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ट्रंप की ईरान को लेकर धमकियों के खिलाफ अमेरिका में उठ रहा है विरोध का स्वर

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ट्रंप की ईरान को लेकर धमकियों के खिलाफ अमेरिका में उठ रहा है विरोध का स्वर

सारांश

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के नागरिक ढांचे पर हमले की धमकी ने देश में विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है, जो वैश्विक तनाव को और बढ़ा रहा है। जानिए अमेरिका में इस पर क्या प्रतिक्रिया हो रही है।

मुख्य बातें

ट्रंप की धमकियाँ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा रही हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया है।
अमेरिका में इस पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकती है।

वॉशिंगटन, ६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की हालिया चेतावनी ने अमेरिका में व्यापक विरोध को जन्म दिया है। कानूनी विशेषज्ञों ने इस बात की ओर इशारा किया है कि ऐसी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर सकती है, वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेहरान के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बना सकता है।

पोलिटिको के अनुसार, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा—सब एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। उस जलडमरूमध्य को खोलो, नहीं तो तुम नरक में जियोगे।"

यह बयान इस समय आया है जब इस रणनीतिक जलमार्ग के लिए तनाव विकराल हो चुका है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए एक समयसीमा भी प्रदान की है। सीएनएन के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि यदि तेहरान कार्रवाई नहीं करता है, तो हमले संभव हैं।

व्हाइट हाउस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका "हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करेगा।"

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर चिंता का विषय है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पावर प्लांट और परिवहन प्रणाली जैसे ढांचे "ईरान में नागरिक जीवन की नींव हैं" और उनका विनाश "अधिकतर मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है।"

अंतरराष्ट्रीय कानून नागरिक ठिकानों पर हमलों की अनुमति नहीं देता, जब तक वे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग में न हों और सैन्य लाभ नागरिक नुकसान से अधिक न हो।

द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि "सभी पुलों या पावर प्लांट्स पर बिना भेदभाव के हमला करने की धमकी देना युद्ध अपराध करने की धमकी के समान हो सकता है।" इन टिप्पणियों पर दोनों दलों के नेताओं ने आलोचना की है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप के बयान को "पूरी तरह असंतुलित" बताया। रिपब्लिकन प्रतिनिधि डॉन बेकन ने कहा कि अमेरिकी "अपने राष्ट्रपति से अशोभनीय भाषा की उम्मीद नहीं करते," और नेतृत्व में आत्मसंयम जरूरी है।

हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ ने कहा कि प्रशासन ने अमेरिका को "बिना योजना के एक लापरवाह युद्ध" में धकेल दिया है।

कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने प्रशासन का समर्थन भी किया। प्रतिनिधि माइक लॉरलर ने सैन्य अभियान को "अविश्वसनीय ऑपरेशन" बताया।

ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया है। सीएनएन के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य "तब तक बंद रहेगा जब तक ईरान को युद्ध क्षति का भुगतान नहीं मिल जाता।"

ट्रंप ने अपनी बयानबाजी को और तीव्र किया। द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि ईरान नहीं मानता, तो वह "अपने हर पावर प्लांट और अन्य संयंत्र खो सकता है।"

उन्होंने कहा, "अगर उन्होंने मंगलवार शाम तक कुछ नहीं किया, तो उनके पास कोई पावर प्लांट और कोई पुल नहीं बचेगा।"

इन बयानों से अमेरिका के सहयोगियों में भी चिंता बढ़ी है। द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इन टिप्पणियों ने सहयोगियों को झटका दिया है, खासकर तब जब वॉशिंगटन कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति दबाव और बातचीत का मिश्रण है लेकिन इसमें तनाव बढ़ने का खतरा भी है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, "अमेरिका की भाषा और कार्रवाई के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं," और इस तरह की बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय मानकों को कमजोर कर सकती है।

पेंटागन ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है और इस पर सवालों को यूएस सेंट्रल कमांड की ओर भेजा है।

ट्रंप ने अपनी रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि ईरान पर दबाव जरूरी है और बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।

फॉक्स न्यूज के अनुसार, उन्होंने कहा, "हम स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखे हुए हैं।" यह टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। यहां किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर पड़ सकता है।

हालिया तनाव अमेरिका-ईरान संबंधों के सबसे गंभीर चरणों में से एक माना जा रहा है, जिसमें सैन्य दबाव, आर्थिक जोखिम और तीखी बयानबाजी शामिल है।

पिछले अनुभव बताते हैं कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ा सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति अभी भी बदलती हुई है और कूटनीतिक व सैन्य दबाव लगातार बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि ट्रंप की धमकियों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की चेतावनी गंभीर चिंता का विषय है। अमेरिका को एक जिम्मेदार और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या चेतावनी दी है?
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों पर हमला कर सकता है।
क्या ट्रंप की धमकियाँ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को कैसे प्रतिक्रिया दी है?
ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक उन्हें युद्ध क्षति का भुगतान नहीं मिल जाता।
क्या अमेरिका में ट्रंप की बयानबाजी का विरोध हो रहा है?
हाँ, ट्रंप की धमकियों के खिलाफ अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
क्या इस स्थिति का कोई अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हो सकता है?
विश्लेषकों का कहना है कि इस स्थिति के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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