया उच्चतम स्तर पर है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।