23 अगस्त 2026
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ईरान की चेतावनी: अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को तेहरान मानेगा दुश्मन — मोहसिन रेजाई

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ईरान की चेतावनी: अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को तेहरान मानेगा दुश्मन — मोहसिन रेजाई

सारांश

ईरान के सुरक्षा प्रमुख रेजाई की चेतावनी सिर्फ कूटनीतिक बयानबाज़ी नहीं — यह एमओयू टूटने की कगार पर खड़े एक गंभीर संकट का संकेत है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सीधा खतरा है, और ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' के जवाब में तेहरान का यह पलटवार क्षेत्रीय तनाव को नई ऊँचाई पर ले जा सकता है।

मुख्य बातें

मोहसिन रेजाई ने 23 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' में शामिल देश को ईरान 'दुश्मन' मानेगा।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात रोकने की धमकी दी, यदि पड़ोसी देश अमेरिकी घेराव में शामिल हुए।
18 जून 2026 के ईरान-अमेरिका एमओयू की 60 दिन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है; अंतिम समझौता अधर में।
विदेश मंत्री अराघची ने एक्स पर कहा — पिछले सभी अमेरिकी दबाव अभियान नाकाम रहे, यह भी रहेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान समर्थक देशों के खिलाफ 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान किया।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने 23 अगस्त 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान के विरुद्ध अमेरिका के आर्थिक अभियान में भागीदार बनेगा, तेहरान उसे अपना 'दुश्मन' घोषित करेगा। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए साक्षात्कार में यह बात कही।

रेजाई की चेतावनी: पहले बातचीत, फिर कार्रवाई

रेजाई ने कहा कि ईरान पहले ऐसे देशों से कूटनीतिक संपर्क करेगा और उन्हें इस विवाद से दूर रहने की अपील करेगा। यदि वे देश तब भी अमेरिकी दबाव में आकर ईरान-विरोधी कदम उठाते हैं, तो तेहरान उनके हितों को सीधे निशाना बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि यदि पड़ोसी देश अमेरिका के आर्थिक घेराव में शामिल हुए, तो ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात भी नहीं होने देगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और एमओयू की शर्तें

रेजाई ने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून 2026 में हस्ताक्षरित ईरान-अमेरिका शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पहला कदम वॉशिंगटन को उठाना होगा। गौरतलब है कि 18 जून 2026 को दोनों देशों ने क्षेत्रीय संघर्ष — जिसमें लेबनान से जुड़ा मामला भी शामिल था — को समाप्त करने के लिए इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुँचना था, किंतु यह अवधि बीत जाने के बाद भी वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

ईरानी विदेश मंत्री का एक्स पर पलटवार

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी अभियान को ऐतिहासिक रूप से विफल नीतियों की कड़ी बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा — '14 साल पहले: 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध' नाकाम रहे। आठ साल पहले: 'अधिकतम दबाव' नाकाम रहा। पाँच महीने पहले: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' नाकाम रहा। आज: 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' — यह भी नाकाम रहेगा।' अराघची ने कहा कि अमेरिका का यह आर्थिक अभियान भी उसकी पिछली दबाव-नीतियों की तरह असफल होगा।

ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की थी कि ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा। उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इसे 'अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव' करार दिया और इस कदम को 'इकोनॉमिक डी-डे' भी बताया।

क्या होगा आगे

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पिछले कई वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल बेचने के तरीके विकसित कर लिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एमओयू की 60 दिन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ा है। वार्ताओं की दिशा और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक तेल बाज़ार के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार वैश्विक तेल बाज़ार में हलचल मचती है। लेकिन इस बार संदर्भ अलग है: एमओयू की समय-सीमा बीत चुकी है, वार्ताएँ ठप हैं, और ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' तीसरे देशों को सीधे निशाना बनाता है — जो भारत, चीन और खाड़ी देशों के लिए कठिन कूटनीतिक विकल्प खड़े करता है। मुख्यधारा की कवरेज ट्रंप बनाम ईरान के द्विपक्षीय ढाँचे में उलझी है, जबकि असली दबाव उन तीसरे देशों पर है जो ईरानी तेल खरीदते हैं — भारत उनमें प्रमुख है। बिना किसी सत्यापन तंत्र के एमओयू का टूटना यह भी दर्शाता है कि जून का समझौता शुरू से ही कितना नाज़ुक था।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहसिन रेजाई की चेतावनी का क्या अर्थ है?
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि जो देश अमेरिका के ईरान-विरोधी आर्थिक अभियान में शामिल होगा, तेहरान उसे दुश्मन मानेगा और उसके हितों को निशाना बनाएगा। यह चेतावनी ईरान के उन सभी व्यापारिक साझेदारों के लिए है जो अमेरिकी दबाव में ईरान से संबंध तोड़ सकते हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी कितनी गंभीर है?
रेजाई ने स्पष्ट कहा कि यदि पड़ोसी देश अमेरिकी घेराव में शामिल हुए तो ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात नहीं होने देगा। हॉर्मुज से विश्व का लगभग 20% समुद्री तेल गुज़रता है, इसलिए यह धमकी वैश्विक ऊर्जा बाज़ार के लिए अत्यंत संवेदनशील है।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या था और अब क्यों संकट में है?
18 जून 2026 को दोनों देशों ने क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुँचना था। यह समय-सीमा बीत चुकी है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक के सबसे कठोर आर्थिक अभियान' की घोषणा की है, जिसे उन्होंने 'इकोनॉमिक डी-डे' कहा। उन्होंने इसे 'अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव' बताया।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पिछले 14 वर्षों में अमेरिका के हर दबाव अभियान — 'सबसे कड़े प्रतिबंध', 'अधिकतम दबाव', 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' — नाकाम रहे हैं, और यह नया अभियान भी नाकाम रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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