जी20 वित्त बैठक: ट्रंप प्रशासन ने निष्पक्ष व्यापार और होर्मुज खतरे पर दिया कड़ा संदेश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के एशविले शहर में 1 सितंबर 2026 को आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में ट्रंप प्रशासन ने मजबूत आर्थिक विकास, निष्पक्ष व्यापार और रेगुलेटरी सुधारों को अपनी प्राथमिकता के रूप में रखा। साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
अमेरिकी वित्त मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों की उप सचिव एरिन ब्राउन ने बताया कि सोमवार की चर्चाओं की शुरुआत वैश्विक आर्थिक स्थिति और विकास के मुद्दों से हुई। उन्होंने कहा, 'ट्रंप प्रशासन अमेरिका और पूरी दुनिया में मजबूत अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर पूरी तरह केंद्रित है। जी20 वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी साझा चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।'
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बैठक का उद्घाटन करते हुए हरिकेन हेलेन के बाद एशविले की पुनर्बहाली का विशेष उल्लेख किया — वह आपदा जिसने पश्चिमी नॉर्थ कैरोलिना में हजारों परिवारों को बेघर किया, सड़कें जलमग्न कीं और अनेक कारोबारों को नुकसान पहुँचाया। ब्राउन ने कहा, 'आज एशविले हमें दिखाता है कि पुनर्निर्माण और नई शुरुआत कैसी दिखती है।'
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने बैठक में कहा कि 'लंबे समय से चली आ रही आर्थिक सुस्ती का दौर अब खत्म हो चुका है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अमेरिकी मंदी की आशंकाएं अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं।
होर्मुज स्ट्रेट और ईरान पर अमेरिकी रुख
बैठक में होर्मुज स्ट्रेट को ईरान द्वारा बंद किए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। जी20 के कई सदस्य देशों ने इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर गहरी चिंता जताई। ब्राउन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन इस जलमार्ग को फिर से खोलने और एक ऐसे कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम कर रहा है जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा, 'हमारा अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके — ऐसा होने से दीर्घकालिक आर्थिक और बाजार संबंधी अस्थिरता भी कम होगी।'
व्यापार नीति और रेसिप्रोकल टैरिफ
व्यापारिक तनाव और वैश्विक आर्थिक असंतुलन भी बैठक के केंद्र में रहे। अमेरिका ने घोषणा की कि वह जी20 के अलग सत्र में उन व्यापारिक नीतियों का विरोध करेगा जिन्हें वह अनुचित मानता है। ब्राउन ने दो-टूक कहा, 'अब हम दूसरे देशों की अनुचित व्यापारिक नीतियों को स्वीकार नहीं करेंगे।' प्रशासन ने बताया कि रेसिप्रोकल और सेक्टोरल टैरिफ के माध्यम से अमेरिकी व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित बनाया जाएगा। इसके साथ निवेश-अनुकूल कर छूट, ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और सरकारी खर्चों में संयम जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि यूरोप सहित कई जी20 देशों ने भी इस बैठक में अपनी अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के लिए नियामकीय सरलीकरण के प्रयासों की जानकारी दी।
निजी क्षेत्र की भूमिका और एआई पर चर्चा
इस बार अमेरिका ने जी20 की चर्चाओं में निजी क्षेत्र के प्रमुख अधिकारियों को भी सीधे शामिल किया, ताकि वे वरिष्ठ वित्तीय और आर्थिक नीति निर्माताओं के साथ संवाद कर सकें। व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने मैन्युफैक्चरिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग तथा डिजिटल एसेट्स में नवाचार पर विचार-विमर्श किया। ब्राउन ने कहा, 'निजी क्षेत्र सिर्फ आर्थिक विकास में भागीदारी नहीं करता, बल्कि वही विकास पैदा करता है।'
आगे की राह
वित्त मंत्री बेसेंट ने सहयोगी देशों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि प्रशासन की नीति टकराव नहीं, सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका फर्स्ट का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है — इसका मतलब है एक मजबूत अमेरिका के आधार पर मजबूत साझेदारियाँ बनाना।' होर्मुज स्ट्रेट पर कूटनीतिक प्रयासों और व्यापार वार्ताओं के अगले दौर पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।