जी7 समिट में मोदी-ट्रंप मुलाकात: होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से द्विपक्षीय बैठक की। इस बातचीत में मोदी ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का निर्बाध रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-संपर्क सहित भारत-अमेरिका संबंधों की व्यापक समीक्षा की।
मुख्य घटनाक्रम
मोदी ने बैठक में पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस क्षेत्र में आम नागरिकों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत-अमेरिका रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा गलियारों में से एक है, जिससे होकर वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति गुज़रती है। पिछले कुछ वर्षों में इस जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि समुद्री व्यापार मार्ग बाधारहित रहने चाहिए।
भारत-अमेरिका साझेदारी की स्थिति
दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बाज़ार पहुँच से जुड़े मुद्दों के समाधान के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकी और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर काम जारी है। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है, जिससे भारत अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है।
रक्षा क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रक्षा खरीद समझौतों ने आपसी विश्वास को और मज़बूत किया है। गौरतलब है कि यह द्विपक्षीय बैठक एक बहुपक्षीय मंच पर हुई, जो दर्शाती है कि दोनों देश वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को प्राथमिकता देते हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर भारत का रुख
भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया में किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने से परहेज़ करती रही है। इस बैठक में मोदी का होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर ज़ोर देना भारत की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जो समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता को राष्ट्रीय हित से जोड़ती है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं।
आगे की राह
एवियन में हुई इस उच्चस्तरीय बातचीत से उम्मीद जताई जा रही है कि आर्थिक विकास से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा तक कई मोर्चों पर भारत-अमेरिका सहयोग और गहरा होगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा में चल रही बातचीत के अगले चरण में ठोस समझौतों की संभावना बनी हुई है।