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ईरान की चेतावनी: अमेरिकी 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल हुए तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद

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ईरान की चेतावनी: अमेरिकी 'आर्थिक दबाव अभियान' में शामिल हुए तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद

सारांश

ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी 'आर्थिक जंग' में साथ देने वाले देशों को 'दुश्मन' माना जाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया जा सकता है — यह चेतावनी जून के शांति समझौते के बाद बढ़ते तनाव की नई परत है, जिसका असर वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ सकता है।

मुख्य बातें

मोहसेन रेजाई ने 23 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि अमेरिकी दबाव अभियान में शामिल देशों को ईरान 'दुश्मन' मानेगा।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल निर्यात रोकने की धमकी दी — जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% है।
होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून 2026 के शांति समझौते (एमओयू) की शर्तें पूरी नहीं करता।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सहायता देने वाले देशों के खिलाफ 'अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध' की घोषणा की।
विदेश मंत्री अरागची ने एक्स पर कहा कि पिछले सभी अमेरिकी दबाव अभियान विफल रहे और यह भी विफल होगा।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने 23 अगस्त 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि जो भी पड़ोसी या अन्य देश अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में तेहरान के विरुद्ध शामिल होंगे, उन्हें ईरान 'दुश्मन' मानेगा और उनके हितों को निशाना बनाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'जीवन रेखा' देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाने की घोषणा की है।

रेजाई की सीधी चेतावनी

सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक साक्षात्कार में रेजाई ने कहा कि ईरान पहले उन देशों से कूटनीतिक संपर्क करेगा और उनसे अपील करेगा कि वे अमेरिका की 'आर्थिक जंग' में भागीदार न बनें। उन्होंने आगाह किया कि यदि ये देश अमेरिकी दबाव अभियान का समर्थन जारी रखते हैं, तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल निर्यात की अनुमति नहीं देगा।

रेजाई ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून 2026 में तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुए शांति समझौते (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेता। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% गुज़रता है, जिससे इस चेतावनी का वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर सीधा असर पड़ सकता है।

ट्रंप की घोषणा और वैश्विक संदर्भ

बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, 'यह अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।' ट्रंप ने ईरान को किसी भी प्रकार की सहायता देने वाले देशों को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। यह ऐसे समय में है जब ईरान और अमेरिका के बीच जून में एक शांति समझौता हुआ था, जिसकी शर्तों के क्रियान्वयन पर अब विवाद उभर रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी दबाव की ऐतिहासिक विफलताओं की याद दिलाई। उन्होंने लिखा, '14 साल पहले 'इतिहास के सबसे कठोर प्रतिबंध' विफल रहे, 8 साल पहले 'अधिकतम दबाव' विफल रहा, 5 महीने पहले 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' विफल रहा, आज 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' का विफल होना तय है।' अरागची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का यह अभियान भी पिछले सभी जबरदस्ती वाले कदमों की तरह असफल होगा।

उप विदेश मंत्री का आकलन

कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका 'आर्थिक युद्ध' की आड़ में अपनी पिछली कूटनीतिक विफलता को छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ एक ओर अमेरिका दावा करता है कि ईरान 'पतन के कगार पर है', वहीं दूसरी ओर वह अपने सभी सहयोगियों से सहायता माँग रहा है — जो कि अमेरिकी आख्यान में ही अंतर्विरोध को उजागर करता है।

आगे क्या होगा

यह टकराव ऐसे समय में तेज़ हो रहा है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही अनिश्चितता में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की किसी भी कार्रवाई का असर भारत सहित एशियाई देशों के तेल आयात पर भी पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, जून के शांति समझौते के भविष्य पर अगले कुछ हफ्तों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अलग है: जून का शांति समझौता अभी ताज़ा है और उसकी शर्तों पर विवाद पहले ही शुरू हो गया है। असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप का 'अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध' उन्हीं देशों को निशाना बनाएगा जो भारत जैसे तेल-आयातक देशों के साथ ऊर्जा व्यापार में हैं। भारत के लिए यह स्थिति दोहरे दबाव की है — एक ओर अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम, दूसरी ओर होर्मुज से गुज़रने वाली अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला। मुख्यधारा की कवरेज इस भू-आर्थिक पेचीदगी को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने किन देशों को चेतावनी दी है?
ईरान ने पड़ोसी और अन्य सभी देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिका के 'आर्थिक दबाव अभियान' में तेहरान के विरुद्ध शामिल हो सकते हैं। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने कहा कि ऐसे देशों को ईरान 'दुश्मन' मानेगा और उनके हितों को निशाना बनाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी का क्या मतलब है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% गुज़रता है। ईरान ने कहा है कि यदि क्षेत्रीय देश अमेरिकी दबाव अभियान का समर्थन करते हैं तो वह इस जलमार्ग से तेल निर्यात की अनुमति नहीं देगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जून 2026 का ईरान-अमेरिका शांति समझौता (एमओयू) क्या है?
जून 2026 में तेहरान और वाशिंगटन के बीच एक शांति समझौता (एमओयू) हुआ था। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका इस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ क्या घोषणा की है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर घोषणा की कि ईरान को 'जीवन रेखा' देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा। उन्होंने इसे 'अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव' बताया।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिकी दबाव पर क्या कहा?
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले 14 वर्षों में अमेरिका के सभी दबाव अभियान — 'सबसे कठोर प्रतिबंध', 'अधिकतम दबाव', 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' — विफल रहे हैं और नया अभियान भी विफल होगा।
राष्ट्र प्रेस
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