जी20 बैठक में स्कॉट बेसेंट का खुलासा: ईरान मुद्दे पर अमेरिका ने चीन-रूस से की शांत वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 2 सितंबर 2026 को एशविले, नॉर्थ कैरोलिना में संपन्न जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि अमेरिका ने ईरान मुद्दे पर चीन और रूस के साथ शांत तरीके से बातचीत की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन ने होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने में सहयोग का कोई ठोस वादा नहीं किया है।
मुख्य घटनाक्रम
दो दिवसीय बैठक के समापन पर बेसेंट ने कहा, "हमने रूस और चीन के साथ काफी शांत तरीके से बातचीत की है और मुझे लगता है कि हम इस चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं।" उनके अनुसार, आर्थिक और रणनीतिक मतभेदों के बावजूद ईरान के मामले में अमेरिका और चीन के बीच कुछ साझा हित मौजूद हैं।
बेसेंट ने कहा कि "ईरान के मुद्दे पर चीन के साथ हमारी समानताएं मतभेदों से ज़्यादा हैं।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चीन परमाणु-सशस्त्र ईरान के खिलाफ है और होर्मुज स्ट्रेट में स्वतंत्र समुद्री व्यापार का समर्थन करता है।
चीन की ऊर्जा निर्भरता और रणनीतिक भूमिका
बेसेंट ने तर्क दिया कि चीन अपनी लगभग 50 प्रतिशत ऊर्जा ज़रूरतें खाड़ी क्षेत्र से पूरी करता है, इसलिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में उसकी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा, "समाधान की दिशा में काम करना चीन की जिम्मेदारी भी है।"
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट — जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है — पर तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। इस मार्ग से खाड़ी देशों का तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) एशिया समेत दुनिया के प्रमुख बाज़ारों तक पहुँचता है।
कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं
जब बेसेंट से पूछा गया कि क्या चीन ने कोई विशेष प्रतिबद्धता जताई है, तो उन्होंने स्पष्ट किया, "नहीं, मैंने यह नहीं कहा कि कोई विशेष समझौता हुआ है। मैंने केवल इतना कहा कि हम इस बात पर सहमत हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए।" इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि चीन ईरान पर अपना कूटनीतिक या आर्थिक प्रभाव डालेगा या नहीं।
सहयोगी देशों का समर्थन
बेसेंट के अनुसार, अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अभियान में सहयोग की पेशकश की है, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, "हमारे कई सहयोगी आगे आए और उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा, हम वह करने के लिए तैयार हैं।" इस सहयोग में खुफिया जानकारी, आर्थिक सूचनाएं और ईरानी सरकार का समर्थन करने वाली संस्थाओं तक पहुँच शामिल हो सकती है।
जी20 के अध्यक्षीय बयान में ईरान का उल्लेख
बैठक के बाद जारी जी20 अध्यक्षीय बयान में होर्मुज स्ट्रेट में "सुरक्षित, स्वतंत्र और भरोसेमंद समुद्री आवाजाही" को वैश्विक आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य बताया गया। गौरतलब है कि चीन ने इस पैराग्राफ के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक असंतुलन, आईएमएफ की निगरानी और संप्रभु कर्ज से जुड़े कुछ अन्य अनुच्छेदों पर आपत्ति जताई। फिर भी बाकी जी20 देशों ने बयान का समर्थन किया। आने वाले हफ्तों में यह देखना होगा कि चीन इस सहमति को कूटनीतिक कदमों में बदलता है या नहीं।