ईरान की चेतावनी: अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को तेहरान मानेगा दुश्मन — मोहसिन रेजाई
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने 23 अगस्त 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान के विरुद्ध अमेरिका के आर्थिक अभियान में भागीदार बनेगा, तेहरान उसे अपना 'दुश्मन' घोषित करेगा। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए साक्षात्कार में यह बात कही।
रेजाई की चेतावनी: पहले बातचीत, फिर कार्रवाई
रेजाई ने कहा कि ईरान पहले ऐसे देशों से कूटनीतिक संपर्क करेगा और उन्हें इस विवाद से दूर रहने की अपील करेगा। यदि वे देश तब भी अमेरिकी दबाव में आकर ईरान-विरोधी कदम उठाते हैं, तो तेहरान उनके हितों को सीधे निशाना बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि यदि पड़ोसी देश अमेरिका के आर्थिक घेराव में शामिल हुए, तो ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात भी नहीं होने देगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और एमओयू की शर्तें
रेजाई ने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून 2026 में हस्ताक्षरित ईरान-अमेरिका शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पहला कदम वॉशिंगटन को उठाना होगा। गौरतलब है कि 18 जून 2026 को दोनों देशों ने क्षेत्रीय संघर्ष — जिसमें लेबनान से जुड़ा मामला भी शामिल था — को समाप्त करने के लिए इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुँचना था, किंतु यह अवधि बीत जाने के बाद भी वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
ईरानी विदेश मंत्री का एक्स पर पलटवार
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी अभियान को ऐतिहासिक रूप से विफल नीतियों की कड़ी बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा — '14 साल पहले: 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध' नाकाम रहे। आठ साल पहले: 'अधिकतम दबाव' नाकाम रहा। पाँच महीने पहले: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' नाकाम रहा। आज: 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' — यह भी नाकाम रहेगा।' अराघची ने कहा कि अमेरिका का यह आर्थिक अभियान भी उसकी पिछली दबाव-नीतियों की तरह असफल होगा।
ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की थी कि ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा। उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इसे 'अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव' करार दिया और इस कदम को 'इकोनॉमिक डी-डे' भी बताया।
क्या होगा आगे
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पिछले कई वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल बेचने के तरीके विकसित कर लिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एमओयू की 60 दिन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ा है। वार्ताओं की दिशा और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक तेल बाज़ार के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।