27 सितंबर 2026
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान अडिग: ट्रंप की 'न' के बाद अराघची ने दोहराई शर्तें

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान अडिग: ट्रंप की 'न' के बाद अराघची ने दोहराई शर्तें

सारांश

ट्रंप के 'न' के बाद ईरान और भी सख्त हो गया है। विदेश मंत्री अराघची ने साफ कहा — होर्मुज खोलना होगा तो पहले अमेरिकी नाकेबंदी हटे, प्रतिबंध उठें और फ्रीज संपत्तियाँ लौटें। जून का पाकिस्तान-मध्यस्थित समझौता पहले ही टूट चुका है, और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार दाँव पर है।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।
ईरान की माँगें: फ्रीज संपत्तियों की वापसी, तेल प्रतिबंध हटाना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को युद्धविराम प्रस्ताव ठुकरा दिया।
जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ एमओयू होर्मुज में जहाजों पर गोलीबारी के बाद टूट चुका है।
यह संकट लगभग सात महीने पहले अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 27 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर तेहरान अपनी पूर्व-निर्धारित शर्तों से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराने के महज एक दिन बाद आया है। इस तरह वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज को लेकर गतिरोध और गहरा हो गया है।

ईरान की शर्तें क्या हैं

ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा, 'हमारी शर्तें स्पष्ट हैं, और होर्मुज को फिर से खोलने की दिशा में कोई भी कदम इन शर्तों के पूरा होने पर ही निर्भर करेगा। हम इनसे पीछे नहीं हटेंगे।' तेहरान की माँगों में मध्य-पूर्व — लेबनान सहित — में सभी शत्रुताओं का अंत, ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति शामिल हैं।

अराघची ने यह भी कहा, 'हमने कूटनीति या संवाद के दरवाजे कभी बंद नहीं किए, लेकिन साथ ही हम अपने अधिकारों से कभी पीछे नहीं हटे हैं।' यह बयान उनकी उस रणनीतिक सोच को दर्शाता है जिसमें दबाव में न झुकते हुए बातचीत की संभावना भी खुली रखी जाती है।

ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'वे एक ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिसमें वे तुरंत स्ट्रेट को खोल दें क्योंकि उन्हें बहुत बुरी तरह हार का सामना करना पड़ रहा है। वे समझौता करना चाहते हैं और मुझे लगता है कि यह ठीक है। मुझे भी समझौता करना पसंद है।' बावजूद इसके, ट्रंप ने उस विशेष प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

गौरतलब है कि यह विवाद लगभग सात महीने पहले ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक तनाव का केंद्रबिंदु बन गया है।

जून का एमओयू और उसका टूटना

वाशिंगटन और तेहरान ने जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध को खत्म करना, होर्मुज को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता शुरू करना था।

लेकिन यह समझौता उस वक्त टूट गया जब ईरान ने होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की। ईरान का आरोप था कि ये जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए तय रास्ते से भटक गए थे। इस घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच विश्वास की खाई और चौड़ी हो गई है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई और मंदी की आशंकाओं से जूझ रही है। भारत सहित कई आयातक देशों के लिए होर्मुज का खुलना आर्थिक रूप से बेहद ज़रूरी है।

आगे क्या होगा

अराघची ने रविवार को यह भी कहा कि ईरानियों ने 'अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली प्रतिक्रिया देखी, लेकिन अब तक मध्यस्थों की ओर से हमें कुछ भी नहीं बताया गया है।' इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान या अन्य संभावित मध्यस्थों की भूमिका अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में मध्यस्थता के किसी नए प्रयास की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन दोनों पक्षों की सार्वजनिक कठोरता को देखते हुए निकट भविष्य में सफलता की उम्मीद कम ही नज़र आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब जून का एमओयू महज कुछ हफ्तों में टूट गया, तो किसी नए समझौते की नींव क्या होगी। ट्रंप की 'हाँ भी, ना भी' वाली भाषा — 'मुझे भी समझौता पसंद है' — बातचीत की इच्छा तो जताती है, पर शर्तों पर खामोश है। इस गतिरोध में सबसे बड़ा नुकसान उन देशों को है जो होर्मुज से गुज़रने वाले तेल पर निर्भर हैं — भारत उनमें सबसे आगे है। मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लग गया है, क्योंकि उसकी देखरेख में हुआ समझौता टिक नहीं सका।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की शर्तें क्या हैं?
ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं — फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की वापसी, ईरानी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति। विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट कहा है कि इन शर्तों से पीछे नहीं हटा जाएगा।
ट्रंप ने ईरान का युद्धविराम प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि ईरान दबाव में समझौता चाहता है क्योंकि उसे 'बुरी तरह हार का सामना' करना पड़ रहा है। हालाँकि उन्होंने समझौते की इच्छा जताई, लेकिन उस विशेष प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
जून 2026 का एमओयू क्या था और वह क्यों टूटा?
जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य युद्ध समाप्त करना और होर्मुज खोलना था। यह समझौता तब टूटा जब ईरान ने होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की, यह कहते हुए कि वे तय रास्ते से भटक गए थे।
होर्मुज के बंद रहने से भारत पर क्या असर पड़ रहा है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, और भारत एक प्रमुख तेल आयातक देश है। इसके बंद रहने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमतें ऊँची बनी रहती हैं, जिसका सीधा असर भारत की आर्थिक लागत पर पड़ता है।
क्या ईरान-अमेरिका के बीच नई बातचीत की संभावना है?
अराघची ने कहा है कि ईरान ने कूटनीति के दरवाज़े बंद नहीं किए हैं, लेकिन मध्यस्थों से अभी तक कोई नया संदेश नहीं मिला है। विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में किसी सफल समझौते की संभावना कम है, क्योंकि दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से कठोर रुख अपना रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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